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Mau News: लेप्टोस्पायरोसिस जांच होगी शुरू, मरीजों को मिलेगी समय पर रिपोर्ट
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जिले के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। संयुक्त जिला अस्पताल की इंटीग्रेटेड लैब में अब लेप्टोस्पायरोसिस की जांच जल्द शुरू होगी। इससे पहले इस बीमारी की पुष्टि के लिए मरीजों के सैंपल बाहर भेजे जाते थे।
इस कारण जांच रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग जाते थे। अब जिले में ही जांच सुविधा उपलब्ध होने से रोग की जल्द पहचान और समय पर उपचार संभव हो सकेगा।
जिला अस्पताल के लैब इंचार्ज दारोगा सिंह के अनुसार, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की जांच शुरू होने के बाद अब जिला अस्पताल में लेप्टोस्पायरोसिस जांच की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसे लेकर कवायद शुरू हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस एक गंभीर संक्रामक रोग है, जिसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। यह बीमारी लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया से होती है और जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसे सामान्य तौर पर ‘रैट फीवर’ भी कहा जाता है।
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उन्होंने बताया कि यह बैक्टीरिया शरीर में कटी-फटी त्वचा, आंखों, नाक या मुंह के माध्यम से प्रवेश करता है। संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंखों का लाल होना, उल्टी-दस्त और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
कोट--
मरीजों को अधिक से अधिक जांच सुविधाएं जिले में ही उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में लेप्टोस्पायरोसिस जांच शुरू करने की कवायद की जा रही है। आने वाले समय में ब्लड ग्रुप सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचों की सुविधाएं भी चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएंगी।
-डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
इस कारण जांच रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग जाते थे। अब जिले में ही जांच सुविधा उपलब्ध होने से रोग की जल्द पहचान और समय पर उपचार संभव हो सकेगा।
जिला अस्पताल के लैब इंचार्ज दारोगा सिंह के अनुसार, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की जांच शुरू होने के बाद अब जिला अस्पताल में लेप्टोस्पायरोसिस जांच की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसे लेकर कवायद शुरू हो चुकी है।
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उन्होंने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस एक गंभीर संक्रामक रोग है, जिसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। यह बीमारी लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया से होती है और जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसे सामान्य तौर पर ‘रैट फीवर’ भी कहा जाता है।
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उन्होंने बताया कि यह बैक्टीरिया शरीर में कटी-फटी त्वचा, आंखों, नाक या मुंह के माध्यम से प्रवेश करता है। संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंखों का लाल होना, उल्टी-दस्त और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
कोट
मरीजों को अधिक से अधिक जांच सुविधाएं जिले में ही उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में लेप्टोस्पायरोसिस जांच शुरू करने की कवायद की जा रही है। आने वाले समय में ब्लड ग्रुप सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचों की सुविधाएं भी चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएंगी।
-डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल