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Lalitpur News: पोषाहार नाकाफी, हर दूसरी गर्भवती में खून की कमी
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रोजाना पांच से छह यूनिट रक्त केवल गर्भवती महिलाओं को चढ़ाया जा रहा
आंगनबाड़ी केंद्रों में दिया जा रहा पोषाहार गर्भवतियों के लिए नाकाफी साबित
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में गर्भवती महिलाओं के बीच एनीमिया का संकट गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि हर दूसरी गर्भवती महिला खून की कमी से जूझ रही है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए चल रही पोषण योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, असंतुलित खानपान और पोषक तत्वों की कमी के चलते महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर लगातार गिर रहा है। इसका सीधा असर मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 10 से 15 प्रसव होते हैं, जिनमें से पांच से छह महिलाओं में एनीमिया पाया जा रहा है। वहीं, ब्लड बैंक में प्रतिदिन पांच से छह यूनिट रक्त गर्भवती महिलाओं को चढ़ाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान शरीर को अधिक पोषण की जरूरत होती है, लेकिन पर्याप्त और संतुलित आहार न मिलने से यह समस्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशु बजाज के अनुसार, समय पर जांच और सही खानपान से एनीमिया को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम युक्त आहार का नियमित सेवन बेहद जरूरी है।
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा गंभीर स्थिति
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और खानपान में लापरवाही के कारण समस्या अधिक गंभीर है। कई महिलाएं समय पर जांच नहीं करातीं और पोषण संबंधी सलाह का पालन नहीं करतीं। वहीं, जिले में 1124 आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाले पोषाहार का भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आंकड़े भी कर रहे सच उजागर
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की 2023 रिपोर्ट के अनुसार जिले की स्थिति
6 माह से 5 वर्ष तक के 66% बच्चे एनीमिया से ग्रस्त
15–19 वर्ष की 52% किशोरियां प्रभावित
45% गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार
21% पुरुषों में भी हीमोग्लोबिन की कमी
चिकित्सकों की सलाह
नियमित रूप से हीमोग्लोबिन की जांच कराएं
डॉक्टर की सलाह से आयरन व फोलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां लें
हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, फल, गुड़ व चुकंदर का सेवन करें
चाय-कॉफी का सेवन सीमित रखें
गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच (एएनसी) कराना न भूलें
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आंगनबाड़ी केंद्रों में दिया जा रहा पोषाहार गर्भवतियों के लिए नाकाफी साबित
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में गर्भवती महिलाओं के बीच एनीमिया का संकट गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि हर दूसरी गर्भवती महिला खून की कमी से जूझ रही है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए चल रही पोषण योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, असंतुलित खानपान और पोषक तत्वों की कमी के चलते महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर लगातार गिर रहा है। इसका सीधा असर मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 10 से 15 प्रसव होते हैं, जिनमें से पांच से छह महिलाओं में एनीमिया पाया जा रहा है। वहीं, ब्लड बैंक में प्रतिदिन पांच से छह यूनिट रक्त गर्भवती महिलाओं को चढ़ाया जा रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान शरीर को अधिक पोषण की जरूरत होती है, लेकिन पर्याप्त और संतुलित आहार न मिलने से यह समस्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशु बजाज के अनुसार, समय पर जांच और सही खानपान से एनीमिया को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम युक्त आहार का नियमित सेवन बेहद जरूरी है।
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा गंभीर स्थिति
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और खानपान में लापरवाही के कारण समस्या अधिक गंभीर है। कई महिलाएं समय पर जांच नहीं करातीं और पोषण संबंधी सलाह का पालन नहीं करतीं। वहीं, जिले में 1124 आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाले पोषाहार का भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आंकड़े भी कर रहे सच उजागर
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की 2023 रिपोर्ट के अनुसार जिले की स्थिति
6 माह से 5 वर्ष तक के 66% बच्चे एनीमिया से ग्रस्त
15–19 वर्ष की 52% किशोरियां प्रभावित
45% गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार
21% पुरुषों में भी हीमोग्लोबिन की कमी
चिकित्सकों की सलाह
नियमित रूप से हीमोग्लोबिन की जांच कराएं
डॉक्टर की सलाह से आयरन व फोलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां लें
हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, फल, गुड़ व चुकंदर का सेवन करें
चाय-कॉफी का सेवन सीमित रखें
गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच (एएनसी) कराना न भूलें