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Lakhimpur Kheri News: पौराणिक लिलौटीनाथ मंदिर उपेक्षा का शिकार
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:46 PM IST
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लिलौटी नाथ का संगम घाट। संवाद
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महेवागंज। शहर से आठ किलोमीटर दूर पौराणिक लिलौटीनाथ मंदिर उपेक्षा का शिकार है। यहां न स्नानघर है और न ही विश्रामालय। घाट पर झाड़ियां भी उग गई हैं। आने-जाने के लिए सड़क भी ठीक नहीं है। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर घाट, विश्रामालय, यज्ञ स्थल, भंडारा कक्ष, सड़क, शौचालय और संगम स्थल को जीर्णोद्धार की जरूरत है लेकिन शासन-प्रशासन ध्यान दे रहा।
वर्षों से कंडवा व जुनई नदी की सिल्ट सफाई नहीं हुई। इससे नदियां अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही हैं। घाट के आसपास मगरमच्छों का डेरा है। पक्का घाट, पाथ-वे और लाइटिंग की कमी अखर रही है। हाईवे से मंदिर को जोड़ने वाली सड़क पतली है, जबकि सावन में सैकड़ों की तादाद में भंडारे होते हैं। महिला श्रद्धालुओं के लिए शौचालय, स्नान गृह भी नहीं है। सरकार ध्यान दे तो श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक, पर्यटन विकास भी होगा।
मंदिर के महंत रोहित गिरि ने बताया कि तत्कालीन डीएम गौरव दयाल के प्रयास से मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बजट स्वीकृत हो गया था। किन्हीं कारणों से काम शुरू नहीं हो पाया। महंत ने बताया कि सावन में करीब 10 से 15 लाख तक श्रद्धालु आते हैं। बड़ी संख्या में भंडार होते और दुकानें लगती हैं। इतनी भीड़ होती है मुख्य मार्ग से मंदिर तक डेढ़ किलो मीटर में चार से पांच घंटे लग जाते हैं।
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यह है मान्यता
-लिलौटीनाथ मंदिर की मान्यता है कि यहां आज भी आल्हा ऊदल और अश्वत्थामा पूजन करने आते हैं। हर दिन कपाट खुलने से पहले शिवलिंग पूजित मिलता है। शिवललाट में माता पार्वती की आकृति है, जो बड़ी विशेषता है। महंत व आसपास के बुजुर्गों का कहना है कि कभी यहां बबुरी और खैर का घना वन होता था। समय के साथ वन नष्ट होते गए। राजतंत्र के समय महेवा स्टेट के पूर्वजों ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।
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अरसे से लिलौटी नाथ शिव मंदिर के कायाकल्प के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यहां एक मुखी शिवलिंग स्थापित है, जो कहीं और नहीं मिलता। सरकार ध्यान दे तो यहां सौंदर्यीकरण से पर्यटन को गति मिलेगी।
-रोहित गिरी, महंत लिलौटीनाथ मंदिर
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लिलौटी नाथ में देश-प्रदेश से लोग दर्शन करने आते हैं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को यहां के विकास के लिए भी प्रयास करने चाहिए। पर्यटन बढ़ने से क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक तरक्की होगी।
-राहुल तिवारी
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पौराणिक तीर्थों में शामिल लिलौटीनाथ धाम दो नदियों और वृक्षों की हरियाली से घिरा है। नदियों की सिल्ट सफाई, संगम पर स्नान घाट और मंदिर के कायाकल्प से श्रद्धालुओं को सहूलियत के साथ पर्यटन को भी पंख लगेंगे।
-असीम विक्रम सिंह
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लिलौटीनाथ मंदिर अभी पर्यटन में नहीं है। फिर भी इसके लिए प्रयास करते हैं। पौराणिक लिलौटीनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर शासन को लिखा जाएगा।
-संजय भंडारी, पर्यटन सूचना अधिकारी
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वर्षों से कंडवा व जुनई नदी की सिल्ट सफाई नहीं हुई। इससे नदियां अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही हैं। घाट के आसपास मगरमच्छों का डेरा है। पक्का घाट, पाथ-वे और लाइटिंग की कमी अखर रही है। हाईवे से मंदिर को जोड़ने वाली सड़क पतली है, जबकि सावन में सैकड़ों की तादाद में भंडारे होते हैं। महिला श्रद्धालुओं के लिए शौचालय, स्नान गृह भी नहीं है। सरकार ध्यान दे तो श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक, पर्यटन विकास भी होगा।
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मंदिर के महंत रोहित गिरि ने बताया कि तत्कालीन डीएम गौरव दयाल के प्रयास से मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बजट स्वीकृत हो गया था। किन्हीं कारणों से काम शुरू नहीं हो पाया। महंत ने बताया कि सावन में करीब 10 से 15 लाख तक श्रद्धालु आते हैं। बड़ी संख्या में भंडार होते और दुकानें लगती हैं। इतनी भीड़ होती है मुख्य मार्ग से मंदिर तक डेढ़ किलो मीटर में चार से पांच घंटे लग जाते हैं।
यह है मान्यता
-लिलौटीनाथ मंदिर की मान्यता है कि यहां आज भी आल्हा ऊदल और अश्वत्थामा पूजन करने आते हैं। हर दिन कपाट खुलने से पहले शिवलिंग पूजित मिलता है। शिवललाट में माता पार्वती की आकृति है, जो बड़ी विशेषता है। महंत व आसपास के बुजुर्गों का कहना है कि कभी यहां बबुरी और खैर का घना वन होता था। समय के साथ वन नष्ट होते गए। राजतंत्र के समय महेवा स्टेट के पूर्वजों ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।
अरसे से लिलौटी नाथ शिव मंदिर के कायाकल्प के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यहां एक मुखी शिवलिंग स्थापित है, जो कहीं और नहीं मिलता। सरकार ध्यान दे तो यहां सौंदर्यीकरण से पर्यटन को गति मिलेगी।
-रोहित गिरी, महंत लिलौटीनाथ मंदिर
लिलौटी नाथ में देश-प्रदेश से लोग दर्शन करने आते हैं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को यहां के विकास के लिए भी प्रयास करने चाहिए। पर्यटन बढ़ने से क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक तरक्की होगी।
-राहुल तिवारी
पौराणिक तीर्थों में शामिल लिलौटीनाथ धाम दो नदियों और वृक्षों की हरियाली से घिरा है। नदियों की सिल्ट सफाई, संगम पर स्नान घाट और मंदिर के कायाकल्प से श्रद्धालुओं को सहूलियत के साथ पर्यटन को भी पंख लगेंगे।
-असीम विक्रम सिंह
लिलौटीनाथ मंदिर अभी पर्यटन में नहीं है। फिर भी इसके लिए प्रयास करते हैं। पौराणिक लिलौटीनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर शासन को लिखा जाएगा।
-संजय भंडारी, पर्यटन सूचना अधिकारी

लिलौटी नाथ का संगम घाट। संवाद

लिलौटी नाथ का संगम घाट। संवाद

लिलौटी नाथ का संगम घाट। संवाद