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Lalitpur News: धौर्रा-जाखलौन रेलवे स्टेशन के मध्य तीसरी लाइन का काम पूरा
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ओएचई लाइन भी बनकर तैयार, 30 मार्च तक होगा निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। धौर्रा-जाखलौन रेलवे स्टेशन के मध्य तीसरी रेल लाइन का काम पूरा हो गया है। इस ट्रैक पर ओएचई लाइन भी बनकर तैयार हो गई है। अब 30 मार्च तक संरक्षा निरीक्षण होने के बाद आगासोद से झांसी तक तीसरी रेल लाइन पर ट्रेनों का संचालन हो सकेगा।
चांदपुर-जहाजपुर संरक्षित पुरातात्विक स्थल होने के कारण ललितपुर सेक्शन में तीसरी रेल लाइन बिछाने के दौरान जाखलौन-धौर्रा के मध्य इसके लिए अनुमति नहीं मिल पाई थी। इसके चलते, रेलवे ने इस क्षेत्र से पहले और बाद में लगभग पांच किलोमीटर लंबी घुमावदार रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया था। इस योजना के तहत पहाड़ी काटकर लगभग आधा किलोमीटर लंबी सुरंग (टनल) का निर्माण भी प्रस्तावित था, जिस पर करीब 150 करोड़ रुपये का खर्च आना था।
यदि सीधी रेल लाइन बिछाई जाती तो कुल पांच किलोमीटर में से ढाई किलोमीटर का कार्य पहले ही पूरा हो चुका था और शेष ढाई किलोमीटर में केवल गिट्टी व रेल पटरियां बिछानी थीं। घुमावदार लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाने वाली थी, तभी विगत वर्ष अगस्त में रेलवे अधिकारियों का संपर्क दिल्ली पुरातत्व विभाग की टीम से हो गया और दिल्ली पुरातत्व विभाग की टीम ने चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र का निरीक्षण किया।
यहां रेलवे अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि ट्रेनों से होने वाली कंपन से प्राचीन मूर्तियों को कोई नुकसान नहीं होगा। इस पर विभाग ने सीधी रेल लाइन बिछाने की सशर्त अनुमति दे दी थी। वर्तमान में यहां लगभग 16 पुलों का निर्माण और यह तीसरी रेल लाइन बिछाने का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही यहां रेलवे द्वारा पुरातात्विक मूर्तियों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए जर्मनी से साउंड ऑब्जर्विंग मटेरियल मंगाया गया और तीसरी रेल लाइन के नीचे स्थापित किया जाएगा। इससे ट्रेनों से उत्पन्न कंपन को यह रबर आधारित मैटेरियल अवशोषित कर लेगा और कंपन मूर्तियों तक नहीं पहुंचेगा। मुख्य संरक्षा आयुक्त लखनऊ द्वारा निरीक्षण होने की संभावना है।
वर्जन
जाखलौन-धौर्रा के मध्य तीसरी रेल लाइन का काम पूरा हो गया है। हरी झंडी मिलने के बाद इस लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। - मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, रेलवे झांसी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। धौर्रा-जाखलौन रेलवे स्टेशन के मध्य तीसरी रेल लाइन का काम पूरा हो गया है। इस ट्रैक पर ओएचई लाइन भी बनकर तैयार हो गई है। अब 30 मार्च तक संरक्षा निरीक्षण होने के बाद आगासोद से झांसी तक तीसरी रेल लाइन पर ट्रेनों का संचालन हो सकेगा।
चांदपुर-जहाजपुर संरक्षित पुरातात्विक स्थल होने के कारण ललितपुर सेक्शन में तीसरी रेल लाइन बिछाने के दौरान जाखलौन-धौर्रा के मध्य इसके लिए अनुमति नहीं मिल पाई थी। इसके चलते, रेलवे ने इस क्षेत्र से पहले और बाद में लगभग पांच किलोमीटर लंबी घुमावदार रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया था। इस योजना के तहत पहाड़ी काटकर लगभग आधा किलोमीटर लंबी सुरंग (टनल) का निर्माण भी प्रस्तावित था, जिस पर करीब 150 करोड़ रुपये का खर्च आना था।
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यदि सीधी रेल लाइन बिछाई जाती तो कुल पांच किलोमीटर में से ढाई किलोमीटर का कार्य पहले ही पूरा हो चुका था और शेष ढाई किलोमीटर में केवल गिट्टी व रेल पटरियां बिछानी थीं। घुमावदार लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाने वाली थी, तभी विगत वर्ष अगस्त में रेलवे अधिकारियों का संपर्क दिल्ली पुरातत्व विभाग की टीम से हो गया और दिल्ली पुरातत्व विभाग की टीम ने चांदपुर–जहाजपुर क्षेत्र का निरीक्षण किया।
यहां रेलवे अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि ट्रेनों से होने वाली कंपन से प्राचीन मूर्तियों को कोई नुकसान नहीं होगा। इस पर विभाग ने सीधी रेल लाइन बिछाने की सशर्त अनुमति दे दी थी। वर्तमान में यहां लगभग 16 पुलों का निर्माण और यह तीसरी रेल लाइन बिछाने का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही यहां रेलवे द्वारा पुरातात्विक मूर्तियों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए जर्मनी से साउंड ऑब्जर्विंग मटेरियल मंगाया गया और तीसरी रेल लाइन के नीचे स्थापित किया जाएगा। इससे ट्रेनों से उत्पन्न कंपन को यह रबर आधारित मैटेरियल अवशोषित कर लेगा और कंपन मूर्तियों तक नहीं पहुंचेगा। मुख्य संरक्षा आयुक्त लखनऊ द्वारा निरीक्षण होने की संभावना है।
वर्जन
जाखलौन-धौर्रा के मध्य तीसरी रेल लाइन का काम पूरा हो गया है। हरी झंडी मिलने के बाद इस लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। - मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, रेलवे झांसी