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Maharajganj News: कहीं कोई क्लीनिक नहीं, गांव में घूमकर इलाज करता था झोलाछाप
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मृतक लड़की के घर उसरहा जांच करने पहुंचे नोडल अधिकारी।
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कटहरा खास टोला उसरहवा में झोलाछाप की लापरवाही से हुई थी किशोरी की मौत
बुधवार को नोडल अधिकारी ने टीम के साथ किशोरी के घर जाकर ली जानकारी
महराजगंज। कोतवाली थाना क्षेत्र के कटहरा खास टोला उसरहवा में झोलाछाप की लापरवाही से एक किशोरी की 27 अप्रैल को मौत हो गई थी। बुधवार को नोडल अधिकारी वीरेंद्र आर्या किशोरी के घर जांच करने पहुंचे। इस दौरान पता चला कि झोलाछाप घूम-घूम कर लोगों का इलाज करता है। उसकी कहीं पर क्लीनिक नहीं है।
मृतका के चाचा विनाचल सहानी ने बताया कि उनके भाई रामबेलास की करीब 10 दिन पहले मृत्यु हो चुकी है। 27 अप्रैल को उनकी भतीजी रिंकी के पैर में फोड़ा-फुंसी होने पर वह गांव के ही धर्मेंद्र सहानी के पास दवा लेने गए। धर्मेंद्र ने खुद को रजिस्टर्ड डॉक्टर बताते हुए इंजेक्शन लगाने की बात कही। परिजनों के मना करने के बावजूद उसने जबरन नस में इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगते ही रिंकी की हालत बिगड़ गई, उसके मुंह से झाग आने लगा और वह बेहोश होकर गिर पड़ी। आनन-फानन में ग्रामीणों की मदद से उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सदर कोतवाल निर्भय सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी धर्मेंद्र सहानी के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। संवाद
वर्जन
टीम के साथ गांव पहुंचकर मामले की जांच की। आरोपी का कोई स्थायी क्लीनिक नहीं है। वह गांव में घूमकर इलाज करता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारण का पता नहीं चल सका है। उसका शरीर कुछ जगह नीला पड़ गया था। विसरा प्रिजर्व कर लिया गया है।
-डॉ. वीरेन्द्र आर्या, एसीएमओझोलाछाप बने ''''''''मौत के सौदागर''''''''... जांच तक सीमित है विभाग
-ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं में कमी का फायदा उठा रहे झोलाछाप
- मंगलवार को भी कोतवाली थाना क्षेत्र के कटहरा खास टोला उसरहवा में झोलाछाप की लापरवाही से एक किशोरी की हो गई मौत
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का फायदा उठाकर ''''''''''''''''मौत के सौदागर'''''''''''''''' बने झोलाछाप लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि एक के बाद एक हो रही मौतों के बावजूद स्वास्थ्य महकमा केवल नोटिस और जांच और कागजी कार्रवाई के घोड़े दौड़ा रहा है। जब तक विभाग की फाइलें आगे बढ़ती हैं, तब तक ये झोलाछाप अपनी दुकानें समेट कर दूसरी जगह अपना ठिकाना बना लेते हैं। मंगलवार को भी कोतवाली थाना क्षेत्र के कटहरा खास टोला उसरहवा में कथित झोलाछाप की लापरवाही से एक किशोरी की मौत का मामला सामने आया है।
जिलों में दो माह में ऐसे कई मौत के मामले सामने आए हैं। लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग जागता है। हर घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है, क्लीनिक को सील कर देती है। वहीं पुलिस मुकदमा दर्ज कर लेती है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विभाग के पास इन अवैध क्लीनिकों का न तो कोई सटीक आंकड़ा है और न ही इन्हें रोकने की कोई ठोस रणनीति। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से यह कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।
सूत्रों की माने तो शहर की गलियों से लेकर गांव के चौराहों तक बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल और पैथोलॉजी लैब चल रहे हैं। डिग्री नहीं केवल अनुभव के सहारे यह लोगों का उपचार करते हैं। कई मामलों में तो यह भी देखा गया है कि ऑपरेशन थियेटर के नाम पर एक गंदे कमरे में सर्जरी तक कर दी जाती है। वहीं अधिकारियों से पूछने पर वह कहते हैं मामले की जांच की जा रही है। कुछ दिन बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है या निजी अस्पताल को दूसरे नाम से रजिस्ट्रेशन दे दिया जाता है। इसका किसी को कानो-कान भनक तक नहीं लगती है और आराम से निजी अस्पताल संचालक संचालित होता है।
