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Maharajganj News: जमानत की सुनवाई से ठीक पहले जार्डन ब्राउन ने फिर से सरकारी वकील की मांग की
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निजी अधिवक्ता रखने से किया इन्कार, प्राधिकरण को अधीक्षक के मार्फत भेजा पत्र
आज सेशन कोर्ट में होनी है जार्डन की जमानत पर सुनवाई
महराजगंज। गोरखपुर जिला कारागार में शिफ्ट किए गए जार्डन ने जमानत पाने के लिए एक और दांव खेला है। उसने महराजगंज विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजकर निजी अधिवक्ता रखने से इनकार किया है। आज महराजगंज के सेशन कोर्ट में जार्डन की जमानत पर सुनवाई होनी है।
जानकारी के अनुसार, 11 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय सीमा सोनौली के जायसवाल मोहल्ले में स्तम्भ संख्या (516) 22 से जार्डन ब्राउन को उस वक्त दबोचा गया जब वह बिना वीजा और पासपोर्ट के नेपाल जाने की कोशिश कर रहा था। 22वीं वाहिनी एसएसबी की गिरफ्त में आए विदेशी नागरिक पर सोनौली कोतवाली में आव्रजन व विदेशी अधिनियम 2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने उससे पूछताछ की लेकिन वह सबको अलग-अलग बयान देकर गुमराह करने की कोशिश करता रहा।
न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने उसे कारागार भेजा तो पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की। इसके बाद प्राथमिकी में धोखाधड़ी की तीन धाराएं बढ़ाई गईं और इसे अमेरिकी नागरिक की जगह ब्रिटिश नागरिक बताया गया। इसी बीच जिला प्रशासन के निर्देश व सुरक्षा के मद्देनजर महराजगंज कारागार प्रशासन ने उसे गोरखपुर जेल शिफ्ट कर दिया।
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जिले में रहते हुए उसने अपर सत्र न्यायालय देवेंद्र प्रताप सिंह की अदालत के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण से निशुल्क अधिवक्ता डिमांड किया। इसके बाद उसे प्राधिकरण की तरफ से डिफेंस काउंसिल आशुतोष पांडेय की सेवा मिली। सत्र न्यायालय में वही जार्डन का केस देख रहे हैं। लेकिन गोरखपुर कारागार जाने के बाद उसने एक निजी अधिवक्ता रख लिया था। इसी अधिवक्ता ने जिला जज की कोर्ट में जमानत की अर्जी दाखिल की थी। आज इसी मामले में सुनवाई होनी है।
अपर सत्र न्यायालय में जार्डन का केस देखने वाले डिफेंस काउंसिल आशुतोष पांडेय ने ही इसकी पुष्टि की। इसे अमर उजाला ने सात अगस्त के अंक में प्रकाशित भी किया। अब जार्डन ने सात अगस्त को गोरखपुर जेल अधीक्षक के मार्फत महराजगंज विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजकर निजी अधिवक्ता रखने से इनकार किया है और डिफेंस काउंसिल आशुतोष पांडेय पर अपना विश्वास व्यक्त किया है। सूत्र बताते हैं कि यह कदम उठाने के पीछे उसकी शातिर दिमाग का पता चलता है। उसने यह पत्र सिर्फ इसलिए भेजा है जिससे डिफेंस काउंसिल की तरफ से उसकी जमानत पर कोई रोड़ा अटकाने की कवायद न होने पाए।
वर्जन
जेल कारागार अधीक्षक के माध्यम से शिफ्ट किए गए कैदी का पत्र आया था जिसे प्राधिकरण को भेज दिया गया है।
-वीके गौतम, अधीक्षक, कारागार महराजगंज।
-- -- -- -- -- --
अगर पत्र आया होगा तो वह प्राधिकरण के पास होगा। मेरे पास अब तक कोई पत्र नहीं पहुंचा है।
-आशुतोष पांडेय, अधिवक्ता डिफेंस काउंसिल, महराजगंज।
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आज सेशन कोर्ट में होनी है जार्डन की जमानत पर सुनवाई
महराजगंज। गोरखपुर जिला कारागार में शिफ्ट किए गए जार्डन ने जमानत पाने के लिए एक और दांव खेला है। उसने महराजगंज विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजकर निजी अधिवक्ता रखने से इनकार किया है। आज महराजगंज के सेशन कोर्ट में जार्डन की जमानत पर सुनवाई होनी है।
जानकारी के अनुसार, 11 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय सीमा सोनौली के जायसवाल मोहल्ले में स्तम्भ संख्या (516) 22 से जार्डन ब्राउन को उस वक्त दबोचा गया जब वह बिना वीजा और पासपोर्ट के नेपाल जाने की कोशिश कर रहा था। 22वीं वाहिनी एसएसबी की गिरफ्त में आए विदेशी नागरिक पर सोनौली कोतवाली में आव्रजन व विदेशी अधिनियम 2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने उससे पूछताछ की लेकिन वह सबको अलग-अलग बयान देकर गुमराह करने की कोशिश करता रहा।
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न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने उसे कारागार भेजा तो पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की। इसके बाद प्राथमिकी में धोखाधड़ी की तीन धाराएं बढ़ाई गईं और इसे अमेरिकी नागरिक की जगह ब्रिटिश नागरिक बताया गया। इसी बीच जिला प्रशासन के निर्देश व सुरक्षा के मद्देनजर महराजगंज कारागार प्रशासन ने उसे गोरखपुर जेल शिफ्ट कर दिया।
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जिले में रहते हुए उसने अपर सत्र न्यायालय देवेंद्र प्रताप सिंह की अदालत के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण से निशुल्क अधिवक्ता डिमांड किया। इसके बाद उसे प्राधिकरण की तरफ से डिफेंस काउंसिल आशुतोष पांडेय की सेवा मिली। सत्र न्यायालय में वही जार्डन का केस देख रहे हैं। लेकिन गोरखपुर कारागार जाने के बाद उसने एक निजी अधिवक्ता रख लिया था। इसी अधिवक्ता ने जिला जज की कोर्ट में जमानत की अर्जी दाखिल की थी। आज इसी मामले में सुनवाई होनी है।
अपर सत्र न्यायालय में जार्डन का केस देखने वाले डिफेंस काउंसिल आशुतोष पांडेय ने ही इसकी पुष्टि की। इसे अमर उजाला ने सात अगस्त के अंक में प्रकाशित भी किया। अब जार्डन ने सात अगस्त को गोरखपुर जेल अधीक्षक के मार्फत महराजगंज विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजकर निजी अधिवक्ता रखने से इनकार किया है और डिफेंस काउंसिल आशुतोष पांडेय पर अपना विश्वास व्यक्त किया है। सूत्र बताते हैं कि यह कदम उठाने के पीछे उसकी शातिर दिमाग का पता चलता है। उसने यह पत्र सिर्फ इसलिए भेजा है जिससे डिफेंस काउंसिल की तरफ से उसकी जमानत पर कोई रोड़ा अटकाने की कवायद न होने पाए।
वर्जन
जेल कारागार अधीक्षक के माध्यम से शिफ्ट किए गए कैदी का पत्र आया था जिसे प्राधिकरण को भेज दिया गया है।
-वीके गौतम, अधीक्षक, कारागार महराजगंज।
अगर पत्र आया होगा तो वह प्राधिकरण के पास होगा। मेरे पास अब तक कोई पत्र नहीं पहुंचा है।
-आशुतोष पांडेय, अधिवक्ता डिफेंस काउंसिल, महराजगंज।