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Mau News: आदेश के बाद भी सचिवालयों पर नहीं दिखे लेखपाल, कहीं ठेला मिला तो कहीं चल रहा था टीकाकरण
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ग्राम पंचायत टेघना बन्द मिला
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ग्राम सचिवालयों पर पंचायत सहायकों के साथ लेखपालों की नियमित उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। शासन ने एक जुलाई को इसे लागू किया था, लेकिन आठवें दिन ही शासनादेश हवा-हवाई होता दिखा।
बुधवार को टीम ने जिले के नौ ब्लॉकों के 67 पंचायत भवनों पर पहुंचकर हकीकत की पड़ताल की। अधिकांश सचिवालय बंद मिले। कुछ जगहों पर खुले थे तो वहां एएनएम द्वारा दवाइयां वितरित की जा रही थीं।
लेखपालों के नहीं पहुंचने से खतौनी, वरासत सहित राजस्व कार्य कराने पहुंचे ग्रामीण निराश होकर लौटे। ग्रामीणों की सुविधा के लिए जिले में 99 करोड़ 66 लाख 25 हजार रुपये की लागत से 595 ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय बनाए गए हैं।
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यहां कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरा, इनवर्टर, टेबल, कुर्सी आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। जमीन नहीं मिलने और कहीं बजट के अभाव में 50 ग्राम पंचायतों में सचिवालय के भवन नहीं बन पाए हैं। इन ग्राम पंचायतों में अस्थायी सचिवालय संचालित हैं।
645 ग्राम पंचायतों में 107 ग्राम विकास अधिकारी और 617 पंचायत सहायकों की तैनाती है। टीम ने बड़राव ब्लॉक की 10 ग्राम पंचायतों में पहुंचकर पड़ताल की। टीम सुबह 11 बजे ग्राम पंचायत सरबहद बिरइचा में पहुंची।
वहां पंचायत सहायक अंकिता मौर्य मौजूद मिलीं, लेकिन लेखपाल अनुपस्थित रहे। यहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीकाकरण किया जा रहा था। सुबह 11:30 बजे बेलभद्रपुर के सचिवालय पर ताला लटका मिला।
बरामदे में ठेला, परिसर में बाइक और रोटावेटर रखे होने से अवैध कब्जे की भी स्थिति दिखाई दी। दोपहर 12:30 बजे ऊसरी खुर्द में स्वास्थ्य विभाग का टीकाकरण शिविर संचालित मिला।
मादी दुल्लह, टेघना, रेयांव, मुजार खुर्द, भटमिला, हड़हुआ और सोनाडीह में सचिवालयों पर ताला लगा था। मुहम्मदाबाद सिपाह में पंचायत भवन नहीं बनाया गया है। पुराना भवन जर्जर होने के कारण किसी कर्मचारी के बैठने का सही स्थान नहीं है।
ग्रामीण प्रशांत, रजनीश और शुभम ने बताया कि सचिवालयों में कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद पेंशन, प्रमाण पत्र और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उन्हें जनसेवा केंद्र, ब्लॉक या तहसील मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
रतनपुरा ब्लॉक के पहदेवाजीत स्थित मिनी सचिवालय में टीम सुबह 11:34 बजे, गाढ़ा सचिवालय पर 11:50 बजे, दतौड़ा सचिवालय पर 12:01 बजे और रतनपुरा ब्लॉक मुख्यालय के सचिवालय पर 12:18 बजे पहुंची थी। इन सभी जगहों पर ताला लटक रहा था।
कोपागंज ब्लॉक के लाड़नपुर सचिवालय में टीम 11:15 बजे पहुंची तो वहां एएनएम द्वारा दवा वितरित की जा रही थी। नौसेमर ग्राम पंचायत के सचिवालय पर 12 बजे पहुंचने पर वहां ताला बंद था और अंदर कुर्सियां भी नहीं दिख रही थीं।
प्रतिक्रिया-- -
पंचायत सचिवालयों पर कंप्यूटर, वाईफाई आदि की व्यवस्था होने के बाद भी प्रमाणपत्र और जरूरी अभिलेख नहीं मिल रहे हैं। शासन ने जब लेखपालों को गांव में बैठना अनिवार्य किया तो काफी राहत महसूस हुई थी कि काम आसानी से हो जाएंगे लेकिन लेखपाल सचिवालय पर नहीं आते हैं। -चंदन शाही, ऊसरी खुर्द
बुधवार को सचिवालय पर कई लोग राजस्व संबंधी मामलों को लेकर पहुंचे थे। लेकिन दोपहर दो बजे तक लेखपाल नहीं पहुंचे थे। सभी लोग निराश होकर लौट गए। उनके नहीं आने से जरूरी कागजात भी नहीं मिल पा रहे हैं। लंबी दूरी तय करके घोसी तहसील जाना पड़ता है। -जय हिंद सिंह, मादी सिपाह
कोट-- -
