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Lakhimpur Kheri News: ई-पंजीकरण के विरोध में एकजुट हुए वकील
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 16 Jun 2026 11:06 PM IST
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पलिया सब रजिस्ट्रार कार्यालय में ज्ञापन देते वकील, स्टांप विक्रेता और लेखक। स्रोत: बार
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लखीमपुर खीरी। प्रस्तावित ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में जिलेभर के अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर इसे लागू न करने की मांग की। वकीलों ने चेतावनी दी कि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
धौरहरा में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कृष्ण मोहन तिवारी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। अधिवक्ताओं का कहना था कि ई-पंजीकरण लागू होने से अधिवक्ता, लिपिक, बैनामा लेखक और स्टांप विक्रेताओं की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने वर्तमान ऑफलाइन पंजीकरण व्यवस्था को यथावत बनाए रखने की मांग की।
गोला गोकर्णनाथ में सेंट्रल बार एसोसिएशन की बैठक में भी ई-पंजीकरण मॉड्यूल को लेकर नाराजगी जताई गई। अधिवक्ताओं ने कहा कि नई व्यवस्था से अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक, टाइपिस्ट और स्टांप विक्रेता प्रभावित होंगे। इसके विरोध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर ई-पंजीकरण मॉड्यूल पर पुनर्विचार की मांग की गई।
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उधर, पलियाकलां में भी अधिवक्ताओं ने विलेख पंजीकरण का कार्य निजी हाथों अथवा ठेके पर दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। अधिवक्ताओं का कहना था कि इससे सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ेगी तथा आम जनता नए कानूनी विवादों में उलझ सकती है। वकीलों ने तहसील पहुंचकर एसडीएम कार्यालय में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
अधिवक्ताओं ने कहा कि ई-पंजीकरण व्यवस्था लागू होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रभावित होंगे और पंजीकरण प्रक्रिया का केंद्रीकरण बढ़ेगा। उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है।
धौरहरा में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कृष्ण मोहन तिवारी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। अधिवक्ताओं का कहना था कि ई-पंजीकरण लागू होने से अधिवक्ता, लिपिक, बैनामा लेखक और स्टांप विक्रेताओं की आजीविका प्रभावित होगी। उन्होंने वर्तमान ऑफलाइन पंजीकरण व्यवस्था को यथावत बनाए रखने की मांग की।
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गोला गोकर्णनाथ में सेंट्रल बार एसोसिएशन की बैठक में भी ई-पंजीकरण मॉड्यूल को लेकर नाराजगी जताई गई। अधिवक्ताओं ने कहा कि नई व्यवस्था से अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक, टाइपिस्ट और स्टांप विक्रेता प्रभावित होंगे। इसके विरोध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर ई-पंजीकरण मॉड्यूल पर पुनर्विचार की मांग की गई।
उधर, पलियाकलां में भी अधिवक्ताओं ने विलेख पंजीकरण का कार्य निजी हाथों अथवा ठेके पर दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। अधिवक्ताओं का कहना था कि इससे सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ेगी तथा आम जनता नए कानूनी विवादों में उलझ सकती है। वकीलों ने तहसील पहुंचकर एसडीएम कार्यालय में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
अधिवक्ताओं ने कहा कि ई-पंजीकरण व्यवस्था लागू होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रभावित होंगे और पंजीकरण प्रक्रिया का केंद्रीकरण बढ़ेगा। उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है।

पलिया सब रजिस्ट्रार कार्यालय में ज्ञापन देते वकील, स्टांप विक्रेता और लेखक। स्रोत: बार