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अनुदान में खेल : बिना बकरियों के होती रही सेहत की जांच, बीमा भी कराया

Mon, 13 Jul 2026 02:15 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 02:15 AM IST
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Games played with grants: Health check-ups conducted and insurance obtained without any goats.
पिछले सत्र में शपथपत्र व यूनिट संचालन प्रमाण पत्र 16 जुलाई 2025 को किया गया था जमा
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विभाग के ईयर टैगिंग नंबर से कर दिया गया बकरियों का बीमा

महराजगंज। बकरी अनुदान योजना में अनियमितता के मामले में शासन की तरफ से अनिवार्य योजना समायोजन प्रक्रिया में भी खेल हुआ। बिना बकरियां खरीदे तीन महीने तक कागजों पर न केवल उनके स्वास्थ्य की जांच की जाती रही बल्कि विभाग की रिपोर्ट के आधार पर बीमा भी करा दिया गया।
जिले में बकरी अनुदान के 77 लाभार्थियों के साथ विभाग के जिम्मेदारों ने अनुदान राशि के आवंटन में धांधली की। मामले की शिकायत पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) स्तर से जांच के आदेश दिए गए। हालांकि, अभी तक जांच टीम किसी भी लाभार्थी का बयान नहीं दर्ज कर सकी है।
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इधर, मिली जानकारी के अनुसार समायोजन प्रक्रिया के तहत विभाग उन बकरियों का स्वास्थ्य जांच और इलाज करता रहा, जो वास्तव में थीं ही नहीं। समायोजन प्रक्रिया पूर्ण दिखाकर ईयर टैगिंग नंबर जारी कर दिए गए। लाभार्थियों को योजना का अनुदान मिलने के कागजों में तीन माह तक बकरी पालन नियमों का पालन किया गया। इस दौरान विभाग के जिम्मेदार यूनिट में जाकर बकरियों का इलाज करते रहे और ब्लॉकस्तरीय पशु चिकित्सक यूनिट संचालित होने का प्रमाणपत्र जारी करते रहे। यहां तक कि प्रमाण पत्र सीवीओ कार्यालय में लाभार्थी के शपथपत्र के साथ जमा भी किया गया। बीते सत्र का समायोजन 16 जुलाई 2025 को किया गया। विभाग ने इसी समायोजन प्रपत्र के आधार पर ईयर टैगिंग नंबर जारी किया, जिसके जरिये बीमा की शर्त भी पूरी कर ली गई।
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विभाग ही उपलब्ध कराता है बीमा के लिए प्रपत्र : डिस्ट्रिक्ट मैनेजर
जनपद में अनुदानित बकरियों के बीमा का दायित्व बजाज जनरल पशु बीमा कंपनी के जिम्मे है। ब्रोकरिंग एजेंसी के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर शैलेंद्र सिंह ने बताया कि अनुदानित बकरियों का बीमा पशु चिकित्सा विभाग की तरफ से दिए गए टैग नंबर, मेडिकल रिपोर्ट प्रपत्र, बकरी यूनिट की चार अलग-अलग तरीके से लिए गए फोटो के आधार पर कंपनी करती है। यह सब विभाग उपलब्ध कराता है। उक्त प्रपत्र व सामग्री के आधार पर बकरी यूनिट का मूल्य तय होता और उसी आधार पर तीन वर्ष के लिए बीमा प्रीमियम तय किया जाता है। विभाग ही सभी प्रक्रिया पूरी करता इसलिए स्थलीय निरीक्षण की आवश्यकता नहीं होती।

बकरी खरीद के लिए मिलते हैं 45 हजार रुपये
अनुसूचित, विधवा, निराश्रित महिलाओं को आय का माध्यम देने के लिए संचालित बकरी पालन अनुदान योजना (राज्य) के तहत 45 हजार रुपये चार बकरी व एक बकरा खरीदने के लिए लाभार्थी के खाते में भेजे जाते हैं। इसमें 40 हजार से लाभार्थी बकरी खरीद करता है जबकि चार हजार रुपये में विभाग तीन साल तक बकरियों की देखभाल और उनका इलाज करता है। वहीं, एक हजार रुपये बीमा के एवज में हर लाभार्थी से लिए जाते हैं।


वर्जन
बकरी अनुदान योजना के तहत यूनिट संचालित होने का प्रमाण पत्र ब्लॉक स्तरीय पशु चिकित्सक जारी करता है। बीते सत्र की यह प्रक्रिया 16 जुलाई 2025 को पूरी की गई। इसके तहत प्रपत्र व लाभार्थी शपथपत्र लेकर ईयर टैग नंबर जारी किया गया। मामले के समय मेरी तैनाती जनपद में नहीं थी। गठित जांच टीम प्रत्येक बिंदु पर रिपोर्ट देगी। जांच टीम की रिपोर्ट से ही यह साफ होगा कि बिना खरीद यूनिट संचालन व बीमा अनिवार्यता कैसे पूरी की गई।
-डाॅ. एजाज अहमद, सीवीओ, महराजगंज
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