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Lakhimpur Kheri News: सरकारी अस्पतालों में पानी भी बीमार
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:52 PM IST
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जिला अस्पताल में ओवरहेड टैंक के पास जमा गदंगी। संवाद
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लखीमपुर खीरी। सरकारी अस्पतालों में शुद्ध पानी का दावा बीमार पड़ गया है। गंदगी के बीच लगे वाटर प्यूरीफायर और छतों पर रखीं टंकियां इसकी पोल खोलने के लिए काफी हैं। इस बीच मरीजों व उनके तीमारदारों को राहत देने वाले अस्पतालों में ही बीमारी फैलने का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है।
शनिवार को पड़ताल की गई तो मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल की छत पर बनी सीमेंट की टंकियों के पास काई और गदंगी जमी मिली। जिम्मेदारों ने बताया कि टंकियों की सफाई पिछले साल अप्रैल में की गई थी। इसके बाद से सफाई नहीं हुई।
पड़ताल में ये भी सामने आया कि जिला अस्पताल में दो प्लंबर व एक इलेक्ट्रीशियन तैनात हैं, जिनको करीब छह माह से वेतन ही नहीं मिला। इस कारण प्लंबर ने नवंबर से जिला अस्पताल आना ही बंद कर दिया। इस वजह से शुद्ध जल की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।
मोहम्मदी सीएचसी में इंडिया मार्का हैंडपंप खराब मिला। इसकी हालत काफी दिन से ऐसी है। यही हाल अन्य अस्पतालों का भी मिला। अस्पतालों में पीने के पानी और हाथ धोने के लिए इस्तेमाल होने वाली टोटियों के आसपास काई जमी थी।
निघासन सीएचसी के बाहर लगे वाटर प्यूरीफायर में चारों तरफ गंदगी और काई थी। फूलबेहड़ सीएचसी में सात महीने से सीएचसी गेट के सामने लगी टोटी खराब है। सिर्फ हैंडपंप व पैथोलॉजी के पास लगी टोटी ही सहारा बनी हुई है, जबकि दो सौ से अधिक मरीज रोज ओपीडी में पहुंचते हैं।
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शनिवार को पड़ताल की गई तो मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल की छत पर बनी सीमेंट की टंकियों के पास काई और गदंगी जमी मिली। जिम्मेदारों ने बताया कि टंकियों की सफाई पिछले साल अप्रैल में की गई थी। इसके बाद से सफाई नहीं हुई।
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पड़ताल में ये भी सामने आया कि जिला अस्पताल में दो प्लंबर व एक इलेक्ट्रीशियन तैनात हैं, जिनको करीब छह माह से वेतन ही नहीं मिला। इस कारण प्लंबर ने नवंबर से जिला अस्पताल आना ही बंद कर दिया। इस वजह से शुद्ध जल की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।
मोहम्मदी सीएचसी में इंडिया मार्का हैंडपंप खराब मिला। इसकी हालत काफी दिन से ऐसी है। यही हाल अन्य अस्पतालों का भी मिला। अस्पतालों में पीने के पानी और हाथ धोने के लिए इस्तेमाल होने वाली टोटियों के आसपास काई जमी थी।
निघासन सीएचसी के बाहर लगे वाटर प्यूरीफायर में चारों तरफ गंदगी और काई थी। फूलबेहड़ सीएचसी में सात महीने से सीएचसी गेट के सामने लगी टोटी खराब है। सिर्फ हैंडपंप व पैथोलॉजी के पास लगी टोटी ही सहारा बनी हुई है, जबकि दो सौ से अधिक मरीज रोज ओपीडी में पहुंचते हैं।

जिला अस्पताल में ओवरहेड टैंक के पास जमा गदंगी। संवाद

जिला अस्पताल में ओवरहेड टैंक के पास जमा गदंगी। संवाद

जिला अस्पताल में ओवरहेड टैंक के पास जमा गदंगी। संवाद

जिला अस्पताल में ओवरहेड टैंक के पास जमा गदंगी। संवाद