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Mahoba News: शुगर स्तर बढ़े रहने से दोबारा टीबी होने का खतरा ज्यादा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Sat, 07 Mar 2026 12:30 AM IST
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महोबा। रक्त में लंबे समय तक बढ़ा हुआ शुगर स्तर न सिर्फ हृदय, किडनी व आंखों को नुकसान पहुँचाता है बल्कि यह टीबी (क्षय रोग) के दोबारा होने का खतरा भी बढ़ाता है। अनियंत्रित डायबिटीज वाले मरीजों में टीबी का संक्रमण दोबारा सक्रिय होने या फिर नए रूप में होने की आशंका सामान्य रोगी की तुलना में कहीं अधिक होती है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. रामबाबू सिंह के शोध में यह निष्कर्ष निकलकर सामने आया है।
मेडिसिन विभाग में 20 महीने तक महोबा समेत बुंदेलखंड के अन्य जिलों के 150 टीबी रोगियों पर किए गए शोध में पाया है कि 35 फीसदी शुगर रोगियों में सामान्य मरीजों की तुलना में टीबी ठीक होने की संभावना कम पाई गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इलाज पूरा होने के बाद भी शुगर स्तर अधिक बने रहने से एक तिहाई रोगी दोबारा टीबी की चपेट में पाए गए। डॉ. रामबाबू सिंह ने बताया कि इस शोध का प्रकाशन बीते माह इंटरनेशनल जर्नल्स ऑफ साइंस एंड रिसर्च में हो गया है। उन्होंने शोध निष्कर्षों को साझा करते हुए बताया कि शुगर का उच्च स्तर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। शुगर बढ़ने से सफेद रक्त कोशिकाएं कमजोर होती हैं। बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता घटती है। यही वजह है कि टीबी के जीवाणु मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस को दोबारा सक्रिय होने का मौका मिल जाता है। ऐसे में डायबिटीज को नियंत्रित रखना न केवल जरूरी है बल्कि टीबी से बचाव का अहम हथियार भी।
ऐसे किया गया शोध
टीबी रोगियों पर किए गए शोध में एक ग्रुप में शुगर पीड़ित 75 टीबी रोगियों को रखा तो दूसरे में टीबी के सामान्य 75 रोगियों को। दोनों ही ग्रुप के टीबी रोगियों का उपचार एकसाथ शुरू किया गया। छह महीने का पूरा कोर्स होने के बाद दोनों ग्रुप के रोगियों की जांच कराई गई। पता चला कि सामान्य टीबी रोगियों को संक्रमण से निजात मिल गई है। वहीं, शुगर का स्तर बढ़ा रहने की वजह से 35 फीसदी रोगियों में टीबी से निजात मिलने की कम संभावना मिली। इसके बाद जिन शुगर रोगियों को टीबी से राहत मिली, उनकी लगातार निगरानी की गई। इनमें से 33 फीसदी रोगियों को शुगर का स्तर ज्यादा बढ़ा रहने की वजह से फिर से टीबी का संक्रमण हो गया।
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मेडिसिन विभाग में 20 महीने तक महोबा समेत बुंदेलखंड के अन्य जिलों के 150 टीबी रोगियों पर किए गए शोध में पाया है कि 35 फीसदी शुगर रोगियों में सामान्य मरीजों की तुलना में टीबी ठीक होने की संभावना कम पाई गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इलाज पूरा होने के बाद भी शुगर स्तर अधिक बने रहने से एक तिहाई रोगी दोबारा टीबी की चपेट में पाए गए। डॉ. रामबाबू सिंह ने बताया कि इस शोध का प्रकाशन बीते माह इंटरनेशनल जर्नल्स ऑफ साइंस एंड रिसर्च में हो गया है। उन्होंने शोध निष्कर्षों को साझा करते हुए बताया कि शुगर का उच्च स्तर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। शुगर बढ़ने से सफेद रक्त कोशिकाएं कमजोर होती हैं। बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता घटती है। यही वजह है कि टीबी के जीवाणु मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस को दोबारा सक्रिय होने का मौका मिल जाता है। ऐसे में डायबिटीज को नियंत्रित रखना न केवल जरूरी है बल्कि टीबी से बचाव का अहम हथियार भी।
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ऐसे किया गया शोध
टीबी रोगियों पर किए गए शोध में एक ग्रुप में शुगर पीड़ित 75 टीबी रोगियों को रखा तो दूसरे में टीबी के सामान्य 75 रोगियों को। दोनों ही ग्रुप के टीबी रोगियों का उपचार एकसाथ शुरू किया गया। छह महीने का पूरा कोर्स होने के बाद दोनों ग्रुप के रोगियों की जांच कराई गई। पता चला कि सामान्य टीबी रोगियों को संक्रमण से निजात मिल गई है। वहीं, शुगर का स्तर बढ़ा रहने की वजह से 35 फीसदी रोगियों में टीबी से निजात मिलने की कम संभावना मिली। इसके बाद जिन शुगर रोगियों को टीबी से राहत मिली, उनकी लगातार निगरानी की गई। इनमें से 33 फीसदी रोगियों को शुगर का स्तर ज्यादा बढ़ा रहने की वजह से फिर से टीबी का संक्रमण हो गया।
