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Mau News: परीक्षा में शिक्षकों की नहीं चलेगी बीमारी की बहानेबाजी
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यूपी बोर्ड हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा में इस बार किसी भी शिक्षक की ड्यूटी नहीं काटी जाएगी, उन्हें परीक्षा में ड्यूटी देनी होगी। परीक्षा में बहाना बनाने वाले शिक्षकों पर भी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षकों के अवकाश प्रार्थनापत्र स्वीकृत नहीं किए जाएंगे।
इसके लिए निदेशालय से भी आदेश जारी कर दिए गए हैं। यदि किसी को गंभीर बीमारी है तो उन्हें सीएमओ से अस्वस्थता प्रमाण पत्र लाना होगा। यूपी बोर्ड हाईस्कूल इंटरमीडिएट परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होगी।
परीक्षा को नकलविहीन संपन्न कराने के लिए जिले में 127 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा में 76408 परीक्षार्थी शामिल होंगे। बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर यह देखा गया है कि कई प्रधानाचार्य, अध्यापक, केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक का कार्य नहीं करना चाहते हैं और ड्यूटी कटवाने के लिए बहाना बनाते है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।
बोर्ड की तरफ से भी आदेश जारी कर दिए गए हैं कि यदि कोई शिक्षक ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन करता है, तो उसको स्वीकृत न किया जाए और ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सभी शिक्षकों को ड्यूटी करनी होगी।
अधिकारियों की मानें तो शिक्षकों की ड्यूटी नहीं काटी जाएगी और न ही उनके आवेदन स्वीकृत किए जाएंगे। शिक्षकों को सिर्फ आपात स्थिति में ही मुख्य चिकित्साधिकारी से जारी अस्वस्थता प्रमाणपत्र के आधार पर ही इन्हें अवकाश मिल सकेगा।
खास बात यह है कि विभाग की ओर से उसका परीक्षण भी कराया जाएगा। उद्देश्य यह है कि यूपी बोर्ड की परीक्षा का सफल संचालन हो सके। सीएमओ के प्रमाण पत्र के बाद ही शिक्षकों को बोर्ड परीक्षा से मुक्त किया जाएगा।
इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक गौतम प्रसाद का कहना है कि बोर्ड परीक्षा को लेकर शिक्षकों की ड्यूटी नहीं काटी जाएगी और न ही उनके आवेदन स्वीकृत किए जाएंगे। बोर्ड की गाइडलाइन के अनुरुप ही अवकाश स्वीकृत होगा।
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इसके लिए निदेशालय से भी आदेश जारी कर दिए गए हैं। यदि किसी को गंभीर बीमारी है तो उन्हें सीएमओ से अस्वस्थता प्रमाण पत्र लाना होगा। यूपी बोर्ड हाईस्कूल इंटरमीडिएट परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होगी।
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परीक्षा को नकलविहीन संपन्न कराने के लिए जिले में 127 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा में 76408 परीक्षार्थी शामिल होंगे। बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर यह देखा गया है कि कई प्रधानाचार्य, अध्यापक, केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक का कार्य नहीं करना चाहते हैं और ड्यूटी कटवाने के लिए बहाना बनाते है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।
बोर्ड की तरफ से भी आदेश जारी कर दिए गए हैं कि यदि कोई शिक्षक ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन करता है, तो उसको स्वीकृत न किया जाए और ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सभी शिक्षकों को ड्यूटी करनी होगी।
अधिकारियों की मानें तो शिक्षकों की ड्यूटी नहीं काटी जाएगी और न ही उनके आवेदन स्वीकृत किए जाएंगे। शिक्षकों को सिर्फ आपात स्थिति में ही मुख्य चिकित्साधिकारी से जारी अस्वस्थता प्रमाणपत्र के आधार पर ही इन्हें अवकाश मिल सकेगा।
खास बात यह है कि विभाग की ओर से उसका परीक्षण भी कराया जाएगा। उद्देश्य यह है कि यूपी बोर्ड की परीक्षा का सफल संचालन हो सके। सीएमओ के प्रमाण पत्र के बाद ही शिक्षकों को बोर्ड परीक्षा से मुक्त किया जाएगा।
इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक गौतम प्रसाद का कहना है कि बोर्ड परीक्षा को लेकर शिक्षकों की ड्यूटी नहीं काटी जाएगी और न ही उनके आवेदन स्वीकृत किए जाएंगे। बोर्ड की गाइडलाइन के अनुरुप ही अवकाश स्वीकृत होगा।
