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UP: पत्नी-बेटी के हत्यारोपी को मिली थी फांसी की सजा...सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा सुनवाई; 11 साल बाद बरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: अरुन पाराशर
Updated Thu, 15 Jan 2026 11:54 PM IST
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सार
पत्नी-बेटी की हत्या के मामले में आरोपी को 11 साल बाद बरी कर दिया गया। आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई थी। मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा सुनवाई हुई, जिसके बाद आरोपी को बरी कर दिया गया।
कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
मैनपुरी के गांव रूपपुर में 11 वर्ष पहले पत्नी और बेटी की हत्या के मामले में आरोपी सोबरन सिंह प्रजापति को संदेह का लाभ देते हुए स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट जयप्रकाश ने बरी कर दिया। आरोपी को वर्ष 2017 में अपर जिला जज ने फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा बरकरार रखी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नए सिर से मुकदमे की सुनवाई का आदेश दिया, जिसके बाद सोबरन बरी हो गया।
थाना करहल क्षेत्र के गांव रूपपुर में 29 जून 2014 की रात को ममता और उसकी बेटी सपना की हत्या कर दी गई थी। 30 जून को ममता के भाई रजनेश निवासी नगला पजाबा, थाना कोतवाली ने ममता के पति सोबरन सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने जांच कर चार्जशीट दाखिल की और मुकदमे की सुनवाई कर तत्कालीन अपर जिला जज प्रथम गुरुप्रीत सिंह बाबा ने सोबरन को दोषी करार देते हुए 01 मार्च 2017 को फांसी की सजा सुनाई और 25 हजार का जुर्माना लगाया था।
सजा के खिलाफ सोबरन सिंह ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपील की। न्यायमूर्ति ओमप्रकाश और संजय अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई करने के बाद 01 अक्तूबर 2018 को अपील खारिज कर अपर जिला जज की सुनाई फांसी की सजा बरकरार रखी लेकिन जुर्माना खत्म कर दिया। सोबरन ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संजय करोल व संदीप मेहता की खंडपीठ ने अपील मंजूर कर 4 फरवरी 2025 को मुकदमे की नए सिरे से सुनवाई करने का आदेश दिया। इस पर स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट जयप्रकाश के न्यायालय में मुकदमे की दोबारा सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सोबरन के पुत्र अंकुश की गवाही को न्यायालय ने अविश्वसनीय माना, इसी आधार पर संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी कर दिया गया। वह 11 साल बाद जेल से बाहर आया।
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थाना करहल क्षेत्र के गांव रूपपुर में 29 जून 2014 की रात को ममता और उसकी बेटी सपना की हत्या कर दी गई थी। 30 जून को ममता के भाई रजनेश निवासी नगला पजाबा, थाना कोतवाली ने ममता के पति सोबरन सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने जांच कर चार्जशीट दाखिल की और मुकदमे की सुनवाई कर तत्कालीन अपर जिला जज प्रथम गुरुप्रीत सिंह बाबा ने सोबरन को दोषी करार देते हुए 01 मार्च 2017 को फांसी की सजा सुनाई और 25 हजार का जुर्माना लगाया था।
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सजा के खिलाफ सोबरन सिंह ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपील की। न्यायमूर्ति ओमप्रकाश और संजय अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई करने के बाद 01 अक्तूबर 2018 को अपील खारिज कर अपर जिला जज की सुनाई फांसी की सजा बरकरार रखी लेकिन जुर्माना खत्म कर दिया। सोबरन ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संजय करोल व संदीप मेहता की खंडपीठ ने अपील मंजूर कर 4 फरवरी 2025 को मुकदमे की नए सिरे से सुनवाई करने का आदेश दिया। इस पर स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट जयप्रकाश के न्यायालय में मुकदमे की दोबारा सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सोबरन के पुत्र अंकुश की गवाही को न्यायालय ने अविश्वसनीय माना, इसी आधार पर संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी कर दिया गया। वह 11 साल बाद जेल से बाहर आया।
