फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   The mill rate is 425 rupees, but farmers are selling sugarcane at 250 to 280 rupees per quintal to meet immediate needs.

Maharajganj News: मिलों का इंतजार महंगा, किसान सस्ते में गन्ना बेचने को मजबूर

Mon, 26 Oct 2026 02:14 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2026 02:14 AM IST
विज्ञापन
The mill rate is 425 rupees, but farmers are selling sugarcane at 250 to 280 rupees per quintal to meet immediate needs.
निचलौल। चीनी मिलों के चालू होने के इंतजार और बकाया भुगतान की चिंता ने गन्ना किसानों को कोल्हुओं का रुख करने पर मजबूर कर दिया है। त्योहारों के बीच नकदी की जरूरत ऐसी है कि किसान औने-पौने दाम पर भी अपना गन्ना बेचने को तैयार हैं।
विज्ञापन

गड़ौरा चीनी मिल के संचालन का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने से अनिश्चितता बनी हुई है। कोल्हू संचालक तत्काल भुगतान कर किसानों को राहत तो दे रहे हैं लेकिन चीनी मिलों के 425 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले कीमत 250 से 280 रुपये ही दे रहे हैं। ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल पौने दो सौ रुपये तक कम मिल रहे हैं। मजबूरी में लिया गया यह फैसला किसानों की तात्कालिक जरूरत तो पूरी कर रहा है, लेकिन उनकी मेहनत की कमाई पर भारी चोट भी पहुंचा रहा है।
विज्ञापन

किसानों के मुताबिक, करवा चौथ और दिवाली जैसे त्योहारों के अलावा बच्चों की पढ़ाई, शादी-विवाह और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए नकदी की आवश्यकता है। गन्ना मूल्य में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने और पिछले भुगतान में देरी से किसान पहले से आर्थिक संकट झेल रहे हैं। कोल्हुओं से मिलने वाला तत्काल भुगतान कुछ राहत जरूर दे रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गड़ौरा मिल के संचालन पर संशय
निचलौल का तराई क्षेत्र गन्ने की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में किसान गन्ने की फसल पर निर्भर हैं। गड़ौरा चीनी मिल के संचालन का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र में कई कोल्हुओं पर पेराई शुरू होने के बावजूद गन्ने की पूरी फसल खप जाने को लेकर किसान चिंतित हैं। वहीं, कोल्हुओं के संचालन में मानकों और नियमों के पालन की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

बोले किसान
हर साल गन्ना बेचने और फिर भुगतान के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ता है। महंगाई के बीच खेती की लागत बढ़ने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। गड़ौरा चीनी मिल चलने की उम्मीद कम दिख रही है, ऐसे में कोल्हू पर गन्ना बेचना एकमात्र विकल्प बचा है।
- बिंदेश कुशवाहा, अहिरौली
मिलों के संचालन और समय पर भुगतान को लेकर अनिश्चितता के कारण किसान हर साल परेशान हो रहे हैं। तत्काल पैसों की जरूरत के चलते कम दाम पर ही कोल्हुओं पर गन्ना बेचना पड़ रहा है। कोल्हू पर रेट तो कम मिलता है लेकिन पैसा समय से मिल जाता है।
- विनोद यादव, बजहा
मार्च में बेटे की शादी होनी है। गन्ने की फसल बिक जाने के बाद ही शादी की तैयारियां हो पाएंगी। मिल पर गन्ना अगर बिक भी गया तो भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में शादी के लिए खरीदारी और अन्य तैयारियों में दिक्कत आएगी।
- रविंद्रा देवी, शीतलापुर
गन्ने की फसल बाढ़ से पहले ही प्रभावित हो चुकी है। जो बची है उसे मिल पर बेचना चुनौती बना हुआ है। मिल के चलने के इंतजार में घर की आर्थिक व्यवस्था बिगड़ जाएगी। गेहूं की खेती भी पिछड़ जाएगी। कोल्हू पर बेचकर आगे का काम कर सकेंगे।

- जगरनाथ कुशवाहा, अहिरौली

बोले अधिकारी
गड़ौरा चीनी मिल के संचालन का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। क्षेत्र के किसानों के गन्ने की आपूर्ति के लिए आसपास की चार चीनी मिलों को गन्ना आवंटित किया गया है। 11 क्रय केंद्र बनाए जा रहे हैं। बहुआर, बैठवलिया, बड़ेया, मिश्रवलिया, जैसी और पिपरा काजी सहित अन्य स्थानों पर केंद्र बनाने की प्रक्रिया चल रही है। अगले माह चीनी मिलों के चालू होने के साथ ही गन्ने की खरीद शुरू होगी।
- तेज प्रताप सिंह, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed