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Lalitpur News: मगरमच्छों से घिरे मगरदाह में सुरक्षा नदारद
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- मगरदाह में न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही बैरिकेडिंग की गई
अजय उपाध्याय
तालबेहट। माताटीला बांध के पास स्थित मगरदाह में मगरमच्छों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। नदी किनारे खुलेआम धूप सेंकते और घूमते मगरमच्छों के बीच सैलानी बिना किसी रोक-टोक के पहुंच रहे हैं, जिससे यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बेतवा नदी पर बने माताटीला बांध पर पूरे वर्ष पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। खासतौर पर बारिश के मौसम में यहां बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। स्कूल-कॉलेजों के छात्र भी भ्रमण के दौरान जल विद्युत गृह, मंदिर, उद्यान, मगरदाह और सीताकुंड जैसे स्थानों का भ्रमण करते हैं। इसके बावजूद मगरदाह में न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई है। जबकि मगरदाह में लगभग 100 से ज्यादा मगरमच्छ बताए जाते हैं। ऐसे में यहां आने वाले सैलानियों के लिए खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए यहां सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मगरमच्छ आश्रय स्थल बनाने की भी मांग की।
लाखों खर्च के बाद भी सुरक्षा योजना अधूरी
विभाग द्वारा उद्यान और अन्य स्थलों के रखरखाव के लिए लाखों रुपये की योजनाएं बनाई जाती हैं और बजट भी खर्च किया जाता है, लेकिन मगरदाह की सुरक्षा को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
क्या कहते हैं लोग
(फोटो-05)
कैप्शन: पंकज कुशवाहा
बरसात के मौसम में बाहर से बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। सुरक्षा के अभाव में मगरमच्छ आसपास के किसानों के कई पशुओं को अपना शिकार बना चुके हैं। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- पंकज कुशवाहा
(फोटो-06)
कैप्शन: राजेंद्र शर्मा
सर्दियों में मगरमच्छ पानी से बाहर निकलकर किनारे धूप सेंकते हैं, जिन्हें देखने लोग आते हैं। लेकिन वहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है, जिससे कभी भी जनहानि हो सकती है।- राजेंद्र शर्मा
मगरदाह कोई अधिकृत पर्यटन स्थल नहीं है, बावजूद इसके सैलानी पहुंच जाते हैं। अब इसके लिए कार्य योजना बनाई जाएगी।
- पंकज सिंह, अधिशासी अभियंता, माताटीला बांध प्रखंड, झांसी
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अजय उपाध्याय
तालबेहट। माताटीला बांध के पास स्थित मगरदाह में मगरमच्छों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। नदी किनारे खुलेआम धूप सेंकते और घूमते मगरमच्छों के बीच सैलानी बिना किसी रोक-टोक के पहुंच रहे हैं, जिससे यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बेतवा नदी पर बने माताटीला बांध पर पूरे वर्ष पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। खासतौर पर बारिश के मौसम में यहां बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। स्कूल-कॉलेजों के छात्र भी भ्रमण के दौरान जल विद्युत गृह, मंदिर, उद्यान, मगरदाह और सीताकुंड जैसे स्थानों का भ्रमण करते हैं। इसके बावजूद मगरदाह में न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई है। जबकि मगरदाह में लगभग 100 से ज्यादा मगरमच्छ बताए जाते हैं। ऐसे में यहां आने वाले सैलानियों के लिए खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए यहां सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मगरमच्छ आश्रय स्थल बनाने की भी मांग की।
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लाखों खर्च के बाद भी सुरक्षा योजना अधूरी
विभाग द्वारा उद्यान और अन्य स्थलों के रखरखाव के लिए लाखों रुपये की योजनाएं बनाई जाती हैं और बजट भी खर्च किया जाता है, लेकिन मगरदाह की सुरक्षा को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
क्या कहते हैं लोग
(फोटो-05)
कैप्शन: पंकज कुशवाहा
बरसात के मौसम में बाहर से बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। सुरक्षा के अभाव में मगरमच्छ आसपास के किसानों के कई पशुओं को अपना शिकार बना चुके हैं। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- पंकज कुशवाहा
(फोटो-06)
कैप्शन: राजेंद्र शर्मा
सर्दियों में मगरमच्छ पानी से बाहर निकलकर किनारे धूप सेंकते हैं, जिन्हें देखने लोग आते हैं। लेकिन वहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है, जिससे कभी भी जनहानि हो सकती है।- राजेंद्र शर्मा
मगरदाह कोई अधिकृत पर्यटन स्थल नहीं है, बावजूद इसके सैलानी पहुंच जाते हैं। अब इसके लिए कार्य योजना बनाई जाएगी।
- पंकज सिंह, अधिशासी अभियंता, माताटीला बांध प्रखंड, झांसी