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Mau News: सांसद राजीव राय ने लोकसभा में उठाया एम्स का मुद्दा, पूर्वांचल और बिहार के लोगों को मिलेगा लाभ
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घोसी लोकसभा क्षेत्र से सपा सांसद राजीव राय ने संसद में नियम 377 के अधीन मऊ में एम्स खोलने की आवाज उठाई। उन्होंने जनपद में एम्स की स्थापना के लिए परदहा काटन मिल की जमीन पर खोलने की बात कही।
बताया कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति काफी कमजोर है और उन्नत चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बहुत सीमित है। क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग है कि जनपद में एम्स की स्थापना की जाए, ताकि बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। एम्स से जनपद के साथ-साथ आसपास के जिले बलिया, गाजीपुर और आजमगढ़ को भी लाभ मिलेगा।
वर्तमान में पूर्वाचल का एकमात्र एम्स गोरखपुर में है, जो जनपद से 100 किलोमीटर से अधिक दूर है, जिससे मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और वहां अत्यधिक दबाव बना रहता है।
जनपद प्रमुख सड़कों के किनारे स्थित है, जहां जनसंख्या और यातायात अधिक होने के कारण सड़क दुर्घटनाएं भी ज्यादा होती है। लेकिन यहां गंभीर चोटों के इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर जैसी विशेष सुविधाएं नहीं है, जिसके कारण मरीजों को वाराणसी या गोरखपुर ले जाना पड़ता है और इलाज में देरी होती है।
एम्स के लिए परदहा मिल की जमीन या अन्य उपलब्ध भूमि दी जा सकती है। कहा कि एम्स की स्थापना के लिए जमीन बाधा नहीं बनेगी, जरूरत होने पर वह अपनी जमीन भी दे सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज, तीन प्रमुख अस्पताल के साथ नौ सीएचसी और 41 पीएचसी का हो रहा संचालन
जनपद में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में अभी कोपागंज के कसारा में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज का संचालन हो रहा है। जनपद मुख्यालय पर जिला महिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल के साथ टडियांव में सौ बेड के अस्पताल का संचालन हो रहा है। अनेक क्षेत्रों में नौ सीएचसी के साथ करीब 41 पीएचसी पर भी मरीजों का उपचार होता है। आंकड़ों के अनुसार सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर पर रोजाना करीब पांच हजार मरीजों का उपचार किया जाता है। निजी क्षेत्र की बात करे तो स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 36 अस्पताल, 32 नर्सिंग होम और 70 क्लीनिक का पंजीकरण है। सरकारी और निजी अस्पतालों में रोजाना 15 हजार से अधिक मरीजों का उपचार किया जाता है।
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बताया कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति काफी कमजोर है और उन्नत चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बहुत सीमित है। क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग है कि जनपद में एम्स की स्थापना की जाए, ताकि बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। एम्स से जनपद के साथ-साथ आसपास के जिले बलिया, गाजीपुर और आजमगढ़ को भी लाभ मिलेगा।
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वर्तमान में पूर्वाचल का एकमात्र एम्स गोरखपुर में है, जो जनपद से 100 किलोमीटर से अधिक दूर है, जिससे मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और वहां अत्यधिक दबाव बना रहता है।
जनपद प्रमुख सड़कों के किनारे स्थित है, जहां जनसंख्या और यातायात अधिक होने के कारण सड़क दुर्घटनाएं भी ज्यादा होती है। लेकिन यहां गंभीर चोटों के इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर जैसी विशेष सुविधाएं नहीं है, जिसके कारण मरीजों को वाराणसी या गोरखपुर ले जाना पड़ता है और इलाज में देरी होती है।
एम्स के लिए परदहा मिल की जमीन या अन्य उपलब्ध भूमि दी जा सकती है। कहा कि एम्स की स्थापना के लिए जमीन बाधा नहीं बनेगी, जरूरत होने पर वह अपनी जमीन भी दे सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज, तीन प्रमुख अस्पताल के साथ नौ सीएचसी और 41 पीएचसी का हो रहा संचालन
जनपद में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में अभी कोपागंज के कसारा में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज का संचालन हो रहा है। जनपद मुख्यालय पर जिला महिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल के साथ टडियांव में सौ बेड के अस्पताल का संचालन हो रहा है। अनेक क्षेत्रों में नौ सीएचसी के साथ करीब 41 पीएचसी पर भी मरीजों का उपचार होता है। आंकड़ों के अनुसार सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर पर रोजाना करीब पांच हजार मरीजों का उपचार किया जाता है। निजी क्षेत्र की बात करे तो स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 36 अस्पताल, 32 नर्सिंग होम और 70 क्लीनिक का पंजीकरण है। सरकारी और निजी अस्पतालों में रोजाना 15 हजार से अधिक मरीजों का उपचार किया जाता है।