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नौकरी नहीं साइबर ट्रैप था: म्यांमार में फंसे कुशीनगर के 3 बेटे, मां बोली- कहीं अगली बार आवाज सुन पाऊंगी या नही

संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Published by: Rohit Singh Updated Tue, 19 May 2026 05:29 PM IST
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सार

पीड़ित उस्मान ने व्हाट्सएप कॉल पर बताया कि वहां चाइनीज नेटवर्क के लोग फर्जी लड़कियों की आईडी से सोशल मीडिया पर ठगी और क्रिप्टो में निवेश कराने का दबाव बना रहे हैं। मना करने पर पासपोर्ट छीन लिया, खाना बंद कर दिया। हथियार दिखाकर डराते हैं। उस्मान शुगर का मरीज है, दवा न मिलने से पैर सूज गए हैं। एक बार रात 2 बजे जंगल में छोड़ दिया गया।

3 Indian Youths Trapped In Myanmar Cyber Fraud Ring, Passports Seized After Fake Job Offer
विदेश में फंसे कुशीनगर के तीन युवक - फोटो : स्त्रोत- परिजन
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विस्तार

 रोजगार और बेहतर कमाई का सपना लेकर म्यांमार गए कुशीनगर और बिहार के तीन युवक अब साइबर फ्रॉड नेटवर्क के चंगुल में फंसे युवकों का आरोप है कि उन्हें कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी दिलाने के नाम पर म्यांमार बुलाया गया। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और ऑनलाइन ठगी से जुड़े काम के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

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पीड़ित युवकों से बातचीत के बाद मामले में कई तरह के खुलासे होने के साथ बिजनेस वीजा, इनविटेशन लेटर और इंटरनेशनल फ्लाइट दस्तावेज भी सामने आए हैं। घर पर वीडियो काल कर अपनी मां और छोटे भाई से घर वापसी कराने के लिए मोहम्मद उसमान बार-बार गुहार लगा रहा है।

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पडरौना नगर क्षेत्र के महाराणा प्रताप नगर, जंगल बेलवा निवासी मोहम्मद उस्मान अंसारी, पडरौना क्षेत्र के ही मोहम्मद हसन रजा तथा बिहार के मोतिहारी जनपद निवासी अनुरंजन कुमार म्यांमार गए थे।परिवारों के अनुसार तीनों युवकों को कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था।

परिवार से मिले संपर्क सूत्र के आधार पर व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से जब युवकों से बातचीत का प्रयास किया गया तो वह फफक कर रो पड़े। कहा कि उन्हें प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। बीमार होने पर दवाई नहीं मिल रहा है। पैसे नहीं हैं और वीजा छिन चुका है। हम वतन वापस आना चाहते हैं।

पीड़ितों से प्राप्त जानकारी और दस्तावेजों के मुताबिक मोहम्मद हसन रजा को ''स्वम इन थिट कंपनी लिमिटेड'' की ओर से 13 अप्रैल 2026 को बिजनेस वीजा जारी किया गया और यांगून इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एंट्री प्वाइंट दर्शाया गया है। वहीं, मोहम्मद उस्मान अंसारी के नाम पर ''वुक्सिंगसन कंपनी लिमिटेड'' की आरेस बिजनेस वीजा जारी किया गया था।

अनुरंजन कुमार और मोहम्मद उस्मान अंसारी के लिए जारी आमंत्रण में उन्हें कंस्ट्रक्शन इंजीनियर और कंस्ट्रक्शन आर्किटेक्ट के पद का ऑफर था। कंपनियों के पते म्यांमार के यांगून क्षेत्र में दर्शाए गए हैं। फ्लाइट रिकॉर्ड और बातचीत के अनुसार तीनों युवक पहले लखनऊ से कोलकाता इंडिगो फ्लाइट से पहुंचे और वहां से बैंकॉक होते हुए 3 मई 2026 को म्यांमार पहुंचे।
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दस्तावेजों में इंडिगो और थाई एयर एशिया की फ्लाइट डिटेल दर्ज है। पीड़ितों के अनुसार विरोध करने पर उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और वापस भारत भेजने के बजाय लगातार वहीं रुककर काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। युवकों ने यह भी आरोप लगाया कि वहां मोबाइल नेटवर्क तक ठीक से काम नहीं करता और बाहरी दुनिया से संपर्क बेहद मुश्किल है।

