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Mathura News: निरीक्षण में हुआ हंगाम, सीएचओ व चिकित्सा अधीक्षक आए आमने-सामने
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बरसाना। नंदगांव चौकी क्षेत्र के गांव संकेत स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में निरीक्षण के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और चिकित्सा अधीक्षक के बीच विवाद हो गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दोनों अधिकारियों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार 28 जुलाई को सुबह करीब 11:46 बजे सीएचसी बरसाना के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रमादित्य चौधरी और ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक प्रेम प्रकाश निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। सीएचओ तरुण शर्मा ने आरोप लगाया कि चिकित्सा अधीक्षक का व्यवहार धमकाने वाला था। उन्होंने बताया कि केंद्र से बाहर निकलते समय उनके साथ गाली-गलौज की गई, मोबाइल फोन छीनने का प्रयास किया और धक्का-मुक्की की गई। सीएचओ ने दावा किया कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है। उन्होंने फुटेज सुरक्षित रखने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सीएचओ ने आरोप लगाया है कि एनक्वास प्रमाणन की तैयारियों के लिए केंद्र की मरम्मत का खर्च उनसे निजी तौर पर कराने का दबाव बनाया जा रहा था। जन आरोग्य समिति के बजट से भुगतान की बात कहने पर अधिकारियों का रवैया बिगड़ गया। उन्होंने पिछले दस माह से मानसिक उत्पीड़न और नौकरी से हटाने की धमकी का भी आरोप लगाया। दूसरी ओर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रमादित्य चौधरी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सीएचओ निरीक्षण के समय मौजूद नहीं थे। उन्होंने फोन करके बुलाया गया। उन्होंने कार्य में बाधा डाली और अभद्र व्यवहार किया। डॉ. चौधरी ने सीएचओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और वेतन बाधित करने की संस्तुति की है।
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जानकारी के अनुसार 28 जुलाई को सुबह करीब 11:46 बजे सीएचसी बरसाना के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रमादित्य चौधरी और ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक प्रेम प्रकाश निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। सीएचओ तरुण शर्मा ने आरोप लगाया कि चिकित्सा अधीक्षक का व्यवहार धमकाने वाला था। उन्होंने बताया कि केंद्र से बाहर निकलते समय उनके साथ गाली-गलौज की गई, मोबाइल फोन छीनने का प्रयास किया और धक्का-मुक्की की गई। सीएचओ ने दावा किया कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है। उन्होंने फुटेज सुरक्षित रखने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
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सीएचओ ने आरोप लगाया है कि एनक्वास प्रमाणन की तैयारियों के लिए केंद्र की मरम्मत का खर्च उनसे निजी तौर पर कराने का दबाव बनाया जा रहा था। जन आरोग्य समिति के बजट से भुगतान की बात कहने पर अधिकारियों का रवैया बिगड़ गया। उन्होंने पिछले दस माह से मानसिक उत्पीड़न और नौकरी से हटाने की धमकी का भी आरोप लगाया। दूसरी ओर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रमादित्य चौधरी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सीएचओ निरीक्षण के समय मौजूद नहीं थे। उन्होंने फोन करके बुलाया गया। उन्होंने कार्य में बाधा डाली और अभद्र व्यवहार किया। डॉ. चौधरी ने सीएचओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और वेतन बाधित करने की संस्तुति की है।
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