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Lakhimpur Kheri News: फायर स्टेशन में आधा स्टाफ, फिर भी जिम्मेदारी दोगुनी

संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Sun, 22 Mar 2026 11:27 PM IST
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Half the staff at the fire station, yet double the responsibility
गोला के अ​ग्निशमन केंद्र पर खड़ी फायर बाइक । संवाद
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गोला गोकर्णनाथ। क्षेत्र में आग से निपटने की जिम्मेदारी गोला फायर स्टेशन के सीमित स्टाफ पर टिकी हुई है। फायर स्टेशन पर स्वीकृत 26 पदों के सापेक्ष महज 11 फायर फाइटर तैनात हैं, जबकि उन्हें करीब 50 किलोमीटर क्षेत्र में होने वाली आग की घटनाओं से निपटना पड़ता है। स्टाफ की कमी के चलते यहां प्रशिक्षण देकर सात होमगार्डों की मदद भी ली जा रही है।

गर्मी के मौसम में अक्सर अग्निकांड की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में संसाधनों और कर्मचारियों की कमी फायर स्टेशन के लिए चुनौती बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं, जिन्हें देखते हुए अब ब्लॉक स्तर पर वॉलंटियर तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए प्रधानों और जागरूक किसानों का सहयोग लिया जा रहा है, ताकि आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर ही उसे काबू में किया जा सके।
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नगर में स्थित फायर स्टेशन पर फिलहाल एक फायर टेंडर (6500 लीटर क्षमता), एक हाई प्रेशर एफक्यूआरवी (600 लीटर), दो पोर्टेबल पंप, एक बोलेरो कैंपर, एक फायर बाइक और एक फ्लोटिंग पंप उपलब्ध है। फायर स्टेशन इंचार्ज अंकित कुमार के नेतृत्व में एएसआई/ड्राइवर सुरेंद्र सिंह शिंदे समेत कुल 11 फायर फाइटर तैनात हैं। इनके साथ सात प्रशिक्षित होमगार्ड भी आग बुझाने के कार्य में सहयोग करते हैं।

शहर में जल स्रोत के रूप में मेला मैदान में छह फायर हाइड्रेंट क्रियाशील हैं। नगर पालिका परिषद और हमीद मार्केट में एक-एक हाइड्रेंट मौजूद है। सिद्धिविनायक मैरिज हाॅल, हीरो एजेंसी, हरजस रेस्टोरेंट, बजाज चीनी मिल और लखीमपुर मार्ग स्थित कोल्ड स्टोर में भी हाइड्रेंट की सुविधा है।

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सूखे जलाशय और तालाब बने समस्या


ग्रामीण क्षेत्रों में आग बुझाने के लिए जलाशय और तालाब प्रमुख जल स्रोत होते हैं, लेकिन अधिकतर जलाशय और तालाब इस समय सूखे पड़े हैं। एएसआई सुरेंद्र सिंह शिंदे ने बताया कि आग लगने की घटनाओं के दौरान सूखे जल स्रोत बड़ी समस्या बन जाते हैं। ऐसे समय में प्रशिक्षण प्राप्त वॉलिंटियर, किसानों के ट्यूबवेल और स्प्रे मशीनें काफी मददगार साबित होती हैं। फायर स्टेशन इंचार्ज ने बताया कि लोगों को आग से बचाव के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर वर्ष करीब 60 से 70 घटनाएं घूरे से लगने वाली आग की होती हैं। हालांकि लोगों में बढ़ती जागरूकता के कारण पिछले वर्षों की तुलना में ऐसी घटनाओं में कुछ कमी आई है।

