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Mau News: अब होगा 6 बेड का जिला अस्पताल का आईसीयू वार्ड
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जिला अस्पताल स्थित आईसीयू में भर्ती मरीज।संवाद
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जिला अस्पताल में आईसीयू वार्ड की क्षमता सात माह में तीसरी बार बढ़ाई जाएगी। यह निर्णय जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण लिया गया है।
डॉक्टर डे पर तीन दशक बाद खुलने वाले आईसीयू वार्ड की प्रारंभिक क्षमता दो थी, जिसे बाद में चार कर दिया गया। फरवरी से अब तक हार्ट अटैक के बीस से अधिक गंभीर मरीज जिला अस्पताल में भर्ती होने पर इसकी संख्या में एक बार फिर वृद्धि करने की योजना शुरू कर दी गई है।
तीन दशक बाद शुरू हुए जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में क्षमता से अधिक मरीज भर्ती हो रहे हैं। हालात यह हैं कि शुरू होने के केवल सात माह में ही चार बेड वाले आईसीयू वार्ड में 400 से अधिक मरीज भर्ती हो चुके हैं।
इसे देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने आईसीयू वार्ड में दो और बेड बढ़ाने का निर्णय लिया है। सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि फरवरी माह से अब तक हार्ट अटैक के 35 मामले आए हैं, जिनमें 15 मरीजों की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया।
लगातार बढ़ रहे मरीजों की संख्या को देखते हुए दो बेड बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है। बताया गया कि 100 बेड के जिला अस्पताल में एक दशक पहले आईसीयू भवन ब्लड बैंक के बगल में बना दिया गया था, लेकिन इसका संचालन शुरू नहीं हो सका।
कोरोना काल में दो वेंटिलेटर पीएम केयर फंड से अस्पताल को मिले, लेकिन मानव संसाधन की कमी के कारण यह शोपीस बना रहा। काफी प्रयासों के बाद 1 जुलाई 2025 को डॉक्टर डे पर जिला अस्पताल में चार बेड वाले आईसीयू वार्ड का शुभारंभ दो वेंटिलेटर के साथ किया गया था।
जुलाई से अब तक इस चार बेड वाले आईसीयू वार्ड में 45 मरीज भर्ती हो चुके हैं। लेकिन चार बेड होने के बावजूद मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण यह वार्ड छोटा पड़ने लगा है। अस्पताल प्रबंधन ने सटे हुए वार्ड के चार कक्षों को आईसीयू में तब्दील कर यहां चार और बेड बढ़ाने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है।
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भर्ती होने वालों में 70 फीसदी मरीज हार्ट अटैक और हाई बीपी के
आईसीयू वार्ड के प्रभारी और सीनियर फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों में 70 फीसदी मरीज इमरजेंसी में आने वाले हार्ट अटैक और हाई बीपी के हैं। उन्होंने कहा कि रेफर किए जाने वाले मरीजों की संख्या में 40 फीसदी की कमी आई है और गंभीर रूप से घायल मरीजों को ही रेफर किया जा रहा है। आईसीयू के संचालन की तैयारी काफी समय से चल रही थी। संबंधित डॉक्टरों को पहले ही लखनऊ में प्रशिक्षण दिया गया, जबकि डॉ. शैलेश कुशवाह और डॉ. रमेश यादव को पीजीआई आजमगढ़ में प्रशिक्षण प्राप्त कराया गया।
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रोज तीन से चार मरीज गंभीर हालत में होते हैं रेफर
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना लगभग 1000 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अब तक सरकारी अस्पताल में आईसीयू की सुविधा न होने के कारण तीन से चार मरीज गंभीर हालत में रेफर होते थे। आईसीयू सुविधा उपलब्ध होने से अब हार्ट अटैक, सांस लेने में समस्या, सड़क दुर्घटना में घायल या गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बीएचयू या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ रहा।
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डॉक्टर डे पर तीन दशक बाद खुलने वाले आईसीयू वार्ड की प्रारंभिक क्षमता दो थी, जिसे बाद में चार कर दिया गया। फरवरी से अब तक हार्ट अटैक के बीस से अधिक गंभीर मरीज जिला अस्पताल में भर्ती होने पर इसकी संख्या में एक बार फिर वृद्धि करने की योजना शुरू कर दी गई है।
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तीन दशक बाद शुरू हुए जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में क्षमता से अधिक मरीज भर्ती हो रहे हैं। हालात यह हैं कि शुरू होने के केवल सात माह में ही चार बेड वाले आईसीयू वार्ड में 400 से अधिक मरीज भर्ती हो चुके हैं।
इसे देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने आईसीयू वार्ड में दो और बेड बढ़ाने का निर्णय लिया है। सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि फरवरी माह से अब तक हार्ट अटैक के 35 मामले आए हैं, जिनमें 15 मरीजों की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया।
लगातार बढ़ रहे मरीजों की संख्या को देखते हुए दो बेड बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है। बताया गया कि 100 बेड के जिला अस्पताल में एक दशक पहले आईसीयू भवन ब्लड बैंक के बगल में बना दिया गया था, लेकिन इसका संचालन शुरू नहीं हो सका।
कोरोना काल में दो वेंटिलेटर पीएम केयर फंड से अस्पताल को मिले, लेकिन मानव संसाधन की कमी के कारण यह शोपीस बना रहा। काफी प्रयासों के बाद 1 जुलाई 2025 को डॉक्टर डे पर जिला अस्पताल में चार बेड वाले आईसीयू वार्ड का शुभारंभ दो वेंटिलेटर के साथ किया गया था।
जुलाई से अब तक इस चार बेड वाले आईसीयू वार्ड में 45 मरीज भर्ती हो चुके हैं। लेकिन चार बेड होने के बावजूद मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण यह वार्ड छोटा पड़ने लगा है। अस्पताल प्रबंधन ने सटे हुए वार्ड के चार कक्षों को आईसीयू में तब्दील कर यहां चार और बेड बढ़ाने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है।
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भर्ती होने वालों में 70 फीसदी मरीज हार्ट अटैक और हाई बीपी के
आईसीयू वार्ड के प्रभारी और सीनियर फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों में 70 फीसदी मरीज इमरजेंसी में आने वाले हार्ट अटैक और हाई बीपी के हैं। उन्होंने कहा कि रेफर किए जाने वाले मरीजों की संख्या में 40 फीसदी की कमी आई है और गंभीर रूप से घायल मरीजों को ही रेफर किया जा रहा है। आईसीयू के संचालन की तैयारी काफी समय से चल रही थी। संबंधित डॉक्टरों को पहले ही लखनऊ में प्रशिक्षण दिया गया, जबकि डॉ. शैलेश कुशवाह और डॉ. रमेश यादव को पीजीआई आजमगढ़ में प्रशिक्षण प्राप्त कराया गया।
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रोज तीन से चार मरीज गंभीर हालत में होते हैं रेफर
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना लगभग 1000 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अब तक सरकारी अस्पताल में आईसीयू की सुविधा न होने के कारण तीन से चार मरीज गंभीर हालत में रेफर होते थे। आईसीयू सुविधा उपलब्ध होने से अब हार्ट अटैक, सांस लेने में समस्या, सड़क दुर्घटना में घायल या गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बीएचयू या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ रहा।