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Lakhimpur Kheri News: कोकिला का शव पहुंचते ही फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 16 Jun 2026 11:01 PM IST
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मृतक के बाहर लगी भीड़-संवाद
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मझगई। खालेपुरवा गांव में बाघ के हमले में जान गंवाने वाली कोकिला देवी का शव मंगलवार शाम पोस्टमाॅर्टम के बाद गांव पहुंचा तो परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया और वन विभाग के अधिकारियों का घेराव कर बाघिन के आतंक से मुक्ति तथा उचित मुआवजे की मांग पर अड़ गए। स्थिति संभालने के लिए पुलिस और वन विभाग के अधिकारी देर तक ग्रामीणों को समझाने में जुटे रहे।
सोमवार दोपहर खालेपुरवा निवासी 45 वर्षीय कोकिला देवी मवेशियों के लिए चारा लेने अपनी साथियों के साथ खैरा क्षेत्र गई थीं। भीषण गर्मी के कारण वह एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगीं। इसी दौरान झाड़ियों में छिपी बाघिन ने उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल कोकिला देवी को उपचार के लिए पलिया सीएचसी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
मृतका के सात बच्चों समेत परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि दो दिन पहले ही घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर मातादीन नामक ग्रामीण की भी बाघ के हमले में मौत हुई थी। लगातार दूसरी मौत के बाद लोगों का धैर्य जवाब दे गया है।
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वन क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह टीम के साथ मृतका के घर पहुंचे और परिजनों को 25 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी। उन्होंने बताया कि बाघिन की निगरानी के लिए सात कैमरे और उसे पकड़ने के लिए दो पिंजरे लगाए जा रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी और परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हुए थे।
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घटनास्थल पर बाघिन के पैरों के निशान मिले हैं। उसे पकड़ने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति मांगी गई है। सात कैमरे और दो पिंजरे लगाए गए हैं। मृतका के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-कीर्ति चौधरी, डीएफओ, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन
सोमवार दोपहर खालेपुरवा निवासी 45 वर्षीय कोकिला देवी मवेशियों के लिए चारा लेने अपनी साथियों के साथ खैरा क्षेत्र गई थीं। भीषण गर्मी के कारण वह एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगीं। इसी दौरान झाड़ियों में छिपी बाघिन ने उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल कोकिला देवी को उपचार के लिए पलिया सीएचसी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
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मृतका के सात बच्चों समेत परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि दो दिन पहले ही घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर मातादीन नामक ग्रामीण की भी बाघ के हमले में मौत हुई थी। लगातार दूसरी मौत के बाद लोगों का धैर्य जवाब दे गया है।
वन क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह टीम के साथ मृतका के घर पहुंचे और परिजनों को 25 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी। उन्होंने बताया कि बाघिन की निगरानी के लिए सात कैमरे और उसे पकड़ने के लिए दो पिंजरे लगाए जा रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी और परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हुए थे।
घटनास्थल पर बाघिन के पैरों के निशान मिले हैं। उसे पकड़ने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति मांगी गई है। सात कैमरे और दो पिंजरे लगाए गए हैं। मृतका के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-कीर्ति चौधरी, डीएफओ, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन

मृतक के बाहर लगी भीड़-संवाद