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Maharajganj News: नवाचार से भी परिषदीय शिक्षा उत्कृष्टता और सार्थकता से दूर
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महराजगंज। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी होने के बाद प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता और रोचकता में सार्थक परिणाम नहीं मिल रहे हैं। निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए निशुल्क ड्रेस, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता व टीएलएम जैसी सहूलियत के बाद भी प्राथमिक स्कूलों की शिक्षा अभी न्यून ही बनी हुई है।
कई योजनाओं के लागू होने के बाद भी अभी आधे से अधिक स्कूल निपुण नहीं हो सके हैं। इसके पीछे के कारण पर शिक्षकों का एक सधा जवाब है कि जब तक शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य लिए जाते रहेंगे तब तक अपेक्षाकृत परिणाम नहीं मिलने वाले।
गैर शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की ऊर्जा खप जा रही है और बच्चों के पढ़ाने की मूल जिम्मेदारी में वह पीछे हैं। जनपद में 1500 से अधिक परिषदीय स्कूलों में 1.80 लाख से अधिक विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों की तैनाती है। इन शिक्षकों को पढ़ाने के नित नए तरीके सिखाने के साथ डिजिटल शिक्षा के प्रबंध हैं। बावजूद इसके शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के मामले में पीछे हैं।
42 गैर शैक्षणिक कार्यों की जिम्मेदारी: उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष बैजनाथ सिंह व संगठन मंत्री अखिलेश पाठक ने बताया कि शिक्षकों को सिर्फ बच्चों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया है। लेकिन उनसे डीबीटी, यू-डायस फीडिंग, निर्वाचन सहित लगभग 42 तरह के गैर शैक्षणिक कार्य लिए जा रहे हैं।
शिक्षकों की पूरी उर्जा गैर शैक्षणिक कार्य पर खर्च हो रही है। इस वजह से वह शैक्षणिक कार्य को वक्त कम दे पाते हैं। इन परिस्थितियों में शिक्षा गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार संभव नहीं। कई बार शासन व विभाग से पत्राचार किया गया लेकिन अब तक बदलाव प्रभावी नहीं हो सका है।
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कई योजनाओं के लागू होने के बाद भी अभी आधे से अधिक स्कूल निपुण नहीं हो सके हैं। इसके पीछे के कारण पर शिक्षकों का एक सधा जवाब है कि जब तक शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य लिए जाते रहेंगे तब तक अपेक्षाकृत परिणाम नहीं मिलने वाले।
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गैर शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की ऊर्जा खप जा रही है और बच्चों के पढ़ाने की मूल जिम्मेदारी में वह पीछे हैं। जनपद में 1500 से अधिक परिषदीय स्कूलों में 1.80 लाख से अधिक विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों की तैनाती है। इन शिक्षकों को पढ़ाने के नित नए तरीके सिखाने के साथ डिजिटल शिक्षा के प्रबंध हैं। बावजूद इसके शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के मामले में पीछे हैं।
42 गैर शैक्षणिक कार्यों की जिम्मेदारी: उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष बैजनाथ सिंह व संगठन मंत्री अखिलेश पाठक ने बताया कि शिक्षकों को सिर्फ बच्चों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया है। लेकिन उनसे डीबीटी, यू-डायस फीडिंग, निर्वाचन सहित लगभग 42 तरह के गैर शैक्षणिक कार्य लिए जा रहे हैं।
शिक्षकों की पूरी उर्जा गैर शैक्षणिक कार्य पर खर्च हो रही है। इस वजह से वह शैक्षणिक कार्य को वक्त कम दे पाते हैं। इन परिस्थितियों में शिक्षा गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार संभव नहीं। कई बार शासन व विभाग से पत्राचार किया गया लेकिन अब तक बदलाव प्रभावी नहीं हो सका है।
