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Mau News: वाराणसी और लखनऊ का नहीं लगाया पड़ेगा चक्कर, कैंसर के मरीजों की जिले में ही होगी कीमोथेरेपी
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कोपागंज के टडियांव स्थित सौ बेड का अस्पताल। संवाद
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जनपद के कोपागंज स्थित 100 बेड वाले टड़ियांव अस्पताल में जल्द ही कैंसर डे केयर यूनिट की शुरुआत होगी। अस्पताल प्रशासन की तरफ से डे केयर यूनिट खोलने के लिए 10 बेड के कमरा को हैंडओवर कर दिया गया है।
अस्पताल के प्रथम तल पर यह डे केयर यूनिट खोली जाएगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कैंसर के मरीजों के प्राथमिक उपचार के तौर पर कीमोथेरेपी बेहद जरूरी होती है। जनपद में कैंसर के मरीजों को अभी तक उपचार के लिए लखनऊ, वाराणसी या गोरखपुर सहित सुदूर जनपद जाना पड़ता था।
कैंसर डे केयर यूनिट में चिकित्सक सहित करीब 10 स्टाफ की मौजूदगी रहेगी। टड़ियांव अस्पताल में कैंसर डे केयर यूनिट को खोलने के लिए बीते दिनों शासन से टीम आई थी। टीम सबसे पहले जिला अस्पताल में डे केयर यूनिट को खोलने के लिए सर्वे किया था।
अस्पताल की इमरजेंसी और ओपीडी भवन में कोई स्थाई जगह नहीं मिलने से टीम ने टड़ियांव अस्पताल का निरीक्षण किया। वहा दूसरे तल पर कमरा मिलने के बाद टीम ने उस पर मुहर लगा दिया है। अब आने वाले दिनों में लखनऊ से टीम आने के बाद सभी संसाधनों के साथ कैंसर के मरीजों की कीमोथेरेपी शुरु किया जाएगा।
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बढ़ सकती है बेड की संख्या
जनपद में पहली बार कैंसर डे केयर की शुुरुआत होने से स्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक ऐसे मरीजों का कोई डाटा नहीं है। आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या के आधार पर बेड की संख्या को बढ़ाया भी जा सकता है।
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जनपद में पहली बार हुई शुरुआत
कैंसर के मरीजों को डे केयर सेंटर के माध्यम से उपचारित करने के लिए जनपद में पहली बार शुरुआत की गई है। कैंसर के मरीज को संदेह होने पर गैर जनपद में उपचार कराना होता है। चिकित्सक की सलाह कीमोथेरेपी कराने के लिए भी लोग वाराणसी, लखनऊ या गोरखपुर सहित कई अनेक जगहाें पर जाते थे। अब जिले में कीमोथेरेपी होने से काफी सहूलियत मिलेगी।
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क्या होती है कीमोथेरेपी, कितना लगता है पैसा
कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कैंसर-रोधी दवाओं का उपयोग है। संयोजन चिकित्सा वह प्रक्रिया है जिसमें कई दवाएं एक साथ दी जाती हैं। कभी-कभी केवल एक ही दवा का उपयोग किया जाता है। कीमोथेरेपी का उपयोग सर्जरी या विकिरण चिकित्सा से पहले या बाद में, या विकिरण चिकित्सा के साथ किया जा सकता है। कीमोथेरेपी 38,000 से 1 लाख रुपये प्रति चक्र होती है। एक मरीज को दी जाने वाली कीमो की संख्या मरीज की स्थिति पर निर्भर करती है।
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टड़ियांव अस्पताल में कैंसर डे केयर यूनिट के लिए दूसरे तल पर दस बेड का कमरा दे दिया गया है। दवा के साथ अन्य उपचार के सभी संसाधन डे केयर यूनिट की टीम के माध्यम से होगा। जल्द ही चिकित्सक सहित अन्य सभी स्टाफ आने के बाद कीमोथेरेपी शुरु होगी। अब मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए गैर जनपद नहीं जाना होगा। - डॉ. दिनेश चंद्रा, सीएमएस टड़ियांव अस्पताल
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अस्पताल के प्रथम तल पर यह डे केयर यूनिट खोली जाएगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कैंसर के मरीजों के प्राथमिक उपचार के तौर पर कीमोथेरेपी बेहद जरूरी होती है। जनपद में कैंसर के मरीजों को अभी तक उपचार के लिए लखनऊ, वाराणसी या गोरखपुर सहित सुदूर जनपद जाना पड़ता था।
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कैंसर डे केयर यूनिट में चिकित्सक सहित करीब 10 स्टाफ की मौजूदगी रहेगी। टड़ियांव अस्पताल में कैंसर डे केयर यूनिट को खोलने के लिए बीते दिनों शासन से टीम आई थी। टीम सबसे पहले जिला अस्पताल में डे केयर यूनिट को खोलने के लिए सर्वे किया था।
अस्पताल की इमरजेंसी और ओपीडी भवन में कोई स्थाई जगह नहीं मिलने से टीम ने टड़ियांव अस्पताल का निरीक्षण किया। वहा दूसरे तल पर कमरा मिलने के बाद टीम ने उस पर मुहर लगा दिया है। अब आने वाले दिनों में लखनऊ से टीम आने के बाद सभी संसाधनों के साथ कैंसर के मरीजों की कीमोथेरेपी शुरु किया जाएगा।
बढ़ सकती है बेड की संख्या
जनपद में पहली बार कैंसर डे केयर की शुुरुआत होने से स्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक ऐसे मरीजों का कोई डाटा नहीं है। आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या के आधार पर बेड की संख्या को बढ़ाया भी जा सकता है।
जनपद में पहली बार हुई शुरुआत
कैंसर के मरीजों को डे केयर सेंटर के माध्यम से उपचारित करने के लिए जनपद में पहली बार शुरुआत की गई है। कैंसर के मरीज को संदेह होने पर गैर जनपद में उपचार कराना होता है। चिकित्सक की सलाह कीमोथेरेपी कराने के लिए भी लोग वाराणसी, लखनऊ या गोरखपुर सहित कई अनेक जगहाें पर जाते थे। अब जिले में कीमोथेरेपी होने से काफी सहूलियत मिलेगी।
क्या होती है कीमोथेरेपी, कितना लगता है पैसा
कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कैंसर-रोधी दवाओं का उपयोग है। संयोजन चिकित्सा वह प्रक्रिया है जिसमें कई दवाएं एक साथ दी जाती हैं। कभी-कभी केवल एक ही दवा का उपयोग किया जाता है। कीमोथेरेपी का उपयोग सर्जरी या विकिरण चिकित्सा से पहले या बाद में, या विकिरण चिकित्सा के साथ किया जा सकता है। कीमोथेरेपी 38,000 से 1 लाख रुपये प्रति चक्र होती है। एक मरीज को दी जाने वाली कीमो की संख्या मरीज की स्थिति पर निर्भर करती है।
टड़ियांव अस्पताल में कैंसर डे केयर यूनिट के लिए दूसरे तल पर दस बेड का कमरा दे दिया गया है। दवा के साथ अन्य उपचार के सभी संसाधन डे केयर यूनिट की टीम के माध्यम से होगा। जल्द ही चिकित्सक सहित अन्य सभी स्टाफ आने के बाद कीमोथेरेपी शुरु होगी। अब मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए गैर जनपद नहीं जाना होगा। - डॉ. दिनेश चंद्रा, सीएमएस टड़ियांव अस्पताल
