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Maharajganj News: बच्चों पर न डालें दबाव, करें संवाद

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2026 02:22 AM IST
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Don't put pressure on children, communicate.
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सोमवार को नगर क्षेत्र में एक किशोरी ने कक्षा छह में फेल होने पर कर ली थी आत्महत्या
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विशेषज्ञों की सलाह, बच्चों से संवाद करें अभिभावक, बच्चों पर न डालें दबाव
महराजगंज। सोमवार को नगर क्षेत्र के एक मैरिज हॉल में लक्ष्मी (14) की मौत ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। लक्ष्मी ने कक्षा छह में फेल होने के दुख में आत्महत्या कर ली। मनोवैज्ञानिकों की सलाह है कि यदि बच्चे अवसाद में हों तो उनसे बातचीत कर उनकी चिंता दूर करने की कोशिश करें। बच्चों पर किसी बात को लेकर दबाव न डालें।
माता-पिता के बीच विवाद, कठोर व्यवहार, घर में संवाद की कमी और बच्चों की शिकायतों को नजरअंदाज करना उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बनता है। छोटी-छोटी बातों में गुस्से में आकर लोग बच्चे आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। इसका सबसे कारण यह है कि लोगों में अब सहनशक्ति कम होती है। बच्चे नाराजगी या अवसाद में तात्कालिक प्रतिक्रिया के तौर पर ऐसे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
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विशेषज्ञों की सलाह है कि लक्ष्मी के आत्महत्या की घटना से अन्य अभिभावकों को भी सबक लेकर बच्चों से संवाद बढ़ाना चाहिए। ऐसी घटनाओं का सबसे बड़ा कारण मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग का अत्यधिक उपयोग बच्चों में अकेलेपन और अवसाद को जन्म दे रहा है। घर में लड़ाई-झगड़े, माता-पिता का तलाक या आर्थिक तंगी बच्चों के नाजुक मन पर गहरा बुरा असर डालती है।
इन बदलाव पर दें ध्यान
-अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों में इन बदलावों पर ध्यान देना चाहिए
-स्वभाव में अचानक बदलाव, जैसे अधिक आक्रामक होना या अचानक शांत हो जाना।
-पसंदीदा गतिविधियों या दोस्तों से दूरी बना लेना
-नींद में बदलाव (अनिद्रा) या खान-पान की आदतों में बदलाव
-मौत या सुसाइड के बारे में बार-बार बात करना या संकेत देना।
वर्जन
आत्महत्या के पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि कई जटिल परिस्थितियों का मेल होता है। टीन एज में बच्चों में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। किसी भी बात को लेकर बच्चों के ऊपर दबाव नहीं डालना चाहिए। दबाव डालने पर बच्चे अपने आप को काबू नहीं कर पाते हैं और वह आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। अपने बच्चों की तुलना भी आस-पड़ोस के बच्चों से नहीं करनी चाहिए। इससे बच्चों में हीन भावना विकसित होती है। अगर बच्चों के व्यवहार में कोई बदलाव दिखे तो उन्हें मनोविज्ञानी को जरूर दिखाएं।
-डॉ. आशुतोष दास, मनो विज्ञानी, केएमसी मेडिकल कॉलेज
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