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बुधवार को नोडल अधिकारी ने टीम के साथ किशोरी के घर जाकर ली जानकारी
महराजगंज। कोतवाली थाना क्षेत्र के कटहरा खास टोला उसरहवा में झोलाछाप की लापरवाही से एक किशोरी की 27 अप्रैल को मौत हो गई थी। बुधवार को नोडल अधिकारी वीरेंद्र आर्या किशोरी के घर जांच करने पहुंचे। इस दौरान पता चला कि झोलाछाप घूम-घूम कर लोगों का इलाज करता है। उसकी कहीं पर क्लीनिक नहीं है।
मृतका के चाचा विनाचल सहानी ने बताया कि उनके भाई रामबेलास की करीब 10 दिन पहले मृत्यु हो चुकी है। 27 अप्रैल को उनकी भतीजी रिंकी के पैर में फोड़ा-फुंसी होने पर वह गांव के ही धर्मेंद्र सहानी के पास दवा लेने गए। धर्मेंद्र ने खुद को रजिस्टर्ड डॉक्टर बताते हुए इंजेक्शन लगाने की बात कही। परिजनों के मना करने के बावजूद उसने जबरन नस में इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगते ही रिंकी की हालत बिगड़ गई, उसके मुंह से झाग आने लगा और वह बेहोश होकर गिर पड़ी। आनन-फानन में ग्रामीणों की मदद से उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सदर कोतवाल निर्भय सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी धर्मेंद्र सहानी के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। संवाद
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टीम के साथ गांव पहुंचकर मामले की जांच की। आरोपी का कोई स्थायी क्लीनिक नहीं है। वह गांव में घूमकर इलाज करता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारण का पता नहीं चल सका है। उसका शरीर कुछ जगह नीला पड़ गया था। विसरा प्रिजर्व कर लिया गया है।
-डॉ. वीरेन्द्र आर्या, एसीएमओझोलाछाप बने ''''''''मौत के सौदागर''''''''... जांच तक सीमित है विभाग
-ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं में कमी का फायदा उठा रहे झोलाछाप
- मंगलवार को भी कोतवाली थाना क्षेत्र के कटहरा खास टोला उसरहवा में झोलाछाप की लापरवाही से एक किशोरी की हो गई मौत
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का फायदा उठाकर ''''''''''''''''मौत के सौदागर'''''''''''''''' बने झोलाछाप लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि एक के बाद एक हो रही मौतों के बावजूद स्वास्थ्य महकमा केवल नोटिस और जांच और कागजी कार्रवाई के घोड़े दौड़ा रहा है। जब तक विभाग की फाइलें आगे बढ़ती हैं, तब तक ये झोलाछाप अपनी दुकानें समेट कर दूसरी जगह अपना ठिकाना बना लेते हैं। मंगलवार को भी कोतवाली थाना क्षेत्र के कटहरा खास टोला उसरहवा में कथित झोलाछाप की लापरवाही से एक किशोरी की मौत का मामला सामने आया है।
जिलों में दो माह में ऐसे कई मौत के मामले सामने आए हैं। लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग जागता है। हर घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है, क्लीनिक को सील कर देती है। वहीं पुलिस मुकदमा दर्ज कर लेती है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विभाग के पास इन अवैध क्लीनिकों का न तो कोई सटीक आंकड़ा है और न ही इन्हें रोकने की कोई ठोस रणनीति। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से यह कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है।
सूत्रों की माने तो शहर की गलियों से लेकर गांव के चौराहों तक बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल और पैथोलॉजी लैब चल रहे हैं। डिग्री नहीं केवल अनुभव के सहारे यह लोगों का उपचार करते हैं। कई मामलों में तो यह भी देखा गया है कि ऑपरेशन थियेटर के नाम पर एक गंदे कमरे में सर्जरी तक कर दी जाती है। वहीं अधिकारियों से पूछने पर वह कहते हैं मामले की जांच की जा रही है। कुछ दिन बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है या निजी अस्पताल को दूसरे नाम से रजिस्ट्रेशन दे दिया जाता है। इसका किसी को कानो-कान भनक तक नहीं लगती है और आराम से निजी अस्पताल संचालक संचालित होता है।