खाने-पीने और रहने की भी समुचित व्यवस्था नहीं है तथा लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। परिजनों की ओर से विदेश मंत्रालय को दिए गए शपथ पत्रों में भी युवकों को म्यांमार में फंसाए जाने और प्रताड़ित किए जाने का उल्लेख किया गया है। परिवार वालों ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन से तीनों युवकों की सुरक्षित वतन वापसी की मांग की है।

नौकरी का ऑफर नहीं, साइबर ट्रैप था...भूख, बीमारी और बंदूक के साए में कट रही जिंदगी
कुशीनगर/गुरवलिया बाजार। रोजगार और बेहतर कमाई का सपना लेकर म्यांमार गए तीन युवक खौफ के साए में हैं। बताया जा रहा है कि ठगों ने नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी अपनाई कि पीड़ितों को सब कुछ असली लगने लगा। वीडियो कॉल पर इंटरव्यू हुआ। साइबर ट्रैप में फंसे युवकों को टिकट भेजे गए।

उनका बिजनेस वीजा बनवाया गया और म्यांमार पहुंचने पर होटल में ठहराया गया। पर, क्या पता था कि एयरपोर्ट की चमक से शुरू होने वाला सफर उन्हें पहले नदी और फिर पहाड़ों के बीच बसे एक ऐसे कैंप तक ले जाएगा,जहां भूख, बीमारी, डर और बंदूक के साए में जिंदगी कटेगी।

पडरौना के महाराणा प्रताप नगर निवासी मोहम्मद उस्मान अंसारी, उनके मित्र मोहम्मद हसन रजा और बिहार के अनुरंजन कुमार को विदेश में नौकरी दिलाने का पूरा सिस्टम ठगों की ओर से बेहद प्रोफेशनल तरीके से तैयार किया गया था। व्हाट्सएप काॅल पर बातचीत में मोहम्मद उस्मान ने बताया कि पहले वीडियो कॉल पर बातचीत की गई।

इंटरव्यू जैसा माहौल बनाया गया। भरोसा दिलाया गया कि उन्हें कंस्ट्रक्शन कंपनी में बेहतर वेतन पर रखा जाएगा। इसके बाद फ्लाइट टिकट, वीजा और दूसरे दस्तावेज भेजे गए। लखनऊ से कोलकाता और फिर बैंकॉक होते हुए म्यांमार तक पहुंचने का पूरा रूट तय था। युवकों को कहीं भी यह महसूस नहीं होने दिया गया कि वे किसी जाल में फंस रहे हैं।

यांगून अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरने के बाद भी उन्हें एक होटल में ठहराया गया। कहा गया कि कंपनी का वाहन आने वाला है। युवकों के मुताबिक असली खेल यहीं से शुरू हुआ। कुछ घंटों बाद उन्हें अलग-अलग गाड़ियों में बैठाया गया। कुछ-कुछ दूरी पर वाहन बदले जाते रहे। रास्ते सुनसान होते गए। फिर नदी पार कर उन्हें पहाड़ी इलाके में पहुंचाया गया, जहां आबादी लगभग नहीं थी।

वहां पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि अब उन्हें वही काम करना होगा जो कंपनी कहेगी। उस्मान और उनके साथियों का आरोप है कि वहां चाइनीज लोगों के नेटवर्क के बीच उनसे फर्जी नाम वाली लड़कियों की आईडी चलाने के लिए दबाव बनाया गया। अब सोशल मीडिया पर लोगों को फंसाने, क्रिप्टो करेंसी जमा कराने और ऑनलाइन ठगी करने का दबाव बनाया गया।

