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Mau News: हरे चारे वाले खेतों की नियमित करें सिंचाई
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मऊ। अप्रैल माह में ही तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पार हो गया था। अभी तपिश से कुछ राहत है। गर्मियों में मवेशियों के लिए हरे चारे की व्यवस्था जुटाना किसी चुनौती से कम नहीं है। मार्च और अप्रैल माह में बोई गई चरी पानी-सिंचाई के अभाव में जहरीली भी हो जाती है। पशुपालक ने यदि सावधानी नहीं बरती गई तो, यह मवेशियों के जानलेवा तक साबित होती है।
वैशाख माह में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान होने आमजन के साथ ही मवेशी, पशु-पक्षी सभी बेहाल हैं। कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वैज्ञानिक और प्रभारी डा. विनय कुमार सिंह ने पशुपालकों को हरा चारा दिए की सलाह दी है। बताया कि मार्च और अप्रैल माह में बोई गई चरी मवेशियों को खिलाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बताया कि सिंचाई के अभाव में हरे चारे की पत्तियों में विषैला पदार्थ पनप जाता है।
बताया कि ज्वार में प्रूसिक एसिड नामक विषैला पदार्थ पाया जाता है। ऐसे में छोटी अवस्था में ज्वार को मवेशियों को नहीं खिलाना चाहिए। चरी में सायनाइड नामक जहर पनप जाता है। इसे खिलाने से मवेशियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता और कई बार तो मवेशी की जान तक चली जाती है।
पशुपालकों को चरी और हरे चारे वाले खेतों की नियमित सिंचाई करनी चाहिए और खेतों में नमी बनाए रखनी चाहिए। इससे तेज धूप के कारण पनपने वाला विषैलापन जड़ों के माध्यम से जमीन में उतर जाता है। मवेशी में बुखार और हांफने जैसे लक्षण दिखने में फोटोग्राफर की दुकान पर मिलने वाले 100 ग्राम हाइपो को पानी में घोल बनाकर पीड़ित मवेशी को दिए जाने से जल्द स्वास्थ्य लाभ मिलने लगता है।
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दुधारू पशुओं पर गर्मी का असर
मऊ। बढ़ती गर्मी का असर दुधारू पशुओं पर भी दिखाई देने लगा है। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण पशुओं का दूध उत्पादन तेजी से घट रहा है। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में पशुओं की उचित देखभाल नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। पशु चिकित्सकों ने सलाह दी है कि पशुओं को खुले में बांधने से बचें, क्योंकि तेज धूप और लू से उन्हें गंभीर नुकसान हो सकता है। पशुओं के लिए छांव की उचित व्यवस्था करें। सुबह-शाम उन्हें ठंडे पानी से नहलाएं, ताकि उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। उन्होंने यह भी बताया कि पशुओं को हरा चारा देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह उनके शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। इसके अलावा हर दो घंटे के अंतराल पर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या न हो।
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बताया कि ज्वार में प्रूसिक एसिड नामक विषैला पदार्थ पाया जाता है। ऐसे में छोटी अवस्था में ज्वार को मवेशियों को नहीं खिलाना चाहिए। चरी में सायनाइड नामक जहर पनप जाता है। इसे खिलाने से मवेशियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता और कई बार तो मवेशी की जान तक चली जाती है।
पशुपालकों को चरी और हरे चारे वाले खेतों की नियमित सिंचाई करनी चाहिए और खेतों में नमी बनाए रखनी चाहिए। इससे तेज धूप के कारण पनपने वाला विषैलापन जड़ों के माध्यम से जमीन में उतर जाता है। मवेशी में बुखार और हांफने जैसे लक्षण दिखने में फोटोग्राफर की दुकान पर मिलने वाले 100 ग्राम हाइपो को पानी में घोल बनाकर पीड़ित मवेशी को दिए जाने से जल्द स्वास्थ्य लाभ मिलने लगता है।
दुधारू पशुओं पर गर्मी का असर
मऊ। बढ़ती गर्मी का असर दुधारू पशुओं पर भी दिखाई देने लगा है। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण पशुओं का दूध उत्पादन तेजी से घट रहा है। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में पशुओं की उचित देखभाल नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। पशु चिकित्सकों ने सलाह दी है कि पशुओं को खुले में बांधने से बचें, क्योंकि तेज धूप और लू से उन्हें गंभीर नुकसान हो सकता है। पशुओं के लिए छांव की उचित व्यवस्था करें। सुबह-शाम उन्हें ठंडे पानी से नहलाएं, ताकि उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। उन्होंने यह भी बताया कि पशुओं को हरा चारा देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह उनके शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। इसके अलावा हर दो घंटे के अंतराल पर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या न हो।
