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Mainpuri News: प्लॉट में खुदाई के दौरान मिलीं दो प्राचीन जैन प्रतिमाएं
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फोटो 27 खुदाई में निकली प्रतिमाओं को देखते जैन समाज के लोग। संवाद
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भोगांव। मोहल्ला ऊपर टीला में एक प्लॉट में चल रहे निर्माणकार्य के दौरान खुदाई में पाषाण की दो प्राचीन जैन प्रतिमाएं और एक चरण पादुका निकली। इनकी ऊंचाई 6 से 7 इंच के करीब है। सूचना पर पहुंचे जैन समाज के लोगों ने दोनों प्रतिमाओं और चरण पादुका को श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विधि-विधान से विराजमान करा दिया।
प्लॉट पर निर्माणकार्य करा रहे रघुवीर सलूजा ने बताया कि नींव की खुदाई के लिए मजदूर गहरा गड्ढा खोद रहे थे तभी अचानक उनके औजार किसी कठोर वस्तु से टकराए। सावधानीपूर्वक मिट्टी हटाकर देखा तो प्रतिमाएं और चरण पादुका मिली। प्रतिमाओं में से एक पर तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का चिह्न बना हुआ है जबकि दूसरी प्रतिमा पर चिह्न मिट गया है। दोनों प्रतिमाओं पर निर्ग्रंथ दिगंबर भगवंत भी अंकित हैं। चरण पादुका पर भगवान के पवित्र चरण उत्कीर्ण हैं।
जैन समाज से जुड़े समाजसेवी डॉ. मनोज जैन ने दावा किया है कि भोगांव का प्राचीन नाम भूमिग्राम था और यह जैन धर्म की एक प्राचीन नगरी रही है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में यहां जैन राजा द्वारा स्थापित एक किला था जिसमें एक जैन मंदिर भी था। उसे बाद में मुगल शासन के दौरान ध्वस्त कर दिया गया था।
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श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
बुधवार को जैन धर्म के तेइसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण कल्याणक मोक्ष सप्तमी पर्व मनाया गया। श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर पर जैन धर्म की प्राचीनता और उसकी गहरी जड़ों का एक अद्भुत और अलौकिक दर्शन बताया। देर शाम जैन मंदिर में जिनेंद्र भक्ति का आयोजन किया गया। यहां श्रद्धालुओं ने खुदाई में निकली प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना की।
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प्लॉट पर निर्माणकार्य करा रहे रघुवीर सलूजा ने बताया कि नींव की खुदाई के लिए मजदूर गहरा गड्ढा खोद रहे थे तभी अचानक उनके औजार किसी कठोर वस्तु से टकराए। सावधानीपूर्वक मिट्टी हटाकर देखा तो प्रतिमाएं और चरण पादुका मिली। प्रतिमाओं में से एक पर तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का चिह्न बना हुआ है जबकि दूसरी प्रतिमा पर चिह्न मिट गया है। दोनों प्रतिमाओं पर निर्ग्रंथ दिगंबर भगवंत भी अंकित हैं। चरण पादुका पर भगवान के पवित्र चरण उत्कीर्ण हैं।
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जैन समाज से जुड़े समाजसेवी डॉ. मनोज जैन ने दावा किया है कि भोगांव का प्राचीन नाम भूमिग्राम था और यह जैन धर्म की एक प्राचीन नगरी रही है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में यहां जैन राजा द्वारा स्थापित एक किला था जिसमें एक जैन मंदिर भी था। उसे बाद में मुगल शासन के दौरान ध्वस्त कर दिया गया था।
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श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
बुधवार को जैन धर्म के तेइसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण कल्याणक मोक्ष सप्तमी पर्व मनाया गया। श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर पर जैन धर्म की प्राचीनता और उसकी गहरी जड़ों का एक अद्भुत और अलौकिक दर्शन बताया। देर शाम जैन मंदिर में जिनेंद्र भक्ति का आयोजन किया गया। यहां श्रद्धालुओं ने खुदाई में निकली प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना की।