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चिटफंड घोटाला : एलयूसीसी का पूर्व निदेशक-चेयरमैन गिरफ्तार
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर/तालबेहट। आम लोगों से हजारों करोड़ का निवेश कराकर फरार होने वाली चिटफंड कंपनी एलयूसीसी के पूर्व डायरेक्टर-चेयरमैन को तालबेहट पुलिस ने शनिवार की रात को गिरफ्तार कर लिया है। वह जनवरी माह में तालबेहट में दर्ज एलयूसीसी के मुकदमें में वांछित चल रहा था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया।
शनिवार की रात को तालबेहट पुलिस ने मुकदमे में वांछित चल रहे जितेंद्र सिंह निरंजन को तेरई फाटक तिराहा के पास से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वर्ष 2016 में समीर अग्रवाल ने एलयूसीसी नाम से एक चिटफंड नाम की कंपनी बनवाई और वर्ष 2016 में उसे कंपनी का डायरेक्टर बनाया। इसके बाद वर्ष 2017 में वह एलयूसीसी में चेयरमेन के पद पर नियुक्त हुआ था। फरवरी 2021 तक वह चेयरमेन के पद पर रहा। लेकिन पूरी कंपनी का संचालन समीर अग्रवाल व उसके मुंबई, इंदौर, लखनऊ व अन्य राज्यों, जिलों से जुड़े हुए लोग करते थे।
उसने आगे बताया कि लोगों को बताते थे कि सोसायटी में निवेश की गयी धनराशि को अलग-अलग जगहों पर निवेश कराया है, जहां पर बहुत मुनाफा होगा और आप का पैसा डबल हो जायेगा और इस बात का भी विश्वास देते थे कि आप लोगों द्वारा निवेश की गई धनराशि सुरक्षित की गई है।
पुलिस से पकड़े जाने के डर से वह लोग अपने आफिस बदलते रहते थे। बैंक एकाउंट को 6-7 महीने में बदलते रहते थे। लोगो से निवेश कराए गए धन के बदले में उन्हें फर्जी एफडी, आरडी के कागजात उपलब्ध कराते थे, जिससे कि उनको लगे कि उनका पैसा सही जगह लगा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया।
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जिस क्षेत्र में जमीन अधिग्रहित होती थी, वहां पर एलयूसीसी का कैंप करते थे स्थापित
पूछताछ में जितेंद्र सिंह ने बताया कि वह लोग जिस क्षेत्र में जमीनें अधिग्रहित की जा रही होती थी, वहां पर एलयूसीसी का कैंप स्थापित करते थे। यहां सीधे-साधे किसानों से उनका धन निवेश कराते थे। उन लोगों ने अब तक अलग-अलग स्कीमों में अलग-अलग राज्यों के साथ अलग जिलों जालौन, ललितपुर, टीकमगढ, सागर, अशोक नगर, झांसी, विदिशा में अपना नेटवर्क स्थापित किया था। यहां निवेशकर्ताओं को अधिक लाभ मिलने का विश्वास दिलाकर करोडों रुपये से अधिक का निवेश कराया।
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जेल से रिहा होने के बाद फिर हुआ गिरफ्तार
चिटफंड कंपनी एलयूसीसी का पूर्व निदेशक, चेयरमेन को न्यायालय के आदेश पर रिहा किया गया था। जेल से बाहर आने के बाद तालबेहट पुलिस ने उसे तालबेहट कोतवाली में दर्ज अन्य मामले में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस से काफी देर तक बहस हुई। जिस पर आसपास के थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। यहां पुलिस ने जब जितेंद्र व उसके साथ मौजूद लोगों को तालबेहट के मुकदमे में वांछित होने की बात कही तो फिर मामला शांत हुआ और जितेंद्र सिंह को पुलिस गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई थी।
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ललितपुर/तालबेहट। आम लोगों से हजारों करोड़ का निवेश कराकर फरार होने वाली चिटफंड कंपनी एलयूसीसी के पूर्व डायरेक्टर-चेयरमैन को तालबेहट पुलिस ने शनिवार की रात को गिरफ्तार कर लिया है। वह जनवरी माह में तालबेहट में दर्ज एलयूसीसी के मुकदमें में वांछित चल रहा था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया।
शनिवार की रात को तालबेहट पुलिस ने मुकदमे में वांछित चल रहे जितेंद्र सिंह निरंजन को तेरई फाटक तिराहा के पास से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वर्ष 2016 में समीर अग्रवाल ने एलयूसीसी नाम से एक चिटफंड नाम की कंपनी बनवाई और वर्ष 2016 में उसे कंपनी का डायरेक्टर बनाया। इसके बाद वर्ष 2017 में वह एलयूसीसी में चेयरमेन के पद पर नियुक्त हुआ था। फरवरी 2021 तक वह चेयरमेन के पद पर रहा। लेकिन पूरी कंपनी का संचालन समीर अग्रवाल व उसके मुंबई, इंदौर, लखनऊ व अन्य राज्यों, जिलों से जुड़े हुए लोग करते थे।
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उसने आगे बताया कि लोगों को बताते थे कि सोसायटी में निवेश की गयी धनराशि को अलग-अलग जगहों पर निवेश कराया है, जहां पर बहुत मुनाफा होगा और आप का पैसा डबल हो जायेगा और इस बात का भी विश्वास देते थे कि आप लोगों द्वारा निवेश की गई धनराशि सुरक्षित की गई है।
पुलिस से पकड़े जाने के डर से वह लोग अपने आफिस बदलते रहते थे। बैंक एकाउंट को 6-7 महीने में बदलते रहते थे। लोगो से निवेश कराए गए धन के बदले में उन्हें फर्जी एफडी, आरडी के कागजात उपलब्ध कराते थे, जिससे कि उनको लगे कि उनका पैसा सही जगह लगा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया।
जिस क्षेत्र में जमीन अधिग्रहित होती थी, वहां पर एलयूसीसी का कैंप करते थे स्थापित
पूछताछ में जितेंद्र सिंह ने बताया कि वह लोग जिस क्षेत्र में जमीनें अधिग्रहित की जा रही होती थी, वहां पर एलयूसीसी का कैंप स्थापित करते थे। यहां सीधे-साधे किसानों से उनका धन निवेश कराते थे। उन लोगों ने अब तक अलग-अलग स्कीमों में अलग-अलग राज्यों के साथ अलग जिलों जालौन, ललितपुर, टीकमगढ, सागर, अशोक नगर, झांसी, विदिशा में अपना नेटवर्क स्थापित किया था। यहां निवेशकर्ताओं को अधिक लाभ मिलने का विश्वास दिलाकर करोडों रुपये से अधिक का निवेश कराया।
जेल से रिहा होने के बाद फिर हुआ गिरफ्तार
चिटफंड कंपनी एलयूसीसी का पूर्व निदेशक, चेयरमेन को न्यायालय के आदेश पर रिहा किया गया था। जेल से बाहर आने के बाद तालबेहट पुलिस ने उसे तालबेहट कोतवाली में दर्ज अन्य मामले में गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस से काफी देर तक बहस हुई। जिस पर आसपास के थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। यहां पुलिस ने जब जितेंद्र व उसके साथ मौजूद लोगों को तालबेहट के मुकदमे में वांछित होने की बात कही तो फिर मामला शांत हुआ और जितेंद्र सिंह को पुलिस गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई थी।
