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Mau News: जिला जज ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका की अपील खारिज की
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार यादव ने बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर के प्रशासनिक अधिकारी को धमकी देने के मामले में हुई सजा के विरुद्ध पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका की ओर से दाखिल अपील खारिज कर दी। साथ ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह के 24 दिसंबर 2025 के निर्णय की पुष्टि कर दी।
जिला जज ने यह निर्णय बचाव पक्ष और एडीजीसी फौजदारी धीरेंद्र प्रताप सिंह के तर्क सुनने तथा पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पारित किया।
बताया गया कि सीजेएम ने परदहां ब्लॉक के पूर्व प्रमुख रमेश सिंह को बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर के प्रशासनिक अधिकारी को धमकी देने के मामले में दोषी पाते हुए छह माह की सजा और 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया था। इसके विरुद्ध रमेश सिंह काका की ओर से अपील दाखिल कर सजा निरस्त करने का अनुरोध किया गया था। मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कुशमौर का है।
अभियोजन के अनुसार, बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर के प्रशासनिक अधिकारी सुशील कुमार सिंह की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। आरोप था कि 6 अक्तूबर 2009 की रात आरोपी रमेश सिंह काका, महेंद्र सिंह उर्फ पप्पू, राजीव कुमार सिंह, गोपाल दूबे और अन्य लोग उनके आवास पर पहुंचे तथा संविदा कर्मचारियों के ठेके में कमीशन की मांग करने लगे। मना करने पर धमकी दी गई।
पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद रमेश सिंह काका, महेंद्र सिंह उर्फ पप्पू, राजीव कुमार सिंह और गोपाल दूबे को धमकी देने का दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी।
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जिला जज ने यह निर्णय बचाव पक्ष और एडीजीसी फौजदारी धीरेंद्र प्रताप सिंह के तर्क सुनने तथा पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पारित किया।
बताया गया कि सीजेएम ने परदहां ब्लॉक के पूर्व प्रमुख रमेश सिंह को बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर के प्रशासनिक अधिकारी को धमकी देने के मामले में दोषी पाते हुए छह माह की सजा और 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया था। इसके विरुद्ध रमेश सिंह काका की ओर से अपील दाखिल कर सजा निरस्त करने का अनुरोध किया गया था। मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र के कुशमौर का है।
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अभियोजन के अनुसार, बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर के प्रशासनिक अधिकारी सुशील कुमार सिंह की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। आरोप था कि 6 अक्तूबर 2009 की रात आरोपी रमेश सिंह काका, महेंद्र सिंह उर्फ पप्पू, राजीव कुमार सिंह, गोपाल दूबे और अन्य लोग उनके आवास पर पहुंचे तथा संविदा कर्मचारियों के ठेके में कमीशन की मांग करने लगे। मना करने पर धमकी दी गई।
पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। सीजेएम ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद रमेश सिंह काका, महेंद्र सिंह उर्फ पप्पू, राजीव कुमार सिंह और गोपाल दूबे को धमकी देने का दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी।