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Maharajganj News: संसाधनों की कमी से जूझ रहा अग्निशमन विभाग, आग लगी तो कैसे बुझेगी?
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अग्निशमन विभाग का फायर इंडेंट।
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12 में से मात्र तीन चालक, 12 लीडिंग फायर मैन की जरूरत, पांच से चल रहा काम
अगले महीने में खेतों में गेंहू की फसल पक कर हो जाएगी तैयार
महराजगंज। गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। इस मौसम में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। गेंहू की फसल तैयार होने के बाद खेतों में आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। अग्निशमन विभाग की सक्रियता से ऐसे मामलों में नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन जनपद का अग्निशमन विभाग संसाधनों व कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में यदि आग लगती है तो उसे काबू में करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। हालांकि अग्निशमन विभाग के जिम्मेदारों का दावा है कि आग लगने की घटनाओं से निपटने को विभाग पूरी तरह से तैयार है।
दो दिन बाद अप्रैल का महीना शुरू हो जाएगा। अप्रैल में गर्मी बढ़ने के साथ ही आग लगने की भी घटनाएं बढ़ जाती हैं। एक छोटी सी चिंगारी सैकड़ों एकड़ खेतों में पककर तैयार गेहूं की फसल के साथ कई रिहायशी झोपड़ी को अपने आगोश में ले लेती है। पछुआ हवा आग में घी का काम करती है। अग्निशमन विभाग के पास संसाधनों संसाधनों की अनुपलब्धता व फायर कर्मियों की कमी से हर साल सैकड़ों हेक्टेयर फसल जलकर राख हो जाती है। विभाग के जिम्मेदारों ने गर्मी के मौसम को देखते हुए गाड़ियों के मेंटिनेंस, पाइप, पंप आदि की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का काम पूरा कर लिया है।
अग्निशमन विभाग में फायर मैन के स्वीकृत 100 पदों की तुलना में मात्र 33 उपलब्ध हैं। 12 के सापेक्ष मात्र तीन चालक हैं और विभाग को 12 लीडिंग फायर मैन की जरूरत है लेकिन मात्र पांच से काम चलाया जा रहा है। जनपद में करीब 26 लाख की आबादी को बेहतर सेवा मुहैया कराने के लिए अग्निशमन विभाग के पास मानव संसाधनों के अलावा भौतिक संसाधन भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं। वर्तमान में अग्निशमन विभाग के बेड़े में पांच मोटर फायर टेंडर और तीन वाटर मिस्ट ही हैं। हालांकि विभाग के जिम्मेदारों का दावा है कि आग लगने की घटनाओं के समय संसाधनों का बंदोबस्त कर लिया जाता है। चालक के नहीं होने के कारण अप्रैल, मई व जून माह में परेशानी होती है।
विभाग के अनुसार, वर्तमान में दमकल की आठ गाड़ियों को चलाने के लिए सिर्फ तीन चालक ही हैं। इन्हीं के सहारे पूरे जिले में आग बुझाने का दावा किया जा रहा है। वहीं 12 लीडिंग फायर मैन के सापेक्ष मात्र पांच फायरमैन हैं। वर्तमान में अग्निशमन विभाग के पास दमकल की पांच छोटी और तीन बड़ी गाड़ियां ही हैं।
महराजगंज और सिसवा में फायर स्टेशन उपलब्ध
वर्तमान में महराजगंज और सिसवा में फायर स्टेशन क्रियाशील हैं। आग लगने की सूचना मिलते ही यहां से टीम रवाना हो जाएगी। वहीं नौतनवा और पकड़ी नोनिया में फायर स्टेशन बन रहे हैं। फरेंदा में जल्द ही फायर स्टेशन शुरू किया जाएगा। आगलगी की घटनाओं को देखते हुए फरेंदा और श्याम देऊरवा और चौक में एक-एक यूनिट गाड़ी रखी जाती है। ताकि आग लगने पर जल्दी से काबू किया जा सके।
समय से नहीं पहुंचने से बढ़ती है क्षति
ग्रामीण इलाकों में सड़कें संकरी होने के कारण बड़े वाहन मौके तक नहीं पहुंच पाते, इससे क्षति बढ़ जाती है। इसके अलावा आग बुझाते समय जब गाड़ी का पानी खत्म होता है तो दोबारा भरने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। इसके लिए शहरों में पास के माॅल व हाईड्रेंट आदि का उपयोग करते हैं लेकिन ग्रामीण इलाकों में इस तरह का कोई प्रबंध नहीं है। सिर्फ प्राकृतिक जलस्रोत अथवा पंपिंग मशीन से रिफिलिंग करने को मजबूर होते हैं।
केस एक
जनपद के अति पिछड़े क्षेत्र सोहगीबरवा के शिकारपुर टोला मटियरवा में खाना बनाते समय पिछले साल अक्टूबर माह में गैस सिलेंडर से अचानक आग लग गई थी। आग की लपटों की चपेट में आने से तीन झोपड़ी जल गई थीं। सूचना पर पहुंची पुलिस व ग्रामीणों ने किसी तरह से आग पर काबू पाया। इससे काफी नुकसान हुआ था।
वर्जन
गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। विभाग में संसाधनों की कमी है लेकिन आग से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह से तैयार है।
