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Mau News: प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज, सचिव निलंबित
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सरकारी धन गबन के मामले में हमेशा चर्चाओं में रहने वाली ग्राम विकास अधिकारी अनुपमा सिंह पर एक बार फिर कार्रवाई की गाज गिरी है। परदहां ब्लॉक के हरपुर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में खर्च किए गए 20.14 लाख रुपये का हिसाब नहीं दे पाने पर डीएम ने अनुपमा सिंह को निलंबित कर दिया है, जबकि ग्राम प्रधान तारा देवी का वित्तीय अधिकार सीज कर दिया गया है।
जांच के दौरान रिपोर्ट तैयार करते समय दोनों से बचाव पक्ष में बयान देने को कहा गया था, लेकिन इन्होंने न तो कोई स्पष्टीकरण दिया और न ही खर्च का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।
गांव निवासी भगत सिंह की शिकायत पर जिला कृषि अधिकारी और जल निगम के अवर अभियंता के नेतृत्व में गठित टीम ने 12 नवंबर 2025 को मौके पर पहुंचकर विकास कार्यों की स्थलीय और अभिलेखीय जांच की थी।
जांच में कई ऐसे कार्य पाए गए, जो हुए ही नहीं थे, लेकिन कागजों पर दर्शाकर भुगतान किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि हरपुर प्राथमिक विद्यालय से चंदन के घर तक इंटरलॉकिंग कार्य पर 3.17 लाख रुपये का भुगतान कराया गया, जबकि इसी कार्य के लिए 20 मार्च 2023 को ही क्षेत्र पंचायत से 8.55 लाख रुपये का भुगतान हो चुका था।
प्रधान और सचिव जांच के दौरान कोई भी बिल-बाउचर उपलब्ध नहीं करा सके। ग्राम प्रधान के खाते में विधि-विरुद्ध 80 हजार 936 रुपये का भुगतान किया गया, जिसे मिस्त्री-मजदूरों को भुगतान दिखाया गया, लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।
15 मीटर लंबी और छह मीटर चौड़ी इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण में एक परिवार के लिए 3 लाख 67 हजार 700 रुपये खर्च पाए गए। एक डस्टबिन के भुगतान में 80 हजार रुपये का हिसाब नहीं मिला। बिना खड़ंजा और नाली निर्माण के 4 लाख 81 हजार 447 रुपये खर्च करने की पुष्टि हुई।
नाली निर्माण में 1.96 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिला। इंटरलॉकिंग निर्माण में कागजों की हेराफेरी कर 1.62 लाख रुपये के गबन की बात सामने आई। इसी कार्य में 2.25 लाख और 1.80 लाख रुपये का भुगतान भी दर्शाया गया है।
उपलब्ध कराई गई पत्रावली में बाउचर और माप पुस्तिका (मेजरमेंट बुक) से धनराशि का मिलान नहीं हुआ। इस पर प्रधान और सचिव ने गोलमोल जवाब दिया। एक अन्य कार्य में 4.05 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिला और भुगतान गलत पाया गया।
अनुपमा सिंह पर आय से अधिक संपत्ति की शिकायत भी जिलाधिकारी से की गई, लेकिन उस पर कोई जांच नहीं कराई गई। जमीन खरीद के दौरान स्टांप पर सरकारी पद छिपाते हुए स्वयं को गृहिणी दर्शाया गया।
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गांव निवासी भगत सिंह की शिकायत पर जिला कृषि अधिकारी और जल निगम के अवर अभियंता के नेतृत्व में गठित टीम ने 12 नवंबर 2025 को मौके पर पहुंचकर विकास कार्यों की स्थलीय और अभिलेखीय जांच की थी।
जांच में कई ऐसे कार्य पाए गए, जो हुए ही नहीं थे, लेकिन कागजों पर दर्शाकर भुगतान किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि हरपुर प्राथमिक विद्यालय से चंदन के घर तक इंटरलॉकिंग कार्य पर 3.17 लाख रुपये का भुगतान कराया गया, जबकि इसी कार्य के लिए 20 मार्च 2023 को ही क्षेत्र पंचायत से 8.55 लाख रुपये का भुगतान हो चुका था।
प्रधान और सचिव जांच के दौरान कोई भी बिल-बाउचर उपलब्ध नहीं करा सके। ग्राम प्रधान के खाते में विधि-विरुद्ध 80 हजार 936 रुपये का भुगतान किया गया, जिसे मिस्त्री-मजदूरों को भुगतान दिखाया गया, लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।
15 मीटर लंबी और छह मीटर चौड़ी इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण में एक परिवार के लिए 3 लाख 67 हजार 700 रुपये खर्च पाए गए। एक डस्टबिन के भुगतान में 80 हजार रुपये का हिसाब नहीं मिला। बिना खड़ंजा और नाली निर्माण के 4 लाख 81 हजार 447 रुपये खर्च करने की पुष्टि हुई।
नाली निर्माण में 1.96 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिला। इंटरलॉकिंग निर्माण में कागजों की हेराफेरी कर 1.62 लाख रुपये के गबन की बात सामने आई। इसी कार्य में 2.25 लाख और 1.80 लाख रुपये का भुगतान भी दर्शाया गया है।
उपलब्ध कराई गई पत्रावली में बाउचर और माप पुस्तिका (मेजरमेंट बुक) से धनराशि का मिलान नहीं हुआ। इस पर प्रधान और सचिव ने गोलमोल जवाब दिया। एक अन्य कार्य में 4.05 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिला और भुगतान गलत पाया गया।
अनुपमा सिंह पर आय से अधिक संपत्ति की शिकायत भी जिलाधिकारी से की गई, लेकिन उस पर कोई जांच नहीं कराई गई। जमीन खरीद के दौरान स्टांप पर सरकारी पद छिपाते हुए स्वयं को गृहिणी दर्शाया गया।

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