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Mau News: 26 मई के बाद ग्राम पंचायतों बागडोर संभालेंगे प्रशासक, पूरा कराएंगे निर्माणाधीन कार्य
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मऊ। 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। अनुमान है कि प्रशासनिक अधिकारी ग्राम पंचायतों की बागडोर संभालेंगे। प्रधानों के कार्यकाल में छूटे अधूरे कार्य प्रशासक पूरा कराएंगे। बागडोर हाथ में लेने से पहले 15 साल पुराने बचे हुए विकास कार्यों का तेजी से ऑडिट कराया जा रहा है।
आठ मई को डीपीआरओ ने सभी एडीओ पंचायतों के साथ अपने कार्यालय में बैठक की थी। शनिवार तक 9 ब्लॉकों में बचे हुए 25 फीसदी ऑडिट पूरे कर लिए गए हैं। पहले सप्ताह में रानीपुर और रतनपुरा सहित चार ब्लाकों का ऑडिट हुआ है। ये ऐसे कार्य थे जिनका लेखा जोखा प्रधान और सचिव उपलब्ध नहीं करा पा रहे थे, या सालाना ऑडिट के दौरान इससे संबंधित अभिलेख नहीं जुटा पाए थे। पंचायत चुनाव के असमंजस के कारण गांवों के विकास के लिए हर साल मिलने वाले 106 करोड़ रुपये अभी रुके हुए हैं।
15वें वित्त आयोग से जिले की 645 ग्राम पंचायतों के लिए हर साल 52 करोड़ रुपये चार किश्तों में मिलते हैं। दूसरा टाइड फंड सशर्त अनुदान है, जो प्रधान को केवल विशिष्ट कार्यों के लिए दिया जाता है। इसका 50% हिस्सा पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और पुनर्चक्रण के लिए, जबकि शेष 50% हिस्सा स्वच्छता और ओडीएफ स्थिति के रखरखाव के लिए अनिवार्य रूप से खर्च करना होता है। 15 वें वित्त आयोग से अलग, राज्य सरकार पांचवें वित्त आयोग के माध्यम से सभी ग्राम पंचायतों को हर साल 54 करोड़ रुपये का अनुदान देती है। इस अनुदान से हर माह 645 ग्राम पंचायतों के लिए 4.33 करोड़ रुपये भेजे जाते हैं, जिन्हें प्रधान अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च कर सकते हैं। इस साल मिलने वाली पूरी धनराशि प्रशासक अपने अनुसार खर्च कर सकेंगे। पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वित्त आयोग भी बदल जाएंगे। अनुमान है कि इस सत्र से टाइड और अनटाइड फंड 16वें वित्त आयोग से जबकि राज्य सरकार द्वारा छठवें वित्त आयोग से बजट मिलेगा।
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इनसेट -
वित्तीय वर्ष में नहीं भेजी गई कार्ययोजना
पंचायत चुनाव के असमंजस के कारण डेढ़ माह बीतने के बाद भी अभी इस सत्र के लिए कार्ययोजना नहीं दी है। 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन राज्य चुनाव आयोग के 10 जून को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन के फैसले ने उम्मीदवारों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। इस वर्ष 22 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने वाली थी, लेकिन राज्य चुनाव आयोग ने पंचायतों की सूची में 5,512 डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान कर उन्हें सत्यापन के लिए भेजा। डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन का कार्य तीसरी बार बढ़ाया गया है। यह कदम पंचायत और नगरीय निकायों की सूची में विधानसभा सूची की तुलना में 3,61,588 अतिरिक्त मतदाताओं की वजह से लिया गया।
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कोट -
26 मई को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। अभी तक उनका कार्यकाल बढ़ाने का आदेश शासन की तरफ से नहीं मिला है। ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए प्रशासक नियुक्त होने की संभावना है। 23 या 24 मई को शासन से इससे संबंधित पत्र मिल सकता है। जिसके बाद बैठक करके प्रशासकों की नियुक्ति की जाएगी।
- कुमार अमरेंद्र, डीपीआरओ, मऊ
आठ मई को डीपीआरओ ने सभी एडीओ पंचायतों के साथ अपने कार्यालय में बैठक की थी। शनिवार तक 9 ब्लॉकों में बचे हुए 25 फीसदी ऑडिट पूरे कर लिए गए हैं। पहले सप्ताह में रानीपुर और रतनपुरा सहित चार ब्लाकों का ऑडिट हुआ है। ये ऐसे कार्य थे जिनका लेखा जोखा प्रधान और सचिव उपलब्ध नहीं करा पा रहे थे, या सालाना ऑडिट के दौरान इससे संबंधित अभिलेख नहीं जुटा पाए थे। पंचायत चुनाव के असमंजस के कारण गांवों के विकास के लिए हर साल मिलने वाले 106 करोड़ रुपये अभी रुके हुए हैं।
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15वें वित्त आयोग से जिले की 645 ग्राम पंचायतों के लिए हर साल 52 करोड़ रुपये चार किश्तों में मिलते हैं। दूसरा टाइड फंड सशर्त अनुदान है, जो प्रधान को केवल विशिष्ट कार्यों के लिए दिया जाता है। इसका 50% हिस्सा पेयजल आपूर्ति, जल संचयन और पुनर्चक्रण के लिए, जबकि शेष 50% हिस्सा स्वच्छता और ओडीएफ स्थिति के रखरखाव के लिए अनिवार्य रूप से खर्च करना होता है। 15 वें वित्त आयोग से अलग, राज्य सरकार पांचवें वित्त आयोग के माध्यम से सभी ग्राम पंचायतों को हर साल 54 करोड़ रुपये का अनुदान देती है। इस अनुदान से हर माह 645 ग्राम पंचायतों के लिए 4.33 करोड़ रुपये भेजे जाते हैं, जिन्हें प्रधान अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च कर सकते हैं। इस साल मिलने वाली पूरी धनराशि प्रशासक अपने अनुसार खर्च कर सकेंगे। पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वित्त आयोग भी बदल जाएंगे। अनुमान है कि इस सत्र से टाइड और अनटाइड फंड 16वें वित्त आयोग से जबकि राज्य सरकार द्वारा छठवें वित्त आयोग से बजट मिलेगा।
इनसेट -
वित्तीय वर्ष में नहीं भेजी गई कार्ययोजना
पंचायत चुनाव के असमंजस के कारण डेढ़ माह बीतने के बाद भी अभी इस सत्र के लिए कार्ययोजना नहीं दी है। 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन राज्य चुनाव आयोग के 10 जून को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन के फैसले ने उम्मीदवारों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। इस वर्ष 22 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने वाली थी, लेकिन राज्य चुनाव आयोग ने पंचायतों की सूची में 5,512 डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान कर उन्हें सत्यापन के लिए भेजा। डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन का कार्य तीसरी बार बढ़ाया गया है। यह कदम पंचायत और नगरीय निकायों की सूची में विधानसभा सूची की तुलना में 3,61,588 अतिरिक्त मतदाताओं की वजह से लिया गया।
कोट -
26 मई को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। अभी तक उनका कार्यकाल बढ़ाने का आदेश शासन की तरफ से नहीं मिला है। ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए प्रशासक नियुक्त होने की संभावना है। 23 या 24 मई को शासन से इससे संबंधित पत्र मिल सकता है। जिसके बाद बैठक करके प्रशासकों की नियुक्ति की जाएगी।
- कुमार अमरेंद्र, डीपीआरओ, मऊ