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मैनपुरी हादसा: इकलाैते बेटे, पत्नी और बेटी की लाश देख फट पड़ा पिता का कलेजा, पांच बहनों के भी नहीं रुके आंसू
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Published by: Arun Parashar
Updated Thu, 19 Mar 2026 08:42 PM IST
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सार
विवाहित तीन बेटियां सहित सभी परिजन शवों से लिपट कर रोने लगे। दोपहर को तीनों शव खेत पर ले जाए गए। वहां एक पिता ने इकलौते बेटे और पुत्री को सीने से जुदा कर मिट्टी में दबा दिया और जीवन साथी रूबी की चिता को अग्नि दी। पत्नी व बच्चों को अंतिम विदाई देने के बाद वह अंत्येष्टि स्थल पर ही बैठा रहा।
मैनपुरी हादसा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
मैनपुरी में कुरावली के गांव आठपुरा में मंगलवार रात तेज धमाके के साथ एक मकान की कच्ची दीवार टिन शेड समेत नीचे सो रहे परिवार के लोगों पर गिर गई थी। आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने जब तक मलबा हटाया, एक महिला और उसके दो बच्चों की मौत हो चुकी थी।
मां-बेटे और बेटी का शव गांव पहुंचा तो चीखपुकार मच गई। अपनों के शवों को देख घर का मुखिया ब्रजेश बिखल पड़ा। खूब रोया। मां, बहन और इकलौते भाई को खोने का दर्द पांच बहनों के चेहरों पर भी नजर आया। ग्रामीणों के चेहरे भी भावुक नजर आए।
ब्रजेश का एक हंसता खेलता परिवार था, तीन विवाहित बेटियां हर सुख-दुख में साथ खड़ी थीं, तीन छोटी बेटियां और आठ साल का बेटा दिलीप घर के आंगन में खुशियां बिखेर रहा था। आर्थिक हालत भले ही अच्छे नहीं थे लेकिन ब्रजेश पत्नी बच्चों के साथ जिंदादिली से जी रहा था। मंगलवार रात कच्ची दीवार और टिनशेड के नीचे दबकर पत्नी रूबी, आठ वर्षीय पुत्र दिलीप और 13 वर्षीय पुत्री बेबी ने दम तोड़ दिया।
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मां-बेटे और बेटी का शव गांव पहुंचा तो चीखपुकार मच गई। अपनों के शवों को देख घर का मुखिया ब्रजेश बिखल पड़ा। खूब रोया। मां, बहन और इकलौते भाई को खोने का दर्द पांच बहनों के चेहरों पर भी नजर आया। ग्रामीणों के चेहरे भी भावुक नजर आए।
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ब्रजेश का एक हंसता खेलता परिवार था, तीन विवाहित बेटियां हर सुख-दुख में साथ खड़ी थीं, तीन छोटी बेटियां और आठ साल का बेटा दिलीप घर के आंगन में खुशियां बिखेर रहा था। आर्थिक हालत भले ही अच्छे नहीं थे लेकिन ब्रजेश पत्नी बच्चों के साथ जिंदादिली से जी रहा था। मंगलवार रात कच्ची दीवार और टिनशेड के नीचे दबकर पत्नी रूबी, आठ वर्षीय पुत्र दिलीप और 13 वर्षीय पुत्री बेबी ने दम तोड़ दिया।
हादसे में पल्लवी और गुड़िया भी घायल हो गईं थी। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शाम को मां-बेटे और बेटी का शव गांव पहुंचा तो परिजन में चीखपुकार मच गई। विवाहित तीन बेटियां सहित सभी परिजन शवों से लिपट कर रोने लगे। बृहस्पतिवार दोपहर को तीनों शव खेत पर ले जाए गए। वहां एक पिता ने इकलौते बेटे और पुत्री को सीने से जुदा कर मिट्टी में दबा दिया और जीवन साथी रूबी की चिता को अग्नि दी। पत्नी व बच्चों को अंतिम विदाई देने के बाद वह अंत्येष्टि स्थल पर ही बैठा रहा।
कहानी सुनाने की जिद करता था दिलीप
पिता ब्रजेश छह बीघा खेत व पंचर की दुकान से जो भी कुछ कमाते थे, उसे बच्चों की बेहतर परवरिश में खर्च करते थे। थक हार कर जब घर आते थे, तब इकलौता बेटा दरवाजे पर इंतजार करता नजर आता था। पिता भी उसे देख कर दिन भर की थकान भूल जाते थे, रात होते ही सोने के समय पिता से कहानी सुनाने की मांग करता था। एक रात ने ब्रजेश का हंसता खेलता परिवार उजाड़ कर रख दिया।
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कहानी सुनाने की जिद करता था दिलीप
पिता ब्रजेश छह बीघा खेत व पंचर की दुकान से जो भी कुछ कमाते थे, उसे बच्चों की बेहतर परवरिश में खर्च करते थे। थक हार कर जब घर आते थे, तब इकलौता बेटा दरवाजे पर इंतजार करता नजर आता था। पिता भी उसे देख कर दिन भर की थकान भूल जाते थे, रात होते ही सोने के समय पिता से कहानी सुनाने की मांग करता था। एक रात ने ब्रजेश का हंसता खेलता परिवार उजाड़ कर रख दिया।
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