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Mau News: खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण और डस्टबिन के भुगतान में 20.14 लाख का नहीं मिला हिसाब
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परदहां ब्लॉक के हरपुर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के लिए किए गए 20.14 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिल पाया है। इसकी डीएम द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है।
गांव निवासी भगत सिंह की शिकायत पर जिला कृषि अधिकारी और जल निगम के अवर अभियंता के नेतृत्व में गठित टीम ने 12 नवंबर 2025 को पहुंचकर विकास कार्यों की स्थलीय और अभिलेखीय जांच की थी।
कई कार्य ऐसे पाए गए जो हुए ही नहीं और कागज पर ही कराकर भुगतान करा लिया गया है। भगत सिंह ने 25 फरवरी 2025 को डीएम को शपथपत्र देकर शिकायत किया था कि ग्राम सचिव और प्रधान द्वारा विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का फर्जी तरीके से भुगतान कराया गया है।
शिकायत के साथ ही कई साक्ष्य प्रस्तुत कर जांच कर कार्रवाई की मांग की थी। डीएम ने टीम गठित कर जांच का आदेश दिया था। जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में टीम 12 नवंबर 2025 की दोपहर गांव में पहुंची।
उस दौरान वहां ग्राम प्रधान, प्रधान पति श्रीकांत सिंह, ग्राम सचिव अनुपमा सिंह, शिकायतकर्ता भगत सिंह ग्रामीण मौजूद थे। जांच में पाया गया कि ग्राम प्रधान के खाते में विधि विरुद्ध 80 हजार 936 रुपये भुगतान किया गया।
ये राशि मिस्त्री मजदूरों को भुगतान करना दिखाया गया, जिसका ठोस सबूत नहीं मिला। पिच रोड से तेजू सिंह के घर तक 15 मीटर लंबा छह मीटर चौड़ा इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण में तीन लाख 67 हजार 700 रुपये खर्च दिखाया गया, जो व्यक्तिगत कार्य है।
इसमें 2.40 लाख रुपये ईंट में खर्च दर्शाया गया था। जांच में पता चला कि सरकारी फाइल में एक लाख 49 हजार 588 रुपये का ही ईंट लगेगा, इसमें 93 हजार 418 रुपये गबन की पुष्टि होती है। एक डस्टबिन का मूल्य 2665 रुपये है।
कागज में 25 लोगों को 40 डस्टबिन देने और इसके लिए एक लाख 83 हजार 200 भुगतान दिखाया गया था। लेकिन वास्तविक मूल्य एक लाख छह हजार 600 रुपये है। इसी तरह हरपुर पिच रोड से सोम्मर के घर तक बिना खड़ंजा और नाली निर्माण के लिए 4 लाख 81 हजार 447 रुपये खर्च करने की पुष्टि हुई है।
पिच रोड से जोधी के घर तक नाली का निर्माण दिखाकर तीन लाख 96 हजार 125 रुपये खर्च दिखाया गया। जांच में नाली का निर्माण आधा मिला, इस तरह इस कार्य में एक लाख 98 हजार 60 रुपये गबन की पुष्टि होती है।
इसी तरह मोती के घर से रामरतन के खेत तक इंटरलॉकिंग दिखाकर तीन लाख 82 हजार 300 रुपये खर्च किया गया है। इसमें कागजों की हेराफेरी कर एक लाख 62 हजार 330 रुपये गबन कर लिया गया।
इंटरलॉकिंग निर्माण में 2.25 लाख और 1.80 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। उपलब्ध कराई गई पत्रावली में बाउचर का मीजरमेंट बुक से धनराशि का मिलान नहीं हुआ। इस बिंदु पर प्रधान और सचिव ने गोल मोल जवाब दिया।
इस मामले में 4.05 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिला और भुगतान गलत पाया गया। इंटरलॉकिंग कार्य पर ईंट के लिए 2.13 लाख रुपये, बालू सीमेंट के लिए 1.14 लाख रुपये और मजदूरी के लिए 44 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। बिल और बाउचर से मिलान करने पर भुगतान की पुष्टि नहीं हुई और गलत पाया गया।
क्षेत्र पंचायत द्वारा बनवाई गई सड़क पर करा लिया 3.17 लाख का भुगतान
जांच में पुष्टि हुई कि हरपुर प्राथमिक विद्यालय से चंदन के घर तक इंटरलॉकिंग कार्य पर 3.17 रुपये का भुगतान कराया गया है। जबकि ये कार्य प्राथमिक विद्यालय से कुशमौर ग्राम पंचायत की सरहद तक कराया गया है। इसके बीच में चंदन का घर पड़ता है। इस कार्य पर 20 मार्च 2023 को ही क्षेत्र पंचायत से 8.55 लाख रुपये भुगतान करा लिया गया था। प्रधान और सचिव ने जांच के दौरान कोई भी बिल बाउचर उपलब्ध नहीं कराया गया, जो गलत भुगतान की ओर इशारा कर रहा है।
हरपुर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। कुछ कार्यों का भुगतान संदेहजनक है। परीक्षण पूरी होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-कुमार अमरेंद्र, डीपीआरओ, मऊ
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गांव निवासी भगत सिंह की शिकायत पर जिला कृषि अधिकारी और जल निगम के अवर अभियंता के नेतृत्व में गठित टीम ने 12 नवंबर 2025 को पहुंचकर विकास कार्यों की स्थलीय और अभिलेखीय जांच की थी।
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कई कार्य ऐसे पाए गए जो हुए ही नहीं और कागज पर ही कराकर भुगतान करा लिया गया है। भगत सिंह ने 25 फरवरी 2025 को डीएम को शपथपत्र देकर शिकायत किया था कि ग्राम सचिव और प्रधान द्वारा विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का फर्जी तरीके से भुगतान कराया गया है।
शिकायत के साथ ही कई साक्ष्य प्रस्तुत कर जांच कर कार्रवाई की मांग की थी। डीएम ने टीम गठित कर जांच का आदेश दिया था। जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में टीम 12 नवंबर 2025 की दोपहर गांव में पहुंची।
उस दौरान वहां ग्राम प्रधान, प्रधान पति श्रीकांत सिंह, ग्राम सचिव अनुपमा सिंह, शिकायतकर्ता भगत सिंह ग्रामीण मौजूद थे। जांच में पाया गया कि ग्राम प्रधान के खाते में विधि विरुद्ध 80 हजार 936 रुपये भुगतान किया गया।
ये राशि मिस्त्री मजदूरों को भुगतान करना दिखाया गया, जिसका ठोस सबूत नहीं मिला। पिच रोड से तेजू सिंह के घर तक 15 मीटर लंबा छह मीटर चौड़ा इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण में तीन लाख 67 हजार 700 रुपये खर्च दिखाया गया, जो व्यक्तिगत कार्य है।
इसमें 2.40 लाख रुपये ईंट में खर्च दर्शाया गया था। जांच में पता चला कि सरकारी फाइल में एक लाख 49 हजार 588 रुपये का ही ईंट लगेगा, इसमें 93 हजार 418 रुपये गबन की पुष्टि होती है। एक डस्टबिन का मूल्य 2665 रुपये है।
कागज में 25 लोगों को 40 डस्टबिन देने और इसके लिए एक लाख 83 हजार 200 भुगतान दिखाया गया था। लेकिन वास्तविक मूल्य एक लाख छह हजार 600 रुपये है। इसी तरह हरपुर पिच रोड से सोम्मर के घर तक बिना खड़ंजा और नाली निर्माण के लिए 4 लाख 81 हजार 447 रुपये खर्च करने की पुष्टि हुई है।
पिच रोड से जोधी के घर तक नाली का निर्माण दिखाकर तीन लाख 96 हजार 125 रुपये खर्च दिखाया गया। जांच में नाली का निर्माण आधा मिला, इस तरह इस कार्य में एक लाख 98 हजार 60 रुपये गबन की पुष्टि होती है।
इसी तरह मोती के घर से रामरतन के खेत तक इंटरलॉकिंग दिखाकर तीन लाख 82 हजार 300 रुपये खर्च किया गया है। इसमें कागजों की हेराफेरी कर एक लाख 62 हजार 330 रुपये गबन कर लिया गया।
इंटरलॉकिंग निर्माण में 2.25 लाख और 1.80 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। उपलब्ध कराई गई पत्रावली में बाउचर का मीजरमेंट बुक से धनराशि का मिलान नहीं हुआ। इस बिंदु पर प्रधान और सचिव ने गोल मोल जवाब दिया।
इस मामले में 4.05 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिला और भुगतान गलत पाया गया। इंटरलॉकिंग कार्य पर ईंट के लिए 2.13 लाख रुपये, बालू सीमेंट के लिए 1.14 लाख रुपये और मजदूरी के लिए 44 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। बिल और बाउचर से मिलान करने पर भुगतान की पुष्टि नहीं हुई और गलत पाया गया।
क्षेत्र पंचायत द्वारा बनवाई गई सड़क पर करा लिया 3.17 लाख का भुगतान
जांच में पुष्टि हुई कि हरपुर प्राथमिक विद्यालय से चंदन के घर तक इंटरलॉकिंग कार्य पर 3.17 रुपये का भुगतान कराया गया है। जबकि ये कार्य प्राथमिक विद्यालय से कुशमौर ग्राम पंचायत की सरहद तक कराया गया है। इसके बीच में चंदन का घर पड़ता है। इस कार्य पर 20 मार्च 2023 को ही क्षेत्र पंचायत से 8.55 लाख रुपये भुगतान करा लिया गया था। प्रधान और सचिव ने जांच के दौरान कोई भी बिल बाउचर उपलब्ध नहीं कराया गया, जो गलत भुगतान की ओर इशारा कर रहा है।
हरपुर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। कुछ कार्यों का भुगतान संदेहजनक है। परीक्षण पूरी होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-कुमार अमरेंद्र, डीपीआरओ, मऊ