{"_id":"6a4c0dc17f35f833d30d5650","slug":"heat-of-the-probe-goats-delivered-tags-forgotten-maharajganj-news-c-206-1-go11002-180659-2026-07-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बकरी अनुदान घोटाला: जांच से पहले लाभार्थियों के घर पहुंची बकरियां, टैगिंग भूले-जानिए कैसे हुआ खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बकरी अनुदान घोटाला: जांच से पहले लाभार्थियों के घर पहुंची बकरियां, टैगिंग भूले-जानिए कैसे हुआ खेल
Tue, 07 Jul 2026 01:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
नीलोत्पल दूबे, महराजगंज
नीलोत्पल दूबे, महराजगंज
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 01:49 AM IST
सार
बकरी अनुदान योजना गड़बड़झाला की पड़ताल के दौरान सोमवार को धानी ब्लॉक के कोईलाडांड ग्राम पंचायत निवासी कुरैशा ने बताया कि उन्हें अनुदान मिला और पिछले महीने उन्होंने दो बकरी खरीदी, लेकिन दिखाने की बात पर उन्होंने कहा कि बकरियों को चराने के लिए बच्चे दूसरे गांव ले गए हैं।
विज्ञापन
लाभार्थी शकुंतला और कुरैशा. लाभार्थी के घर बिना टैगिंग के पहुंचाई गई बकरियां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बकरी अनुदान गड़बड़झाले की परतें खुलती देख खेल करने वाले खुद को बचाने में जुटे हैं। धानी ब्लाॅक के दो लाभार्थियों के घर रविवार तक बकरियों का नामोनिशान नहीं था, लेकिन पड़ोसियों के मुताबिक सोमवार सुबह ब्लाॅक पशु चिकित्सा विभाग के लोग बकरी पहुंचा गए।
विज्ञापन
एक लाभार्थी के घर तीन बकरियां तो देखी गईं, लेकिन सुरक्षित बचने की हड़बड़ी में टैगिंग भूल गए। इसके अलावा प्रत्येक लाभार्थी को एक यूनिट में चार मादा व एक नर का अनुपालन भी नहीं दिखा।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि जनपद में अनुसूचित, विधवा व निराश्रित वर्ग की महिलाओं को सरकार की तरफ से आय का साधन देने के लिए बकरी पालन अनुदान योजना में लाभार्थियों से मिलकर खेल किया गया और खाते में पहुंची राशि का बंदरबांट कर लिया गया। मामले का राजफाश हुआ तो तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी गई।
विज्ञापन
इसके चलते बकरी अनुदान में खेल को अंजाम देने वालों के हाथ-पांव फूल गए हैं। बकरी अनुदान योजना गड़बड़झाला की पड़ताल के दौरान सोमवार को धानी ब्लॉक के कोईलाडांड ग्राम पंचायत निवासी कुरैशा ने बताया कि उन्हें अनुदान मिला और पिछले महीने उन्होंने दो बकरी खरीदी, लेकिन दिखाने की बात पर उन्होंने कहा कि बकरियों को चराने के लिए बच्चे दूसरे गांव ले गए हैं।
हालांकि उनके खाते में अनुदान का पैसा नवंबर 2025 में ही आ गया था। दूसरे दिन ही धनराशि निकाल भी ली गई। ऐसे में जून 2026 में बकरी खरीदी गई इसका कोई जवाब नहीं दे सकीं। दूसरी लाभार्थी शकुंतला की झोपड़ी में तीन बकरी व दो बच्चे दिखे, लेकिन बकरियों की टैगिंग नहीं दिखी, जबकि लाभार्थी के पास चार बकरी के साथ एक नर होने से ही यूनिट पूरी मानी जाती।
बाकी की बकरी कहां और टैग क्यों नहीं, इसका जवाब लाभार्थी नहीं दे सकीं।