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Lakhimpur Kheri News: छह गैंडों की रिहाई पर मौसम का साया
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 21 Mar 2026 11:06 PM IST
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पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और अहम कदम उठाया जा रहा है। 22 मार्च से तीसरे चरण में छह गैंडों को खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ा जाएगा। हालांकि, बदले मौसम के चलते इस अभियान पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
गैंडा पुनर्वास योजना के तहत अब तक दो चरणों में चार गैंडों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा चुका है। तीसरे चरण में 22 से 28 मार्च के बीच छह गैंडों को आजाद करने का लक्ष्य तय किया गया है। शनिवार को विशेषज्ञों की मौजूदगी में अंतिम मॉकड्रिल भी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई।
इस अभियान में दुधवा के ग्रीन सोल्जर्स, प्रशिक्षित महावत और चाराकटर राजकीय हाथियों की टीम तैनात है। पार्क प्रशासन के अनुसार सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ली गई हैं और संसाधनों का प्रबंधन भी पूरा है।
अचानक बदले मौसम ने अभियान के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी हैं। बारिश और खराब मौसम से हाथियों व विशेषज्ञों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, जिससे तय समयसीमा पर असर पड़ने की आशंका है।
डिप्टी डायरेक्टर डॉ. जगदीश आर ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी हैं और मॉकड्रिल सफल रही है, लेकिन मौसम अनुकूल न रहा तो कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।
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-- -पारिस्थितिकी तंत्र को भी मिलेगी मजबूती-- -
भारत में गैंडे केवल तीन राज्यों में पाए जाते हैं, जिनमें दुधवा राष्ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता के लिए खास पहचान रखता है। 1984 से शुरू हुआ गैंडा पुनर्वास कार्यक्रम अब नई सफलता की ओर बढ़ रहा है। गैंडों की बढ़ती संख्या से पर्यटन के साथ-साथ पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी।
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गैंडा पुनर्वास योजना के तहत अब तक दो चरणों में चार गैंडों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा चुका है। तीसरे चरण में 22 से 28 मार्च के बीच छह गैंडों को आजाद करने का लक्ष्य तय किया गया है। शनिवार को विशेषज्ञों की मौजूदगी में अंतिम मॉकड्रिल भी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई।
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इस अभियान में दुधवा के ग्रीन सोल्जर्स, प्रशिक्षित महावत और चाराकटर राजकीय हाथियों की टीम तैनात है। पार्क प्रशासन के अनुसार सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ली गई हैं और संसाधनों का प्रबंधन भी पूरा है।
अचानक बदले मौसम ने अभियान के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी हैं। बारिश और खराब मौसम से हाथियों व विशेषज्ञों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, जिससे तय समयसीमा पर असर पड़ने की आशंका है।
डिप्टी डायरेक्टर डॉ. जगदीश आर ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी हैं और मॉकड्रिल सफल रही है, लेकिन मौसम अनुकूल न रहा तो कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।
भारत में गैंडे केवल तीन राज्यों में पाए जाते हैं, जिनमें दुधवा राष्ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता के लिए खास पहचान रखता है। 1984 से शुरू हुआ गैंडा पुनर्वास कार्यक्रम अब नई सफलता की ओर बढ़ रहा है। गैंडों की बढ़ती संख्या से पर्यटन के साथ-साथ पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलेगी।