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Mau News: पेराई सत्र के 16 दिन पहले घोसी चीनी मिल हुई बंद, किसानों ने किया घेराव
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चीनी मिल परिसर में धरना देते किसान। संवाद
- फोटो : संवाद
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घोसी। शासन से शनिवार की देर शाम एक पत्र जारी हुआ। इसमें घोसी चीनी मिल को बंद करके शेष लक्ष्य की पेराई सठियावं मिल में करने का निर्णय लिया गया है। सूचना मिलने पर रविवार को सैकड़ों किसानों ने चीनी मिल का घेराव किया। आपसी मंत्रणा के बाद सठियावं मिल पर गन्ना पेराई का निर्णय लिया गया।
साथ ही किसानों को लंबी दूरी के चलते खर्च बचाने के लिए घोसी चीनी मिल को केंद्र बनाकर इसके ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी सठियावं चीनी मिल प्रबंधन की होगी। अगले दो दिनों तक घोषी चीनी मिल चालू रखकर कटी हुई पर्चियों के किसानों का गन्ना का पेराई किया जाएगा।
सुबह नौ बजे मिल के बंद होने और गन्ना किसानों को सठियांव चीनी मिल में स्थानांतरित करने के फैसले पर पूर्व ब्लाक प्रमुख डाॅ. सुजीत सिंह और अवधेश बागी के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन किया।
भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष मिथिलेश यादव ने कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। चेतावनी दी कि यदि मिल प्रबंधन अनदेखी करेगा, तो वे सड़क पर उतरेंगे।
वहीं सपा नेता सुजीत सिंह ने मिल प्रबंधन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे लूट का अड्डा बताया। काफी देर तक किसान चीनी मिल में धरने पर बैठे रहे।
इससे पहले दो घंटे के घेराव के बाद 11 बजे उपसभापति रजनीश राय के नेतृत्व में बोर्ड के पदाधिकारियों ने चीनी मिल के जीएम महेंद्र प्रसाद के साथ बैठक की। बोर्ड के डायरेक्टर करुणेश राय, अर्पित सिंह और अखिलेश सिंह ने जीएम पर मामले की जानकारी न देने का आरोप लगाया।
वहीं प्रबंधक से सभापति कक्ष में दोपहर 12 बजे वार्ता के बाद कोई निष्कर्ष नहीं निकलने पर पुनः गेस्ट हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए।
10 से 15 मिनट में छह बार वार्ता करने चीनी मिल के प्रबंधक महेंद्र प्रताप आए मगर किसानों ने किसी पर किसान सठियांव गन्ना ले जाने को तैयार नहीं थे। इस दौरान रामाश्रय राय, शिवचंद यादव, सुजीत सिंह, अवधेश बागी और संतोष सिंह,सुधीर यादव, अनिल यादव आदि उपस्थित रहे थे।
प्रबंधक महेंद्र प्रताप किसानों और नेताओं के सामने छह बार आए। उन्होंने दोपहर 1:45 बजे कहा कि 22 फरवरी तक किसानों को गन्ना लाने को लेकर पर्ची जारी है।
शेष अन्य किसानों के गन्ने को 23 से गन्ना समिति को अवगत कराया जाएगा। इसपर किसान एवं किसान नेताओं ने लिखित आश्वासन मांगा तो नहीं दिया। इसके पूर्व किसानों ने मांग की कि किसान मिल में किसानों के गन्ने का तौल की जाए तो भुगतान भी घोसी चीनी मिल से हो। इसपर मिल ने स्पष्ट किया कि तौल गन्ना समिति के अनुसार होगी और भुगतान सठियांव चीनी मिल की ओर से किया जाएगा।
किसानों ने तौल करने के दौरान घोसी से सठियांव मिल गन्ना ले जाने के किराये के रूप में कोई कटौती न की जाए। लेकिन किसी बात को जीएम लिखित रूप से देने से बचते रहे। इस संबंध में उनसे बात करने के लिए संपर्क किया लेकिन फोन नहीं उठाया।
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साथ ही किसानों को लंबी दूरी के चलते खर्च बचाने के लिए घोसी चीनी मिल को केंद्र बनाकर इसके ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी सठियावं चीनी मिल प्रबंधन की होगी। अगले दो दिनों तक घोषी चीनी मिल चालू रखकर कटी हुई पर्चियों के किसानों का गन्ना का पेराई किया जाएगा।
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सुबह नौ बजे मिल के बंद होने और गन्ना किसानों को सठियांव चीनी मिल में स्थानांतरित करने के फैसले पर पूर्व ब्लाक प्रमुख डाॅ. सुजीत सिंह और अवधेश बागी के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन किया।
भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष मिथिलेश यादव ने कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। चेतावनी दी कि यदि मिल प्रबंधन अनदेखी करेगा, तो वे सड़क पर उतरेंगे।
वहीं सपा नेता सुजीत सिंह ने मिल प्रबंधन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे लूट का अड्डा बताया। काफी देर तक किसान चीनी मिल में धरने पर बैठे रहे।
इससे पहले दो घंटे के घेराव के बाद 11 बजे उपसभापति रजनीश राय के नेतृत्व में बोर्ड के पदाधिकारियों ने चीनी मिल के जीएम महेंद्र प्रसाद के साथ बैठक की। बोर्ड के डायरेक्टर करुणेश राय, अर्पित सिंह और अखिलेश सिंह ने जीएम पर मामले की जानकारी न देने का आरोप लगाया।
वहीं प्रबंधक से सभापति कक्ष में दोपहर 12 बजे वार्ता के बाद कोई निष्कर्ष नहीं निकलने पर पुनः गेस्ट हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए।
10 से 15 मिनट में छह बार वार्ता करने चीनी मिल के प्रबंधक महेंद्र प्रताप आए मगर किसानों ने किसी पर किसान सठियांव गन्ना ले जाने को तैयार नहीं थे। इस दौरान रामाश्रय राय, शिवचंद यादव, सुजीत सिंह, अवधेश बागी और संतोष सिंह,सुधीर यादव, अनिल यादव आदि उपस्थित रहे थे।
प्रबंधक महेंद्र प्रताप किसानों और नेताओं के सामने छह बार आए। उन्होंने दोपहर 1:45 बजे कहा कि 22 फरवरी तक किसानों को गन्ना लाने को लेकर पर्ची जारी है।
शेष अन्य किसानों के गन्ने को 23 से गन्ना समिति को अवगत कराया जाएगा। इसपर किसान एवं किसान नेताओं ने लिखित आश्वासन मांगा तो नहीं दिया। इसके पूर्व किसानों ने मांग की कि किसान मिल में किसानों के गन्ने का तौल की जाए तो भुगतान भी घोसी चीनी मिल से हो। इसपर मिल ने स्पष्ट किया कि तौल गन्ना समिति के अनुसार होगी और भुगतान सठियांव चीनी मिल की ओर से किया जाएगा।
किसानों ने तौल करने के दौरान घोसी से सठियांव मिल गन्ना ले जाने के किराये के रूप में कोई कटौती न की जाए। लेकिन किसी बात को जीएम लिखित रूप से देने से बचते रहे। इस संबंध में उनसे बात करने के लिए संपर्क किया लेकिन फोन नहीं उठाया।