काउंटर फायर विधि से बुझाई जाती है आग

फायर फाइटरों के अनुसार जंगल और खेतों में लगी आग को बुझाना सबसे कठिन होता है। ऐसी स्थिति में काउंटर फायर विधि काफी कारगर साबित होती है। गेहूं जैसी फसलों में आग लगने पर आग के आगे वाले हिस्से की फसल को ट्रैक्टर के हैरो से जोत दिया जाता है और उस हिस्से को पानी डालकर भिगो दिया जाता है। इसके बाद आग लगे हिस्से और भीगे हिस्से के बीच विपरीत दिशा से आग लगा दी जाती है, जिससे आग आगे नहीं बढ़ पाती और उस पर काबू पाने में मदद मिलती है। इसे काउंटर फायर विधि कहा जाता है।



वर्जन
स्टाफ की कमी है। ग्रामीण क्षेत्र में आग की घटनाओं को प्रारंभिक स्तर पर रोकने के लिए अग्नि संचेतक (वॉलंटियर) को प्रशिक्षित किया गया है। लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जिससे आग की घटनाओं में कमी भी आई है। संसाधन पर्याप्त हैं।

-अंकित कुमार, स्टेशन इंचार्ज, फायर स्टेशन गोला
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गर्मी के मौसम में अक्सर अग्निकांड की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में संसाधनों और कर्मचारियों की कमी फायर स्टेशन के लिए चुनौती बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं, जिन्हें देखते हुए अब ब्लॉक स्तर पर वॉलंटियर तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए प्रधानों और जागरूक किसानों का सहयोग लिया जा रहा है, ताकि आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर ही उसे काबू में किया जा सके।

नगर में स्थित फायर स्टेशन पर फिलहाल एक फायर टेंडर (6500 लीटर क्षमता), एक हाई प्रेशर एफक्यूआरवी (600 लीटर), दो पोर्टेबल पंप, एक बोलेरो कैंपर, एक फायर बाइक और एक फ्लोटिंग पंप उपलब्ध है। फायर स्टेशन इंचार्ज अंकित कुमार के नेतृत्व में एएसआई/ड्राइवर सुरेंद्र सिंह शिंदे समेत कुल 11 फायर फाइटर तैनात हैं। इनके साथ सात प्रशिक्षित होमगार्ड भी आग बुझाने के कार्य में सहयोग करते हैं।

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सूखे जलाशय और तालाब बने समस्या


ग्रामीण क्षेत्रों में आग बुझाने के लिए जलाशय और तालाब प्रमुख जल स्रोत होते हैं, लेकिन अधिकतर जलाशय और तालाब इस समय सूखे पड़े हैं। एएसआई सुरेंद्र सिंह शिंदे ने बताया कि आग लगने की घटनाओं के दौरान सूखे जल स्रोत बड़ी समस्या बन जाते हैं। ऐसे समय में प्रशिक्षण प्राप्त वॉलिंटियर, किसानों के ट्यूबवेल और स्प्रे मशीनें काफी मददगार साबित होती हैं। फायर स्टेशन इंचार्ज ने बताया कि लोगों को आग से बचाव के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर वर्ष करीब 60 से 70 घटनाएं घूरे से लगने वाली आग की होती हैं। हालांकि लोगों में बढ़ती जागरूकता के कारण पिछले वर्षों की तुलना में ऐसी घटनाओं में कुछ कमी आई है।

काउंटर फायर विधि से बुझाई जाती है आग

फायर फाइटरों के अनुसार जंगल और खेतों में लगी आग को बुझाना सबसे कठिन होता है। ऐसी स्थिति में काउंटर फायर विधि काफी कारगर साबित होती है। गेहूं जैसी फसलों में आग लगने पर आग के आगे वाले हिस्से की फसल को ट्रैक्टर के हैरो से जोत दिया जाता है और उस हिस्से को पानी डालकर भिगो दिया जाता है। इसके बाद आग लगे हिस्से और भीगे हिस्से के बीच विपरीत दिशा से आग लगा दी जाती है, जिससे आग आगे नहीं बढ़ पाती और उस पर काबू पाने में मदद मिलती है। इसे काउंटर फायर विधि कहा जाता है।



वर्जन
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