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Maharajganj News: पहले सूखे ने सताया, अब बारिश बढ़ा रही तबाही का खाैफ
Mon, 13 Jul 2026 02:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 13 Jul 2026 02:35 AM IST
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सिद्धार्थनगर। मौसम की मार से जिले के किसान परेशान हैं। अच्छी बारिश न होने से जहां धान की रोपाई पिछड़ रही है। रोपाई का समय समाप्त होने के बाद भी बारिश न होने से करीब 25 प्रतिशत ही रोपाई हो पाई है। वहीं, नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश ने अब बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है।
नेपाल से निकलने वाली नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सबसे अधिक तबाही मचाने वाली बानगंगा, बूढ़ी राप्ती और राप्ती नदी में लगातार पानी बढ़ रहा है। राप्ती नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में करीब एक मीटर बढ़ चुका है। बारिश के अभाव में रोपाई नहीं हो रही है। वहीं, अगर बाढ़ आ जाती है तो रोपाई करना ही मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में किसान फसल को लेकर चिंतित हैं।
जनपद की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर टिकी है। 85 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है लेकिन, हर साल जिले के किसान कभी सूखे की मार तो कभी बाढ़ के कारण सबकुछ गंवा देते हैं। इस वर्ष मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार मानसून बहुत ही कमजोर हैं। अभी तक ऐसी बारिश नहीं हुई कि हर तरफ एक सामान्य रूप से पानी पहुंचे और किसान रोपाई कर सकें। मौसम की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
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जिले में करीब 1.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की खेती होती है लेकिन अब तक करीब 20-25 प्रतिशत क्षेत्र में ही धान की रोपाई हो सकी है। खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से अधिकतर किसान रोपाई शुरू नहीं कर पाए हैं।
नेपाल बाॅर्डर से सटा होने के कारण नेपाल में बारिश का असर साफ तौर पर बाढ़ के रूप में जनपद में नजर आता है। यहां भले ही बारिश न हो लेकिन नेपाल में भारी बारिश हुई तो जनपद का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ जाता है। राप्ती को छोड़कर नौ नदी और नालों में नेपाल का पानी पहुंचता है। राप्ती भी नेपाल से ही निकली है लेकिन वह बलरामपुर जनपद के रास्ते निकली और डुमरियागंज क्षेत्र से प्रवेश करती है।
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट जारी किया गया है। जानकारों के अनुसार, नेपाल में होने वाली बारिश का असर करीब 40 घंटे बाद सिद्धार्थनगर की नदियों में दिखता है। यदि जिले में बारिश नहीं हुई और नेपाल से लगातार पानी आता रहा तो खेतों में फसल तैयार होने से पहले ही बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
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नेपाल से निकलने वाली नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सबसे अधिक तबाही मचाने वाली बानगंगा, बूढ़ी राप्ती और राप्ती नदी में लगातार पानी बढ़ रहा है। राप्ती नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में करीब एक मीटर बढ़ चुका है। बारिश के अभाव में रोपाई नहीं हो रही है। वहीं, अगर बाढ़ आ जाती है तो रोपाई करना ही मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में किसान फसल को लेकर चिंतित हैं।
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जनपद की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर टिकी है। 85 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है लेकिन, हर साल जिले के किसान कभी सूखे की मार तो कभी बाढ़ के कारण सबकुछ गंवा देते हैं। इस वर्ष मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार मानसून बहुत ही कमजोर हैं। अभी तक ऐसी बारिश नहीं हुई कि हर तरफ एक सामान्य रूप से पानी पहुंचे और किसान रोपाई कर सकें। मौसम की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
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जिले में करीब 1.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की खेती होती है लेकिन अब तक करीब 20-25 प्रतिशत क्षेत्र में ही धान की रोपाई हो सकी है। खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से अधिकतर किसान रोपाई शुरू नहीं कर पाए हैं।
नेपाल बाॅर्डर से सटा होने के कारण नेपाल में बारिश का असर साफ तौर पर बाढ़ के रूप में जनपद में नजर आता है। यहां भले ही बारिश न हो लेकिन नेपाल में भारी बारिश हुई तो जनपद का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ जाता है। राप्ती को छोड़कर नौ नदी और नालों में नेपाल का पानी पहुंचता है। राप्ती भी नेपाल से ही निकली है लेकिन वह बलरामपुर जनपद के रास्ते निकली और डुमरियागंज क्षेत्र से प्रवेश करती है।
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट जारी किया गया है। जानकारों के अनुसार, नेपाल में होने वाली बारिश का असर करीब 40 घंटे बाद सिद्धार्थनगर की नदियों में दिखता है। यदि जिले में बारिश नहीं हुई और नेपाल से लगातार पानी आता रहा तो खेतों में फसल तैयार होने से पहले ही बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।