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Maharajganj News: तकनीकी रूप से दक्ष होंगे तभी प्रगति की दौड़ में आगे जाएंगे

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 02:08 AM IST
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Only by becoming technically proficient will you forge ahead in the race for progress.
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फरेंदा। लुंबिनी बुद्धिस्ट यूनिवर्सिटी एवं लाल बहादुर शास्त्री स्मारक पीजी काॅलेज आनंदनगर के तत्वावधान में लुबिंनी में शिक्षा, साहित्य और समाज संस्कृति की दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। दो दिन में संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में कुल 54 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम में डॉ. इंद्र कुमार काफले ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य चरित्र निर्माण है और चरित्र निर्माण तभी संभव है जब शिक्षा, साहित्य, समाज और संस्कृति एक दूसरे के साथ समन्वित होकर कार्य करें। शिक्षा, साहित्य, समाज और संस्कृति मानव सभ्यता के चार ऐसे स्तंभ हैं जिन पर विश्व की शांति प्रगति और सतत विकास आधारित है।
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर के कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा ने कहा कि हम एआई के जमाने में जी रहे हैं। जब हम तकनीकी रूप से दक्ष होंगे तभी दुनिया में प्रगति की दौड़ में आगे जाएंगे। हमें भविष्य की दिशा तय करने के लिए मानव केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। विशिष्ट वक्ता शिप्रा पाठक ने कहा कि आज मानव सभ्यता के ऊपर पर्यावरण का संकट है।
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जब तक हमारा पर्यावरण अच्छा नहीं होगा हम स्वस्थ नहीं होंगे हम स्वस्थ नहीं होंगे तो समाज स्वस्थ नहीं होगा समाज स्वस्थ नहीं होगा तो देश विकसित राष्ट्रों की कतार में शामिल नहीं होगा।
प्रबंधक डॉ. बलराम भट्ट ने कहा कि समाज व्यक्तियों का मात्र समूह नहीं बल्कि साझा मूल्यों परंपराओं और संबंधों का जीवन तंत्र है। समाज निरंतर परिवर्तनशील है इसलिए हमें वैश्वीकरण और तकनीकी विकास के युग में ध्यान देने की जरूरत है। प्राचार्य और संगोष्ठी के संयोजक डॉ. राम पांडेय ने कहा कि अंधाधुंध पेड़ों की कटाई, नदी-तालाब की घटती संख्या ने पर्यावरण को पूरी तरह से प्रदूषित कर दिया है।
संगोष्ठी को प्राचार्य प्रोफेसर बृजेश पांडेय, डॉ. अमित कुमार दुबे, डॉ. राजेंद्र, अरविंद सिंह, प्रोफेसर हरिशंकर सिंह, डॉ. कमल थापा ने संबोधित किया। इस दौरान गजेंद्र गुप्ता, प्रो. जीतू गिरी, डॉ. केआर यादव, डॉ. देवेंद्र कुमार पाठक, डॉ. सरोज पांडेय, डॉ. पूजा सिंह सहित भारत और नेपाल के दर्जनों आचार्य मौजूद रहे।
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