-वीरसेन सिंह, फायर सेफ्टी ऑफिसर, अग्निशमन विभाग
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अगले महीने में खेतों में गेंहू की फसल पक कर हो जाएगी तैयार
महराजगंज। गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। इस मौसम में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। गेंहू की फसल तैयार होने के बाद खेतों में आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। अग्निशमन विभाग की सक्रियता से ऐसे मामलों में नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन जनपद का अग्निशमन विभाग संसाधनों व कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में यदि आग लगती है तो उसे काबू में करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। हालांकि अग्निशमन विभाग के जिम्मेदारों का दावा है कि आग लगने की घटनाओं से निपटने को विभाग पूरी तरह से तैयार है।
दो दिन बाद अप्रैल का महीना शुरू हो जाएगा। अप्रैल में गर्मी बढ़ने के साथ ही आग लगने की भी घटनाएं बढ़ जाती हैं। एक छोटी सी चिंगारी सैकड़ों एकड़ खेतों में पककर तैयार गेहूं की फसल के साथ कई रिहायशी झोपड़ी को अपने आगोश में ले लेती है। पछुआ हवा आग में घी का काम करती है। अग्निशमन विभाग के पास संसाधनों संसाधनों की अनुपलब्धता व फायर कर्मियों की कमी से हर साल सैकड़ों हेक्टेयर फसल जलकर राख हो जाती है। विभाग के जिम्मेदारों ने गर्मी के मौसम को देखते हुए गाड़ियों के मेंटिनेंस, पाइप, पंप आदि की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का काम पूरा कर लिया है।
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अग्निशमन विभाग में फायर मैन के स्वीकृत 100 पदों की तुलना में मात्र 33 उपलब्ध हैं। 12 के सापेक्ष मात्र तीन चालक हैं और विभाग को 12 लीडिंग फायर मैन की जरूरत है लेकिन मात्र पांच से काम चलाया जा रहा है। जनपद में करीब 26 लाख की आबादी को बेहतर सेवा मुहैया कराने के लिए अग्निशमन विभाग के पास मानव संसाधनों के अलावा भौतिक संसाधन भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं। वर्तमान में अग्निशमन विभाग के बेड़े में पांच मोटर फायर टेंडर और तीन वाटर मिस्ट ही हैं। हालांकि विभाग के जिम्मेदारों का दावा है कि आग लगने की घटनाओं के समय संसाधनों का बंदोबस्त कर लिया जाता है। चालक के नहीं होने के कारण अप्रैल, मई व जून माह में परेशानी होती है।
विभाग के अनुसार, वर्तमान में दमकल की आठ गाड़ियों को चलाने के लिए सिर्फ तीन चालक ही हैं। इन्हीं के सहारे पूरे जिले में आग बुझाने का दावा किया जा रहा है। वहीं 12 लीडिंग फायर मैन के सापेक्ष मात्र पांच फायरमैन हैं। वर्तमान में अग्निशमन विभाग के पास दमकल की पांच छोटी और तीन बड़ी गाड़ियां ही हैं।
महराजगंज और सिसवा में फायर स्टेशन उपलब्ध
वर्तमान में महराजगंज और सिसवा में फायर स्टेशन क्रियाशील हैं। आग लगने की सूचना मिलते ही यहां से टीम रवाना हो जाएगी। वहीं नौतनवा और पकड़ी नोनिया में फायर स्टेशन बन रहे हैं। फरेंदा में जल्द ही फायर स्टेशन शुरू किया जाएगा। आगलगी की घटनाओं को देखते हुए फरेंदा और श्याम देऊरवा और चौक में एक-एक यूनिट गाड़ी रखी जाती है। ताकि आग लगने पर जल्दी से काबू किया जा सके।
समय से नहीं पहुंचने से बढ़ती है क्षति
ग्रामीण इलाकों में सड़कें संकरी होने के कारण बड़े वाहन मौके तक नहीं पहुंच पाते, इससे क्षति बढ़ जाती है। इसके अलावा आग बुझाते समय जब गाड़ी का पानी खत्म होता है तो दोबारा भरने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। इसके लिए शहरों में पास के माॅल व हाईड्रेंट आदि का उपयोग करते हैं लेकिन ग्रामीण इलाकों में इस तरह का कोई प्रबंध नहीं है। सिर्फ प्राकृतिक जलस्रोत अथवा पंपिंग मशीन से रिफिलिंग करने को मजबूर होते हैं।
केस एक
जनपद के अति पिछड़े क्षेत्र सोहगीबरवा के शिकारपुर टोला मटियरवा में खाना बनाते समय पिछले साल अक्टूबर माह में गैस सिलेंडर से अचानक आग लग गई थी। आग की लपटों की चपेट में आने से तीन झोपड़ी जल गई थीं। सूचना पर पहुंची पुलिस व ग्रामीणों ने किसी तरह से आग पर काबू पाया। इससे काफी नुकसान हुआ था।
वर्जन
गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। विभाग में संसाधनों की कमी है लेकिन आग से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह से तैयार है।
-वीरसेन सिंह, फायर सेफ्टी ऑफिसर, अग्निशमन विभाग