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Maharajganj News: फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और बैंक खातों से निकासी का आरोप
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महराजगंज/मिठौरा। विकासखंड मिठौरा में वीबी जी राम जी योजना के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी, फर्जी फोटो और बैंक खातों के जरिये सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। कई कार्यस्थलों पर वास्तविक काम पड़री गांव के मजदूरों से कराया जाता है, जबकि ऑनलाइन जियो-टैग फोटो और उपस्थिति सेखुई गांव के लोगों के नाम से दर्ज कर दी जाती है। रिकॉर्ड में सैकड़ों मजदूर काम करते दिखाई देते हैं, लेकिन मौके पर पांच से दस मजदूर ही मिलते हैं।
सबसे गंभीर आरोप मजदूरी भुगतान को लेकर लगाए गए हैं। एक वायरल वीडियो में एक महिला कथित तौर पर यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि उसके खाते में चार हजार रुपये से अधिक की मजदूरी आई, लेकिन उसे केवल 500 रुपये ही दिए गए। ग्रामीणों का दावा है कि शेष राशि कथित रूप से एक एजेंट के माध्यम से वापस ले ली जाती है। हालांकि इस वायरल वीडियो की संवाद न्यूज एजेंसी पुष्टि नहीं करता है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि बैंक परिसर में एक कथित चहेते एजेंट के जरिये मजदूरों से जबरदस्त वसूली कराई जाती है। आरोप है कि मजदूरों के खाते से पैसा निकलवाने के बाद अधिकांश राशि वापस ले ली जाती है और उन्हें केवल नाममात्र की रकम थमा दी जाती है। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब ग्रामीणों ने दावा किया कि ऐसे लोगों के नाम पर भी मजदूरी का भुगतान दिखाया गया है, जिन्होंने कभी मजदूरी नहीं की।
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आरोपों के अनुसार प्रतिष्ठित परिवारों, शिक्षकों, झोलाछाप डॉक्टरों तथा निचलौल में रहने वाले ऐसे परिवारों की महिलाओं के खातों में भी मजदूरी भेजी गई है जो घर से बाहर तक नहीं निकलतीं। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह जॉब कार्ड और भुगतान व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे प्रकरण में रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव तथा अन्य जिम्मेदार लोगों की कथित मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अनियमितता संभव नहीं है। उनका आरोप है कि पूर्व में भी इसकी शिकायत खंड विकास अधिकारी से की गई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल कागजी जांच से काम नहीं चलेगा। योजना से जुड़े प्रत्येक जॉब कार्ड, मस्टर रोल, आधार आधारित उपस्थिति, जियो-टैग फोटो, बैंक खातों में हुए भुगतान, निकासी का विवरण तथा कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
.......
इस मामले की जानकारी नहीं है। जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-गौरवेंद्र सिंह, डीसी मनरेगा
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सबसे गंभीर आरोप मजदूरी भुगतान को लेकर लगाए गए हैं। एक वायरल वीडियो में एक महिला कथित तौर पर यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि उसके खाते में चार हजार रुपये से अधिक की मजदूरी आई, लेकिन उसे केवल 500 रुपये ही दिए गए। ग्रामीणों का दावा है कि शेष राशि कथित रूप से एक एजेंट के माध्यम से वापस ले ली जाती है। हालांकि इस वायरल वीडियो की संवाद न्यूज एजेंसी पुष्टि नहीं करता है।
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ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि बैंक परिसर में एक कथित चहेते एजेंट के जरिये मजदूरों से जबरदस्त वसूली कराई जाती है। आरोप है कि मजदूरों के खाते से पैसा निकलवाने के बाद अधिकांश राशि वापस ले ली जाती है और उन्हें केवल नाममात्र की रकम थमा दी जाती है। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब ग्रामीणों ने दावा किया कि ऐसे लोगों के नाम पर भी मजदूरी का भुगतान दिखाया गया है, जिन्होंने कभी मजदूरी नहीं की।
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आरोपों के अनुसार प्रतिष्ठित परिवारों, शिक्षकों, झोलाछाप डॉक्टरों तथा निचलौल में रहने वाले ऐसे परिवारों की महिलाओं के खातों में भी मजदूरी भेजी गई है जो घर से बाहर तक नहीं निकलतीं। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह जॉब कार्ड और भुगतान व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे प्रकरण में रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव तथा अन्य जिम्मेदार लोगों की कथित मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अनियमितता संभव नहीं है। उनका आरोप है कि पूर्व में भी इसकी शिकायत खंड विकास अधिकारी से की गई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल कागजी जांच से काम नहीं चलेगा। योजना से जुड़े प्रत्येक जॉब कार्ड, मस्टर रोल, आधार आधारित उपस्थिति, जियो-टैग फोटो, बैंक खातों में हुए भुगतान, निकासी का विवरण तथा कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
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इस मामले की जानकारी नहीं है। जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-गौरवेंद्र सिंह, डीसी मनरेगा