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Mahoba Ground Report: कभी सुनसान था गोरखनाथ गिरी, आज क्यों बढ़ रही है भीड़? पर्यटन और कारोबार पर लोगों की राय

Sat, 01 Aug 2026 05:14 PM IST
Rahul Kumar Tiwari अमर उजाला नेटवर्क, महोबा
अमर उजाला नेटवर्क, महोबा Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Sat, 01 Aug 2026 05:14 PM IST
सार

Mahoba Ground Report: यूपी सक्षम के अंतर्गत अमर उजाला की टीम कई जिलों से होते हुए महोबा पहुंची। इस दौरान पीतल उद्योग, ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्य, गोरखनाथ गिरी पर्वत आदि पर ग्राउंड पड़ताल की। और स्थानीय लोगों से से समझने की कोशीश की गई कि लोगों के जीवन में क्या कुछ बदलाव आया है। 

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Mahoba Ground Report Public opinion on Sijhari model panchayat and Gorakhnath Giri mountain also brass industr
Mahoba Ground Report - फोटो : अमर उजाला GFX

विस्तार

Mahoba Ground Report: यूपी सक्षम के तहत अमर उजाला की टीम महोबा पहुंची और जिले में हुए विकास कार्यों की जमीनी हकीकत को परखा। टीम ने मॉडल ग्राम पंचायत सिजहरी में हुए विकास कार्यों, गोरखनाथ गिरी पर्वत के जीर्णोद्धार और ओडीओपी योजना के तहत पीतल मूर्ति उद्योग को लेकर पड़ताल की। इस दौरान ग्रामीणों, कारीगरों, व्यवसायियों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की गई कि सरकारी योजनाओं का आम लोगों के जीवन पर कितना असर पड़ा है। ग्रामीण विकास, धार्मिक पर्यटन और पारंपरिक उद्योगों में आए बदलावों को समझने का प्रयास किया गया। आइए जानते हैं महोबा की इस ग्राउंड रिपोर्ट में विकास की तस्वीर कितनी बदली और जनता का इस पर क्या कहना है।

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सिजहरी बनी मॉडल ग्राम पंचायत
ग्रामीण भान सिंह राजपूत ने बताया कि सिजहरी गांव में पिछले कुछ वर्षों में कई विकास कार्य हुए हैं। गांव में सीसी रोड, पंचायत भवन समेत अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित होने से लोगों को काफी सहूलियत मिली है। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि श्मशान घाट, खेल मैदान और विवाह घर बनने से अब ग्रामीणों को अधिकांश सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध हो रही हैं। उनका कहना है कि पहले गांव में विकास कार्य सीमित थे, लेकिन अब तेजी से काम हो रहा है। यही वजह है कि महोबा जिले का सिजहरी गांव आज जिले की टॉप पंचायतों में शामिल है। गांव में मॉडल शॉप भी स्थापित की गई है।
हरिओम ने बताया कि गांव में लाइब्रेरी बनने से युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है। जो छात्र आर्थिक या अन्य कारणों से बाहर जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते, उन्हें अब गांव में ही अध्ययन की अच्छी सुविधा उपलब्ध हो रही है।
 
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गोरखनाथ गिरी पर्वत का हुआ जीर्णोद्धार
महोबा के गोरखनाथ गिरी पर्वत के जीर्णोद्धार और उसके बाद हुए बदलावों को लेकर स्थानीय लोगों से बातचीत की गई। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के बाद यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है और श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
गोरखनाथ गिरी पर्वत के सेवादार तारा पाटकर ने बताया कि वह महोबा के ही निवासी हैं और पिछले 15 वर्षों से यहां सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि करीब दस साल पहले लोग यहां आने से डरते थे, क्योंकि उस समय पर्वत क्षेत्र में अराजक तत्वों का जमावड़ा रहता था। लेकिन जीर्णोद्धार और विकास कार्यों के बाद यहां का माहौल पूरी तरह बदल गया है। अब बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।
 
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स्थानीय निवासी अनुराग कुमार पुरवार ने बताया कि योगी सरकार के कार्यकाल में गोरखनाथ गिरी पर्वत पर कई महत्वपूर्ण विकास कार्य हुए हैं। यहां योग केंद्र, सरोवर समेत अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं। इससे न केवल आसपास के ग्रामीणों को लाभ मिला है, बल्कि पर्यटकों की संख्या में भी पहले की तुलना में वृद्धि हुई है।
एक अन्य स्थानीय निवासी सिद्धि गोपाल ने बताया कि पहले यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर रास्ता भी नहीं था। अब सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था होने से लोगों का आना-जाना काफी आसान हो गया है। इन सुविधाओं के कारण गोरखनाथ गिरी पर्वत अब धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में अधिक आकर्षक बन गया है।
 



सरकारी मदद से कारीगरों की आय में हुआ इजाफा
महोबा की पहचान पीतल से बनी आकर्षक मूर्तियों के लिए भी है। इन पारंपरिक मूर्तियों को 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना में शामिल किए जाने के बाद स्थानीय कारीगरों और कारोबारियों को नई पहचान और आर्थिक मजबूती मिली है। इसे लेकर स्थानीय मूर्तिकारों और व्यवसायियों से बातचीत की गई।
मूर्तिकार रामसहाय सुंदर ने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों से पीतल की मूर्तियां बनाने का काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, ओडीओपी योजना के तहत ऋण सुविधा मिलने से कारोबार को नई गति मिली है। इससे उत्पादन बढ़ा है और पहले की तुलना में व्यवसाय बेहतर हुआ है।

मूर्ति कला व्यवसायी राम बाबू सोनी ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब यह पारंपरिक कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। लेकिन ओडीओपी योजना लागू होने के बाद कारीगरों में नई उम्मीद जगी और अब व्यवसाय फिर से रफ्तार पकड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से आधुनिक मशीनें और आर्थिक सहायता मिलने से काम आसान हुआ है। इसके साथ ही पहले की तुलना में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं, जिससे इस पारंपरिक शिल्प से जुड़े कई परिवारों को लाभ मिल रहा है।
 
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