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Lakhimpur Kheri News: मियांपुर कॉलोनी बनी स्वच्छता और शिक्षा की मिसाल
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 08 Apr 2026 12:11 AM IST
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मियांपुर गांव में बना प्राथमिक विद्यालय। संवाद
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मोहम्मदी। गोमती नदी के किनारे बसी मियांपुर कॉलोनी आज स्वच्छता, अनुशासन और आधुनिक जीवनशैली के लिए अपनी अलग पहचान बना चुकी है। कभी विस्थापन की पीड़ा झेलने वाला यह गांव अब विकास की मिसाल बन गया है। हाल ही में दशकों बाद जमीन पर मालिकाना हक मिलने से गांव में खुशी का माहौल है।
वर्ष 1962-63 में पाकिस्तान से आए बंगाली समाज के लोगों को पहले ऊधम सिंह नगर (रुद्रपुर) के ट्रांजिट कैंप में रखा गया था। इसके बाद 1964 में इन्हें पीलीभीत, बरेली, लखीमपुर और शाहजहांपुर जिलों में बसाया गया। इसी क्रम में कुछ परिवार मोहम्मदी क्षेत्र के मियांपुर कॉलोनी में आकर बस गए। शुरुआती दौर में भाषा और जीवनशैली अलग होने के कारण ग्रामीणों से तालमेल बैठाने में कठिनाई हुई, लेकिन समय के साथ सब एक-दूसरे में घुलमिल गए।
घने जंगल और झाड़-झंखाड़ के बीच बसे इस क्षेत्र को इन लोगों ने अपनी मेहनत से एक व्यवस्थित गांव में बदल दिया। गांव के अमूल मास्टर ने यहां शिक्षा की नींव रखी और एक विद्यालय की स्थापना की, जो आज मान्यता प्राप्त है। वर्तमान में गांव शत-प्रतिशत साक्षरता की ओर बढ़ चुका है और यहां से डॉक्टर, अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ निकल रहे हैं। कई लोग विदेशों में चीनी मिलों की चिमनी निर्माण जैसे कार्यों में भी योगदान दे रहे हैं।
मियांपुर की खासियत इसकी स्वच्छता और अनुशासित व्यवस्था है। गांव में नालियां नहीं हैं, बल्कि हर घर में सोखता बनाया गया है, जिससे गंदा पानी बाहर नहीं बहता। नियमित साफ-सफाई, हर गली का अलग नंबर और हर घर में पूजा स्थल इसकी विशेष पहचान है।
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अमौसी एयरपोर्ट पर दिखी गांव की पहचान
गांव के संविलियन विद्यालय की सुंदरता और स्वच्छता की पहचान इतनी खास है कि इसका चित्र अमौसी हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रदर्शित किया गया है। स्वच्छता के लिए गांव के प्रधान को केंद्र सरकार से पुरस्कार भी मिल चुका है। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह भैयाजी सुरेशराव जोशी वर्ष 2018 में प्रवास कर चुके हैं। गांव में आरएसएस के दो प्राथमिक शिक्षा वर्ग भी आयोजित हो चुके हैं। विकसित भारत के लिए चयनित गांवों में मियांपुर कॉलोनी (रविंद्रनगर) का नाम भी शामिल है।
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मुख्यमंत्री को बहुत-बहुत धन्यवाद। हम सभी गांव वाले आभार जताते हैं। हमें जमीन का मालिकाना हक मिला है, इससे अपार खुशी है।
-विक्रम सिंह
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कैबिनेट के फैसले में भूमि का अधिकार मिलने से बहुत खुश हूं। ऐसा लग रहा है जैसे किसी राजा को उसका खोया हुआ राज्य मिल गया हो।
-तपन विश्वास
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वर्ष 1962-63 में पाकिस्तान से आए बंगाली समाज के लोगों को पहले ऊधम सिंह नगर (रुद्रपुर) के ट्रांजिट कैंप में रखा गया था। इसके बाद 1964 में इन्हें पीलीभीत, बरेली, लखीमपुर और शाहजहांपुर जिलों में बसाया गया। इसी क्रम में कुछ परिवार मोहम्मदी क्षेत्र के मियांपुर कॉलोनी में आकर बस गए। शुरुआती दौर में भाषा और जीवनशैली अलग होने के कारण ग्रामीणों से तालमेल बैठाने में कठिनाई हुई, लेकिन समय के साथ सब एक-दूसरे में घुलमिल गए।
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घने जंगल और झाड़-झंखाड़ के बीच बसे इस क्षेत्र को इन लोगों ने अपनी मेहनत से एक व्यवस्थित गांव में बदल दिया। गांव के अमूल मास्टर ने यहां शिक्षा की नींव रखी और एक विद्यालय की स्थापना की, जो आज मान्यता प्राप्त है। वर्तमान में गांव शत-प्रतिशत साक्षरता की ओर बढ़ चुका है और यहां से डॉक्टर, अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ निकल रहे हैं। कई लोग विदेशों में चीनी मिलों की चिमनी निर्माण जैसे कार्यों में भी योगदान दे रहे हैं।
मियांपुर की खासियत इसकी स्वच्छता और अनुशासित व्यवस्था है। गांव में नालियां नहीं हैं, बल्कि हर घर में सोखता बनाया गया है, जिससे गंदा पानी बाहर नहीं बहता। नियमित साफ-सफाई, हर गली का अलग नंबर और हर घर में पूजा स्थल इसकी विशेष पहचान है।
अमौसी एयरपोर्ट पर दिखी गांव की पहचान
गांव के संविलियन विद्यालय की सुंदरता और स्वच्छता की पहचान इतनी खास है कि इसका चित्र अमौसी हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ प्रदर्शित किया गया है। स्वच्छता के लिए गांव के प्रधान को केंद्र सरकार से पुरस्कार भी मिल चुका है। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह भैयाजी सुरेशराव जोशी वर्ष 2018 में प्रवास कर चुके हैं। गांव में आरएसएस के दो प्राथमिक शिक्षा वर्ग भी आयोजित हो चुके हैं। विकसित भारत के लिए चयनित गांवों में मियांपुर कॉलोनी (रविंद्रनगर) का नाम भी शामिल है।
मुख्यमंत्री को बहुत-बहुत धन्यवाद। हम सभी गांव वाले आभार जताते हैं। हमें जमीन का मालिकाना हक मिला है, इससे अपार खुशी है।
-विक्रम सिंह
कैबिनेट के फैसले में भूमि का अधिकार मिलने से बहुत खुश हूं। ऐसा लग रहा है जैसे किसी राजा को उसका खोया हुआ राज्य मिल गया हो।
-तपन विश्वास

मियांपुर गांव में बना प्राथमिक विद्यालय। संवाद

मियांपुर गांव में बना प्राथमिक विद्यालय। संवाद