सचिवालय में लेखपालों के बैठने के संबंध में आदेशपत्र मिला है। सचिवालय में उन्हें बैठने के लिए जगह दी गई है। उनके बैठने की निगरानी राजस्व विभाग की है। सचिवालय भवन खुलने का समय सुबह 10 बजे है। जहां सचिवालय नहीं खुले थे, इसके संबंध में जवाब मांगा जाएगा। - किरन वर्मा, प्रभारी पंचायत राज अधिकारी, मऊ
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बुधवार को टीम ने जिले के नौ ब्लॉकों के 67 पंचायत भवनों पर पहुंचकर हकीकत की पड़ताल की। अधिकांश सचिवालय बंद मिले। कुछ जगहों पर खुले थे तो वहां एएनएम द्वारा दवाइयां वितरित की जा रही थीं।
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लेखपालों के नहीं पहुंचने से खतौनी, वरासत सहित राजस्व कार्य कराने पहुंचे ग्रामीण निराश होकर लौटे। ग्रामीणों की सुविधा के लिए जिले में 99 करोड़ 66 लाख 25 हजार रुपये की लागत से 595 ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय बनाए गए हैं।
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यहां कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरा, इनवर्टर, टेबल, कुर्सी आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। जमीन नहीं मिलने और कहीं बजट के अभाव में 50 ग्राम पंचायतों में सचिवालय के भवन नहीं बन पाए हैं। इन ग्राम पंचायतों में अस्थायी सचिवालय संचालित हैं।
645 ग्राम पंचायतों में 107 ग्राम विकास अधिकारी और 617 पंचायत सहायकों की तैनाती है। टीम ने बड़राव ब्लॉक की 10 ग्राम पंचायतों में पहुंचकर पड़ताल की। टीम सुबह 11 बजे ग्राम पंचायत सरबहद बिरइचा में पहुंची।
वहां पंचायत सहायक अंकिता मौर्य मौजूद मिलीं, लेकिन लेखपाल अनुपस्थित रहे। यहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीकाकरण किया जा रहा था। सुबह 11:30 बजे बेलभद्रपुर के सचिवालय पर ताला लटका मिला।
बरामदे में ठेला, परिसर में बाइक और रोटावेटर रखे होने से अवैध कब्जे की भी स्थिति दिखाई दी। दोपहर 12:30 बजे ऊसरी खुर्द में स्वास्थ्य विभाग का टीकाकरण शिविर संचालित मिला।
मादी दुल्लह, टेघना, रेयांव, मुजार खुर्द, भटमिला, हड़हुआ और सोनाडीह में सचिवालयों पर ताला लगा था। मुहम्मदाबाद सिपाह में पंचायत भवन नहीं बनाया गया है। पुराना भवन जर्जर होने के कारण किसी कर्मचारी के बैठने का सही स्थान नहीं है।
ग्रामीण प्रशांत, रजनीश और शुभम ने बताया कि सचिवालयों में कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद पेंशन, प्रमाण पत्र और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उन्हें जनसेवा केंद्र, ब्लॉक या तहसील मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
रतनपुरा ब्लॉक के पहदेवाजीत स्थित मिनी सचिवालय में टीम सुबह 11:34 बजे, गाढ़ा सचिवालय पर 11:50 बजे, दतौड़ा सचिवालय पर 12:01 बजे और रतनपुरा ब्लॉक मुख्यालय के सचिवालय पर 12:18 बजे पहुंची थी। इन सभी जगहों पर ताला लटक रहा था।
कोपागंज ब्लॉक के लाड़नपुर सचिवालय में टीम 11:15 बजे पहुंची तो वहां एएनएम द्वारा दवा वितरित की जा रही थी। नौसेमर ग्राम पंचायत के सचिवालय पर 12 बजे पहुंचने पर वहां ताला बंद था और अंदर कुर्सियां भी नहीं दिख रही थीं।
प्रतिक्रिया
पंचायत सचिवालयों पर कंप्यूटर, वाईफाई आदि की व्यवस्था होने के बाद भी प्रमाणपत्र और जरूरी अभिलेख नहीं मिल रहे हैं। शासन ने जब लेखपालों को गांव में बैठना अनिवार्य किया तो काफी राहत महसूस हुई थी कि काम आसानी से हो जाएंगे लेकिन लेखपाल सचिवालय पर नहीं आते हैं। -चंदन शाही, ऊसरी खुर्द
बुधवार को सचिवालय पर कई लोग राजस्व संबंधी मामलों को लेकर पहुंचे थे। लेकिन दोपहर दो बजे तक लेखपाल नहीं पहुंचे थे। सभी लोग निराश होकर लौट गए। उनके नहीं आने से जरूरी कागजात भी नहीं मिल पा रहे हैं। लंबी दूरी तय करके घोसी तहसील जाना पड़ता है। -जय हिंद सिंह, मादी सिपाह
कोट
सचिवालय में लेखपालों के बैठने के संबंध में आदेशपत्र मिला है। सचिवालय में उन्हें बैठने के लिए जगह दी गई है। उनके बैठने की निगरानी राजस्व विभाग की है। सचिवालय भवन खुलने का समय सुबह 10 बजे है। जहां सचिवालय नहीं खुले थे, इसके संबंध में जवाब मांगा जाएगा। - किरन वर्मा, प्रभारी पंचायत राज अधिकारी, मऊ

ग्राम पंचायत टेघना बन्द मिला