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Mathura News: जोखिम में नौनिहालों की जान, अनफिट दौड़ रहे स्कूली वाहन
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बस के साथ एआरटीओ सत्येंद्र सिंह व टीम।
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मथुरा। जनपद की सड़कों पर दौड़ रही स्कूली बसें और वैन बच्चों के लिए सफर नहीं बल्कि जोखिम बनती जा रही हैं। नियमों को ताक पर रखकर बिना फिटनेस और मानकों के विपरीत बसों का संचालन हो रहा है, लेकिन परिवहन विभाग चेकिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है।
अधिकांश व्यावसायिक वाहन, विशेषकर स्कूल बसें और ऑटो, अपनी निर्धारित फिटनेस अवधि पार कर चुके हैं। इन वाहनों के इंजन, ब्रेक, टायर और अन्य कलपुर्जे जर्जर हालत में हैं। ऐसे वाहनों के चलने से दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। खासकर स्कूली बसों की स्थिति चिंताजनक है, जिनमें न केवल बच्चों की सुरक्षा बल्कि उनके भविष्य को भी दांव पर लगाया जा रहा है। बच्चों को ऐसे वाहनों में स्कूल भेजा जा रहा है, जिनकी फिटनेस की कोई गारंटी नहीं है। बुधवार को बरेली-जयपुर हाईवे पर स्कूली वाहन में लगी आग इसका जीता जागता उदाहरण है। शॉर्ट सर्किट से बस में आग गली गई थी, इसमें सवार 38 छात्र-छात्राओं को बाल-बाल जान बची थी। हादसे के बाद जिम्मेदार जागे और मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया। एआरटीओ सतेंद्र सिंह का कहना कि चेकिंग अभियान चलाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। स्कूल संचालकों को वाहनों की फिटनेस के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। निर्धारित समय से स्कूली वाहनों की फिटनेस नहीं कराई तो कार्रवाई की जाएगी।
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परिवहन विभाग की निष्क्रियता, चेकिंग के नाम पर दिखावा
परिवहन विभाग द्वारा नियमित रूप से फिटनेस जांच के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है। चेकिंग के नाम पर अक्सर खानापूर्ति होती है, जहां कुछ वाहनों को रोककर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। असली समस्या उन अनफिट वाहनों की है जो विभाग की नजरों से बचकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नियमों के अनुसार, हर वाहन को एक निश्चित अवधि के बाद फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है, लेकिन कई वाहन बिना प्रमाण पत्र के ही चल रहे हैं। बावजूद इसके कार्रवाई सिफर है।
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परिवहन विभाग की निष्क्रियता, चेकिंग के नाम पर दिखावा
परिवहन विभाग द्वारा नियमित रूप से फिटनेस जांच के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है। चेकिंग के नाम पर अक्सर खानापूर्ति होती है, जहां कुछ वाहनों को रोककर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। असली समस्या उन अनफिट वाहनों की है जो विभाग की नजरों से बचकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नियमों के अनुसार, हर वाहन को एक निश्चित अवधि के बाद फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है, लेकिन कई वाहन बिना प्रमाण पत्र के ही चल रहे हैं। बावजूद इसके कार्रवाई सिफर है।