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Maharajganj News: अपनी कमाई का हिस्सा जरूरतमंदों को जकात देना चाहिए
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रमजान के महीने का रविवार का पांचवा रोजा पहले अशरे (हिस्से) रहमत (दया) का चल रहा है
महराजगंज। माह-ए-रमजान का महीना तो रहमतो, बरकतों से भरा पड़ा है। इस पूरे महीने में मुसलमानों को अल्लाह की इबादत कर ज्यादा से ज्यादा नेकियां कमाना चाहिए। रमजान के महीने का रविवार का पांचवा रोजा पहले अशरे (हिस्से) रहमत (दया) का चल रहा है। रमजान के महीने में रोजेदारों के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं।
मिठौरा बाजार स्थित मदरसे के मौलाना जियाउद्दीन के अनुसार, रमजान के महीने में नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए, तभी आपकी इबादत कुबूल होती है। इस्लाम में इस महीने को काफी पवित्र (पाक) माना गया है। इस महीने में इस्लाम को मानने वाले लोग खुदा की इबादत करते हैं।
यह महीना आत्म संयम, अनुशासन, इबादत, और आपसी भाईचारा कायम करने का महीना है।कहा जाता है कि इस महीने में अल्लाह जन्नत का दरवाजा खोल देते हैं, इसलिए इस महीने में अधिक से अधिक नेक (अच्छे) काम किए जाते हैं।रमजान के महीने में रोजेदारों को कई नियमों का पालन करना होता है, तभी खुदा उनकी इबादत को कुबूल करते हैं।
हर मुस्लिम के लिए 5 काम करना बहुत जरूरी बताया गया है। इसमें पहला काम है कलमा पढ़ना, दूसरा रमजान के महीने मे रोजा रखना, तीसरा पांच वक्त की नमाज पढ़ना हर मुस्लिम के लिए बहुत जरूरी है। चौथा, रमजान के पवित्र महीने में ईद से पहले जकात (दान ) बेहद जरूरी बताया गया है।
जकात में अपने सालभर की कमाई का 2.5 फीसदी हिस्सा जरूरतमंदों को दान करना होता है।आपके घर में जो भी कमाता है, उसे परिवार की तरफ से जकात (दान) करना चाहिए। अगर पांच लोगों में से चार कमाते हैं, तो चारों को जकात (दान) करना चाहिए। जकात का हिस्सा गरीबों, यतीमों, विधवा महिलाओं और जरूरतमंदों में दान करना चाहिए। माना जाता है कि जकात के बगैर अल्लाह की बारगाह में इबादत कुबूल नहीं होती और पांचवा, इस्लाम को मानने वालों को जीवन में एक बार हज करना चाहिए।
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महराजगंज। माह-ए-रमजान का महीना तो रहमतो, बरकतों से भरा पड़ा है। इस पूरे महीने में मुसलमानों को अल्लाह की इबादत कर ज्यादा से ज्यादा नेकियां कमाना चाहिए। रमजान के महीने का रविवार का पांचवा रोजा पहले अशरे (हिस्से) रहमत (दया) का चल रहा है। रमजान के महीने में रोजेदारों के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं।
मिठौरा बाजार स्थित मदरसे के मौलाना जियाउद्दीन के अनुसार, रमजान के महीने में नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए, तभी आपकी इबादत कुबूल होती है। इस्लाम में इस महीने को काफी पवित्र (पाक) माना गया है। इस महीने में इस्लाम को मानने वाले लोग खुदा की इबादत करते हैं।
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यह महीना आत्म संयम, अनुशासन, इबादत, और आपसी भाईचारा कायम करने का महीना है।कहा जाता है कि इस महीने में अल्लाह जन्नत का दरवाजा खोल देते हैं, इसलिए इस महीने में अधिक से अधिक नेक (अच्छे) काम किए जाते हैं।रमजान के महीने में रोजेदारों को कई नियमों का पालन करना होता है, तभी खुदा उनकी इबादत को कुबूल करते हैं।
हर मुस्लिम के लिए 5 काम करना बहुत जरूरी बताया गया है। इसमें पहला काम है कलमा पढ़ना, दूसरा रमजान के महीने मे रोजा रखना, तीसरा पांच वक्त की नमाज पढ़ना हर मुस्लिम के लिए बहुत जरूरी है। चौथा, रमजान के पवित्र महीने में ईद से पहले जकात (दान ) बेहद जरूरी बताया गया है।
जकात में अपने सालभर की कमाई का 2.5 फीसदी हिस्सा जरूरतमंदों को दान करना होता है।आपके घर में जो भी कमाता है, उसे परिवार की तरफ से जकात (दान) करना चाहिए। अगर पांच लोगों में से चार कमाते हैं, तो चारों को जकात (दान) करना चाहिए। जकात का हिस्सा गरीबों, यतीमों, विधवा महिलाओं और जरूरतमंदों में दान करना चाहिए। माना जाता है कि जकात के बगैर अल्लाह की बारगाह में इबादत कुबूल नहीं होती और पांचवा, इस्लाम को मानने वालों को जीवन में एक बार हज करना चाहिए।
