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Lalitpur News: भारत को गोल्ड मेडल उत्सव का क्षण, मौका मिले तो हम भी कुछ करने को बेताब
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 13 गोल्ड मेडल जीत लिए हैं, जो मुख्य रूप से मुक्केबाजी (बॉक्सिंग) और पैरा एथलेटिक्स जैसे खेलों में आए हैं। इससे जनपद के खिलाड़ी भी काफी उत्साहित हैं और अपनी प्रतिभा को मुकाम तक पहुंचाने के लिए तत्पर हैं, लेकिन बहुत-से खिलाड़ी आवश्यक खेल-संसाधनों व आधारभूत सुविधाओं की कमी के चलते उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते हैं। जबकि जनपद से राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई है। जब कुछ खिलाड़ियों से बात की, तो उनका कहना है कि भारत को गोल्ड मेडल मिलना उत्सव का क्षण है। उन्हें संसाधन और मौका मिले तो वह भी कुछ करने को बेताब हैं।
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मोहल्ला घुसयाना में ग्वालटोली अखाड़े में छोटे बच्चों एवं उभरते पहलवानों के लिए कुश्ती प्रतियोगिताएं आयोजित कर उन्हें बढ़ने का अवसर प्रदान करता हूं। जनपद से कुश्ती में प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई युवकों ने अपनी जगह बनाई है और जनपद का नाम रोशन किया है। जनप्रतिनिधि एवं सरकार ऐसे पारंपरिक अखाड़ों पर ध्यान दें और इनके विकास के लिए आवश्यक सरकारी सहायता, खेल संसाधन व आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं, तो जनपद से कुश्ती खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिल सकेगा।
-संजू ग्वाला, अखाड़ा, ग्वाल टोली, घुसयाना।
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यह हमारे लिए गौरव की बात है कि हमारे देश के लिए इतने मेडल मिले हैं। इससे हमें भी प्रेरणा मिलती है कि अपने देश के लिए कुछ कर सकें और मेडल लाकर देश व जनपद का नाम रोशन कर सकें।
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-सतीश, एथलेटिक्स, 110 मीटरा बाधा दौड़, स्टेट में मेडल।
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ललितपुर। ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 13 गोल्ड मेडल जीत लिए हैं, जो मुख्य रूप से मुक्केबाजी (बॉक्सिंग) और पैरा एथलेटिक्स जैसे खेलों में आए हैं। इससे जनपद के खिलाड़ी भी काफी उत्साहित हैं और अपनी प्रतिभा को मुकाम तक पहुंचाने के लिए तत्पर हैं, लेकिन बहुत-से खिलाड़ी आवश्यक खेल-संसाधनों व आधारभूत सुविधाओं की कमी के चलते उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते हैं। जबकि जनपद से राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई है। जब कुछ खिलाड़ियों से बात की, तो उनका कहना है कि भारत को गोल्ड मेडल मिलना उत्सव का क्षण है। उन्हें संसाधन और मौका मिले तो वह भी कुछ करने को बेताब हैं।
मोहल्ला घुसयाना में ग्वालटोली अखाड़े में छोटे बच्चों एवं उभरते पहलवानों के लिए कुश्ती प्रतियोगिताएं आयोजित कर उन्हें बढ़ने का अवसर प्रदान करता हूं। जनपद से कुश्ती में प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई युवकों ने अपनी जगह बनाई है और जनपद का नाम रोशन किया है। जनप्रतिनिधि एवं सरकार ऐसे पारंपरिक अखाड़ों पर ध्यान दें और इनके विकास के लिए आवश्यक सरकारी सहायता, खेल संसाधन व आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं, तो जनपद से कुश्ती खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिल सकेगा।
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-संजू ग्वाला, अखाड़ा, ग्वाल टोली, घुसयाना।
यह हमारे लिए गौरव की बात है कि हमारे देश के लिए इतने मेडल मिले हैं। इससे हमें भी प्रेरणा मिलती है कि अपने देश के लिए कुछ कर सकें और मेडल लाकर देश व जनपद का नाम रोशन कर सकें।
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-सतीश, एथलेटिक्स, 110 मीटरा बाधा दौड़, स्टेट में मेडल।