मना करने पर पहले पासपोर्ट छीन लिए गए, फिर खाना तक रोक दिया गया। सबसे खराब हालत उस्मान की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार, वह पहले से शुगर का मरीज है। लगातार तनाव और दवा न मिलने से उनके पैर सूज चुके हैं। वीडियो कॉल में उनका चेहरा डरा हुआ और थका हुआ दिखाई दे रहा था।

घर पर मौजूद मोहम्मद उस्मान की मां रेहाना खातून आंखों में आंसू लिए बताती हैं कि सोमवार सुबह पांच बजे बेटे की वीडियो कॉल आई थी। हर व्हाट्सएप कॉल में उन्हें सिर्फ एक ही डर सताता है कि कहीं अगली बार बेटे की आवाज सुनाई दे या नहीं।

मोहम्मद उस्मान का छोटा भाई मोहम्मद अमीर अंसारी ने बताया कि दो दिन पहले उन्होंने जब काम करने से मना किया तो पहले तो हथियार दिखाकर डराया गया। फिर दो बजे रात को उन तीनों को एक गाड़ी में बैठाकर बीच जंगल में छोड़ दिया गया।

हम लोग रोने लगे। 27 साल के उस्मान पहले त्रिपुरा में सेफ्टी ऑफिसर पद पर थे, लेकिन सैलरी कम थी। घर में बहनों की शादी हुई और घर बना तो कर्ज में डूबने के कारण विदेश जाने की ललक हुई। उस्मान के दो बेटे हैं।

जनवरी में लौटे युवक ने भी सुनाई थी ऐसी ही दास्तान
जनवरी 2026 में कुशीनगर के कसया थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 18 श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर निवासी समीर अंसारी ने पुलिस को दी तहरीर में खुलासा किया था। वह म्यांमार से लौटा था। उसने भी बताया था कि कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने के नाम पर उससे किस्तों में पैसे लिए गए। अक्टूबर 2025 में उसे लखनऊ से बैंकॉक भेजा गया।

एयरपोर्ट की चमक और बेहतर भविष्य के सपनों के बीच उसे अंदाजा तक नहीं हुआ कि वह एक जाल में फंस चुका है। युवक के अनुसार, बैंकॉक पहुंचते ही उसके दस्तावेज ले लिए गए और रात में अवैध रास्ते से म्यांमार पहुंचा दिया गया। वहां हथियारबंद लोगों की निगरानी में बड़ी संख्या में भारतीय युवकों को रखा गया था। विरोध करने वालों की सबके सामने पिटाई होती थी ताकि बाकी लोग डर जाएं। बाद में भारत सरकार और प्रशासनिक हस्तक्षेप से कई भारतीयों को छुड़ाया गया, जिनमें कुशीनगर का समीर भी था।

मुंबई पहुंचने पर ठगी का हुआ अंदाजा
06 मई 2026 को चौराखास थाना क्षेत्र के नारायणपुर कोठी गांव निवासी जुगनू प्रजापति, कटेया थाना क्षेत्र के डुमरौना गांव निवासी वशिष्ठ गुप्ता ने पुलिस को तहरीर दी थी कि चौराखास थाना क्षेत्र के बनकटा बाजार में रिया इंटरनेशनल टूर एवं ट्रैवल्स के नाम से मोमिन शेख उर्फ मैनुद्दीन अपने पांच सहयोगियों के साथ विदेश में नौकरी दिलाने का प्रचार कराया था।

जनवरी 2026 में उनके वाहन से प्रचार कराया गया कि तुर्की और रसिया में नौकरी पाने के लिए युवक संपर्क कर सकते है। उनके बताए अनुसार, हम तीनों लोग बनकटा स्थित उनके ऑफिस पहुंचे। उन्होंने हम लोगों का पासपोर्ट तथा आधार कार्ड ले लिया और कहा कि आप लोगों का पासपोर्ट लग जाएगा तो सूचना दी जाएगी। बाद में उन्हें मुंबई भेजा गया जिसके बाद ठगी का पता चला।
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