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UP Bypoll: रिश्ते खत्म करने का वो पत्र...आखिर पांच साल पहले क्या हुआ? अनुजेश को लेकर ये क्या कह गए धर्मेन्द्र
ज्योत्यवेंद्र दुबे, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 28 Oct 2024 06:15 PM IST
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सार
Karhal By-Election 2024: मैनपुरी की करहल विधानसभा उपचुनाव में सियासत का रसूख ही नहीं, रिश्ते भी दांव पर लगे हुए हैं। सबसे बड़ा धर्म संकट सांसद धर्मेन्द्र यादव के सामने था, जिनके लिए एक तरह सगे जीजा अनुजेश यादव भाजपा से हैं, तो वहीं भतीजे तेज प्रताप सपा से चुनाव मैदान में हैं।
धर्मेन्द्र यादव और अनुजेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
करहल विधानसभा क्षेत्र के गांव शाहजहांपुर पहुंचे सांसद धर्मेंद्र यादव ने धैर्य से काम लिया। उन्होंने अपने सगे बहनोई और भाजपा प्रत्याशी अनुजेश पर निशाना तो साधा, लेकिन एक बार भी उनका नाम नहीं लिया। धर्मसंकट की स्थिति में धर्मेंद्र की वफादारी फिर एक बार रिश्तेदारी के प्रति नहीं बल्कि पार्टी के पक्ष में नजर आई।
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धर्मेंद्र की सगी बहन के पति हैं अनुजेश यादव
करहल उप चुनाव में भाजपा ने मुलायम सिंह यादव के दामाद और सांसद धर्मेंद्र यादव के सगे बहनोई अनुजेश सिंह को प्रत्याशी बनाया है। वहीं सपा से मुलायम के पौत्र तेजप्रताप यादव मैदान में हैं। 24 अक्तूबर को भाजपा की टिकट की घोषणा के बाद से ही हर किसी को सांसद धर्मेंद्र यादव के बयान का इंतजार था। ये समय उनके लिए किसी धर्मसंकट से कम नहीं था। अनुजेश उनकी सगी बहिन संध्या उर्फ बेबी यादव के पति हैं।
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तेज प्रताप के लिए की जनसभा
इसी बीच रविवार को घिरोर के गांव शाहजहांपुर में सांसद धर्मेंद्र यादव प्रत्याशी तेजप्रताप यादव के समर्थन में सभा करने पहुंचे। यहां जब उन्होंने माइक संभाला तो भाजपा और भाजपा के उम्मीदवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनका भाजपा के उम्मीदवार से कोई रिश्ता नहीं है। अपने संबोधन में वे धैर्य से काम लेते नजर आए।
ये भी पढ़ें - करहल उपचुनाव: 'रिश्तेदारी खत्म...पार्टी में कभी नहीं करेंगे शामिल', भाजपा प्रत्याशी अनुजेश पर बरसे शिवपाल सिंह
इसी बीच रविवार को घिरोर के गांव शाहजहांपुर में सांसद धर्मेंद्र यादव प्रत्याशी तेजप्रताप यादव के समर्थन में सभा करने पहुंचे। यहां जब उन्होंने माइक संभाला तो भाजपा और भाजपा के उम्मीदवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनका भाजपा के उम्मीदवार से कोई रिश्ता नहीं है। अपने संबोधन में वे धैर्य से काम लेते नजर आए।
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नहीं लिया अनुजेश का नाम
सांसद धर्मेंद्र ने एक बार भी अपने बहनोई अनुजेश यादव का नाम नहीं लिया। जब भी उन्हें संबोधित किया तो भाजपा के उम्मीदवार कहकर ही संबोधित किया। इससे एक बात तो साफ हो गई कि उनकी वफादारी रिश्तेदारी से ज्यादा समाजवादी पार्टी के प्रति है। सांसद ने अपने बहनोई या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम न लेकर संबंधों की गरिमा भी बनाए रखी।
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सांसद धर्मेंद्र ने एक बार भी अपने बहनोई अनुजेश यादव का नाम नहीं लिया। जब भी उन्हें संबोधित किया तो भाजपा के उम्मीदवार कहकर ही संबोधित किया। इससे एक बात तो साफ हो गई कि उनकी वफादारी रिश्तेदारी से ज्यादा समाजवादी पार्टी के प्रति है। सांसद ने अपने बहनोई या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम न लेकर संबंधों की गरिमा भी बनाए रखी।
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पांच साल पहले संबंध खत्म करने की बात दोहराई
सांसद धर्मेंद्र यादव ने मंच से फिर एक बार अपने बहनोई से पांच साल पहले ही रिश्तेदारी खत्म करने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि जब यहां के उम्मीदवार ने 2019 में भाजपा का दामन थामा था तभी उन्होंने रिश्ते खत्म करने का पत्र जारी कर दिया था। ऐसे में अब उनका कोई संबंध भाजपा के उम्मीदवार से नहीं है।
सांसद धर्मेंद्र यादव ने मंच से फिर एक बार अपने बहनोई से पांच साल पहले ही रिश्तेदारी खत्म करने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि जब यहां के उम्मीदवार ने 2019 में भाजपा का दामन थामा था तभी उन्होंने रिश्ते खत्म करने का पत्र जारी कर दिया था। ऐसे में अब उनका कोई संबंध भाजपा के उम्मीदवार से नहीं है।
