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Lalitpur News: पोर्टल पर दर्ज होंगे गांवों के मंदिर और पर्यटन स्थल
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मेरा गांव मेरी धरोहर योजना से पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
पंचायती राज विभाग ने सचिवों को दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। प्रत्येक गांव की पहचान बनाने के लिए मेरा गांव मेरी धरोहर योजना प्रारंभ की गई है। इसके तहत पोर्टल पर हर गांव के प्रसिद्ध मंदिर, मेले व अन्य ऐतिहासिक स्थलों को दर्ज कराना है। इससे गांवों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे केंद्र सरकार का उद्देश्य पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा देना है।
जिले के कई गांवों को इस योजना में शामिल करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन के अनुसार, योजना के अंतर्गत गांवों के प्राचीन मंदिर, तालाब, लोककला, पारंपरिक खेती पद्धति और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इसके लिए राजस्व, पर्यटन और पंचायतीराज विभाग की संयुक्त टीम सर्वे करेगी।
पंचायती राज विभाग ने इस योजना के तहत सभी सचिवों को पोर्टल पर गांव के ऐतिहासिक स्थल दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। योजना के क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में होम-स्टे, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा। युवाओं को गांव में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
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जनपद में इन जगहाें पर हैं ऐतिहासिक एवं प्राचीन स्थल
जनपद के अनेक स्थान जैसे देवगढ़, अमझरा घाटी, बार, बछरावनी, बालाबेहट, बंदरगुढ़ा, बानपुर, बंट, चंडीमाता मंदिर नाराहट, चांदपुर-जहाजपुर, दशरारा, दूधई, गिरार, टेटा-जमालपुर, झूमरनाथ, करकरावल, लखंजर, मदनपुर, माताटीला, नीलकंठेश्वर पाली, पांडववन, पवागिरी, राजघाट, रणछोरधाम, सदनशाह दरगााह, सिरोंनकलां, सिरसी, सौंरई, मड़ावरा, बिजरौठा, डोंगराकलां, राखपंचमपुर, तालबेहट, बुदनी, उल्दनाकलां हैं, जहां पुरातात्विक धरोहरों के साथ ही संस्कृति और प्राकृतिक सुरम्य वातावरण की अनुभूति होती है। मेरा गांव मेरी धरोहर पोर्टल (https://mgmd.gov.in) पर दर्ज होने के बाद लोगों को इन जगहों के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।
वर्जन
गांवों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर उसे पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। योजना के माध्यम से जिले के गांवों को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे जनपद के ग्रामीण अंचल पर्यटन मानचित्र पर उभर सकते हैं। - कुंवर सिंह यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी
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पंचायती राज विभाग ने सचिवों को दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। प्रत्येक गांव की पहचान बनाने के लिए मेरा गांव मेरी धरोहर योजना प्रारंभ की गई है। इसके तहत पोर्टल पर हर गांव के प्रसिद्ध मंदिर, मेले व अन्य ऐतिहासिक स्थलों को दर्ज कराना है। इससे गांवों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे केंद्र सरकार का उद्देश्य पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा देना है।
जिले के कई गांवों को इस योजना में शामिल करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन के अनुसार, योजना के अंतर्गत गांवों के प्राचीन मंदिर, तालाब, लोककला, पारंपरिक खेती पद्धति और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इसके लिए राजस्व, पर्यटन और पंचायतीराज विभाग की संयुक्त टीम सर्वे करेगी।
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पंचायती राज विभाग ने इस योजना के तहत सभी सचिवों को पोर्टल पर गांव के ऐतिहासिक स्थल दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। योजना के क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में होम-स्टे, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा। युवाओं को गांव में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
जनपद में इन जगहाें पर हैं ऐतिहासिक एवं प्राचीन स्थल
जनपद के अनेक स्थान जैसे देवगढ़, अमझरा घाटी, बार, बछरावनी, बालाबेहट, बंदरगुढ़ा, बानपुर, बंट, चंडीमाता मंदिर नाराहट, चांदपुर-जहाजपुर, दशरारा, दूधई, गिरार, टेटा-जमालपुर, झूमरनाथ, करकरावल, लखंजर, मदनपुर, माताटीला, नीलकंठेश्वर पाली, पांडववन, पवागिरी, राजघाट, रणछोरधाम, सदनशाह दरगााह, सिरोंनकलां, सिरसी, सौंरई, मड़ावरा, बिजरौठा, डोंगराकलां, राखपंचमपुर, तालबेहट, बुदनी, उल्दनाकलां हैं, जहां पुरातात्विक धरोहरों के साथ ही संस्कृति और प्राकृतिक सुरम्य वातावरण की अनुभूति होती है। मेरा गांव मेरी धरोहर पोर्टल (https://mgmd.gov.in) पर दर्ज होने के बाद लोगों को इन जगहों के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।
वर्जन
गांवों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर उसे पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। योजना के माध्यम से जिले के गांवों को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे जनपद के ग्रामीण अंचल पर्यटन मानचित्र पर उभर सकते हैं। - कुंवर सिंह यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी