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Mau News: बूंदाबांदी से बढ़ी ठंड, फसलों को नुकसान होने का डर

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 11:21 PM IST
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The light rain has increased the cold, raising fears of damage to crops.
मंगलवार को अचानक मौसम बदला,छाई बदली।संवाद
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बीते दिनों मौसम के गर्म होने के बाद कोहरे की दस्तक अब एक बार फिर पछुआ तेज हवाएं, जनपद में मौसम हर दिन करवट ले रहा है। मंगलवार को आसमान में बादलों की मौजूदगी के बीच पछुआ तेज हवाओं ने ठंड का एहसास कराया।
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शाम को जनपद के कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी भी हुई। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 24 डिग्री और न्यूनतम 13 डिग्री था। दो दिन से जनपद का तापमान पुरी तरह सामान्य बना हुआ है।
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सोमवार की अपेक्षा मंगलवार को हवाओं की गति दोगुना से भी अधिक होकर 18 किलो मीटर प्रतिघंटे से चलती रही। सुबह 6:39 पर सूर्योदय हुआ। जिले की वायु गुणवत्ता 96 रही तो आद्रता 63 फीसदी थी।
कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वैज्ञानिक विनय कुमार सिंह ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद प्रदेश की कुछ हिस्सों में बारिश से मौसम का रुख बदल गया है। मौसम विभाग ने जनपद में दो दिनों तक येलो अलर्ट जारी किया है।
फरवरी महीने में बेमौसम बारिश संभावना ने रबी फसलों के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम का यही मिज़ाज बना रहा, तो गेहूं, सरसों और चना जैसी प्रमुख रबी फसलों की पैदावार में 10 प्रतिशत से अधिक गिरावट आ सकती है।
इस समय फसलें संवेदनशील अवस्था में हैं, ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है। बारिश से सरसों के फूल और फलियां झड़ने लगती हैं, जिससे सीधे उत्पादन पर असर पड़ता है।
बादल छाए रहने और अधिक नमी के कारण चना व मसूर की फसलों में इल्लियों का प्रकोप बढ़ सकता है। गेहूं में बालियां निकलने के समय बारिश होने से दानों का आकार छोटा रह जाता है और गुणवत्ता प्रभावित होती है। सलाह दिया कि
किसान खेतों में पानी जमा न होने दें, तुरंत जल निकासी की व्यवस्था करें। फसलों पर कीट या रोग के लक्षण दिखते ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें। सरसों में माहू दिखाई देने पर थियामेथोक्सम का तय मात्रा में छिड़काव किया जा सकता है।
गिरने की आशंका वाली फसलों में अनावश्यक सिंचाई से बचें। मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और उसी अनुसार कृषि कार्य करें। बताया कि बहुत हल्की और छिटपुट बारिश फसलों के लिए लाभकारी हो सकती है, लेकिन लगातार बारिश और ओलावृष्टि नुकसानदेह साबित होगी।
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