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Lalitpur News: मां ने परचून की दुकान चलाकर बेटी को बनाया असिस्टेंट कमिश्नर
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संवाद न्यूज एजेंसी
मड़ावरा (ललितपुर)। संघर्ष और हौसले की मिसाल पेश करते हुए कस्बा मड़ावरा की हिमांशी जैन ने यूपीपीसीएस-2024 में 154वीं रैंक हासिल की है। उनका असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर चयन हुआ है। इस सफलता के पीछे उनकी मां ममता जैन का त्याग और मेहनत सबसे बड़ी ताकत रही, जिन्होंने परचून की दुकान चलाकर बेटी को पढ़ाया और उसके सपनों को साकार किया।
हिमांशी के पिता सुनील जैन का वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। सीमित संसाधनों के बावजूद ममता जैन ने हार नहीं मानी और घर संभालने के साथ परचून की दुकान चलाकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखी।
मां के संघर्ष ने हिमांशी को हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। ममता जैन ने बताया कि उन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का हर संभव प्रयास किया। हिमांशी बचपन से ही पढ़ाई में तेज और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही। उसने आईएएस/पीसीएस अधिकारी बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करती रही। घर पर पढ़ाई के साथ ही उसने करीब चार साल दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।
साक्षात्कार में अधिकतर प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में ही दिए
अपने दूसरे प्रयास में हिमांशी ने यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने संस्कृत विषय से परीक्षा दी और साक्षात्कार के दौरान अधिकतर प्रश्नों के उत्तर भी संस्कृत में ही दिए।
हिमांशी की इस सफलता से परिवार और पूरे कस्बे में खुशी का माहौल है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। हिमांशी प्रयागराज से घर के लिए रवाना हो चुकी है।
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मड़ावरा (ललितपुर)। संघर्ष और हौसले की मिसाल पेश करते हुए कस्बा मड़ावरा की हिमांशी जैन ने यूपीपीसीएस-2024 में 154वीं रैंक हासिल की है। उनका असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर चयन हुआ है। इस सफलता के पीछे उनकी मां ममता जैन का त्याग और मेहनत सबसे बड़ी ताकत रही, जिन्होंने परचून की दुकान चलाकर बेटी को पढ़ाया और उसके सपनों को साकार किया।
हिमांशी के पिता सुनील जैन का वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। सीमित संसाधनों के बावजूद ममता जैन ने हार नहीं मानी और घर संभालने के साथ परचून की दुकान चलाकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखी।
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मां के संघर्ष ने हिमांशी को हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। ममता जैन ने बताया कि उन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का हर संभव प्रयास किया। हिमांशी बचपन से ही पढ़ाई में तेज और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही। उसने आईएएस/पीसीएस अधिकारी बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करती रही। घर पर पढ़ाई के साथ ही उसने करीब चार साल दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।
साक्षात्कार में अधिकतर प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में ही दिए
अपने दूसरे प्रयास में हिमांशी ने यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने संस्कृत विषय से परीक्षा दी और साक्षात्कार के दौरान अधिकतर प्रश्नों के उत्तर भी संस्कृत में ही दिए।
हिमांशी की इस सफलता से परिवार और पूरे कस्बे में खुशी का माहौल है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। हिमांशी प्रयागराज से घर के लिए रवाना हो चुकी है।