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Lalitpur News: गोविंद सागर बांध पर रिसाव रोकने के लिए बंध के डाउन स्ट्रीम में डाली गई मिट्टी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। गोविंद सागर बांध पर अनुरक्षण के तहत मरम्मत कार्य करके इसे मजबूती और सुरक्षित किया गया। 73 वर्ष से अधिक पुराना बांध होने पर इसकी मिट्टी का क्षरण हो गया था। इससे बांध के स्ट्रक्चर को खतरा पैदा हो रहा था। इसको देखते हुए सिंचाई विभाग ने डाउन स्ट्रीम में जगह-जगह मट्टी डलवाई। स्पिल वे सहित गेटों की डेंटिंग-पेंटिंग का कार्य शुरू हो गया।
शहजाद नदी पर वर्ष 1952 में गोविंद सागर बांध परियोजना निर्मित हुई थी। बांध से शहर और रेलवे के लिए पेयजल की आपूर्ति की जाती है। वहीं सिंचाई के लिए दो नहरों का संचालन होता है। इसमें 52 किलोमीटर लंबी दायीं नहर से करीब 121 किलोमीटर लंबाई के 31 माइनर और रजवाहे निकले हैं। इससे करीब 10 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है। बांध निर्माण के बाद से इसके बंध की मिट्टी का क्षरण हो रहा था और इसके स्ट्रक्चर को खतरा पैदा हो रहा था। इसके साथ कुछ स्थानों पर मानसून सीजन में बांध के लबालब होने पर पिछले वर्ष इंटेकबेल के समीप डाउन स्ट्रीम में पानी भी रिसना शुरू हुआ था।
इसे लेकर सिंचाई विभाग ने गोविंद सागर बांध के मिट्टी के बंध पर ऐसे स्थान को चिहिंत किया, जहां पर मिट्टी का क्षरण हुआ था और यहां से पूर्व में पानी रिसा था। इसके बाद इन चिहिंत किए गए स्थानों पर मिट्टी डालकर यहां पर मजबूती दी गई। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बंध के डाउन स्ट्रीम में मिट्टी डाले जाने से अब यहां पर होने वाला रिसाव बंद होगा। साथ में बांध को मजबूती भी मिलेगी।
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फैक्ट फाइल
कुल भंडारण क्षमता : 96.84 एमसीएम
नहर प्रणाली की लंबाई : 190 किलोमीटर
कैचमेट एरिया : 367.78 वर्ग किलोमीटर
सिंचित भूमि क्षमता : 10820 हेक्टेयर
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बांध के पानी का पेयजल उपयोग
- 31 एमएलडी नगर की पेयजल आपूर्ति को।
- 12 एमएलडी नेहरू नगर पाइप पेयजल परियोजना को।
- 0.2 एमएलडी रेलवे विभाग को।
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बांध की सुरक्षा और मजबूत करने के लिए डाउन स्ट्रीम में मिट्टी को डलवाया गया है। इससे रिसाव की समस्या से निजात मिलेगी। इसके साथ बांध के साइफन व गेटों के स्पिल वे की पुताई और गेटों की डेटिंग-पेटिंग का कार्य कराया गया।
शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड
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ललितपुर। गोविंद सागर बांध पर अनुरक्षण के तहत मरम्मत कार्य करके इसे मजबूती और सुरक्षित किया गया। 73 वर्ष से अधिक पुराना बांध होने पर इसकी मिट्टी का क्षरण हो गया था। इससे बांध के स्ट्रक्चर को खतरा पैदा हो रहा था। इसको देखते हुए सिंचाई विभाग ने डाउन स्ट्रीम में जगह-जगह मट्टी डलवाई। स्पिल वे सहित गेटों की डेंटिंग-पेंटिंग का कार्य शुरू हो गया।
शहजाद नदी पर वर्ष 1952 में गोविंद सागर बांध परियोजना निर्मित हुई थी। बांध से शहर और रेलवे के लिए पेयजल की आपूर्ति की जाती है। वहीं सिंचाई के लिए दो नहरों का संचालन होता है। इसमें 52 किलोमीटर लंबी दायीं नहर से करीब 121 किलोमीटर लंबाई के 31 माइनर और रजवाहे निकले हैं। इससे करीब 10 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है। बांध निर्माण के बाद से इसके बंध की मिट्टी का क्षरण हो रहा था और इसके स्ट्रक्चर को खतरा पैदा हो रहा था। इसके साथ कुछ स्थानों पर मानसून सीजन में बांध के लबालब होने पर पिछले वर्ष इंटेकबेल के समीप डाउन स्ट्रीम में पानी भी रिसना शुरू हुआ था।
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इसे लेकर सिंचाई विभाग ने गोविंद सागर बांध के मिट्टी के बंध पर ऐसे स्थान को चिहिंत किया, जहां पर मिट्टी का क्षरण हुआ था और यहां से पूर्व में पानी रिसा था। इसके बाद इन चिहिंत किए गए स्थानों पर मिट्टी डालकर यहां पर मजबूती दी गई। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बंध के डाउन स्ट्रीम में मिट्टी डाले जाने से अब यहां पर होने वाला रिसाव बंद होगा। साथ में बांध को मजबूती भी मिलेगी।
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फैक्ट फाइल
कुल भंडारण क्षमता : 96.84 एमसीएम
नहर प्रणाली की लंबाई : 190 किलोमीटर
कैचमेट एरिया : 367.78 वर्ग किलोमीटर
सिंचित भूमि क्षमता : 10820 हेक्टेयर
बांध के पानी का पेयजल उपयोग
- 31 एमएलडी नगर की पेयजल आपूर्ति को।
- 12 एमएलडी नेहरू नगर पाइप पेयजल परियोजना को।
- 0.2 एमएलडी रेलवे विभाग को।
बांध की सुरक्षा और मजबूत करने के लिए डाउन स्ट्रीम में मिट्टी को डलवाया गया है। इससे रिसाव की समस्या से निजात मिलेगी। इसके साथ बांध के साइफन व गेटों के स्पिल वे की पुताई और गेटों की डेटिंग-पेटिंग का कार्य कराया गया।
शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड