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Mau News: बाढ़ वाले 51 गांवों में तैनात होंगे दो सौ आपदा मित्र, पिछले साल से दोगुनी हुई संख्या
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बारिश के साथ ही सरयू नदी में बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जन-धन हानि रोकने के लिए 200 आपदा मित्रों को तैनात किया जाएगा। इनमें 100 प्रशिक्षित आपदा मित्र और 100 होमगार्ड जवान शामिल हैं।
सिंचाई और स्वास्थ्य विभाग को भी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिला प्रशासन ने इसके अलावा वालंटियर की तैनाती के साथ सेवा भाव से जुड़ने वाले आपदा मित्रों से इससे जुड़ने की अपील की है।
इसका उद्देश्य है कि अधिक लोगों को जोड़कर बाढ़ जैसी स्थिति से घोसी और मधुबन तहसील के प्रभावित 51 गांवों के हजारों ग्रामीणों की मदद की जा सके। जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने बताया कि जिला प्रशासन बाढ़ की संभावना को लेकर पहले से अलर्ट मोड पर है।
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घोसी, मधुबन के बाढ़ प्रभावित 51 गांवों को चिह्नित कर वहां सिंचाई विभाग की टीम द्वारा सरयू नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। साथ ही दोहरीघाट, मधुबन में निर्माणाधीन बाढ़ योजनाओं की मॉनिटरिंग उनके स्तर से की जा रही है।
बताया कि मधुबन में दो कटान रोधी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनका उद्देश्य सरयू नदी की धारा को नियंत्रित कर तटों को सुरक्षित बनाना है। इन परियोजनाओं से दो गांव और लगभग 8400 की आबादी को सुरक्षा मिलेगी।
करीब 1275 हेक्टेयर कृषि भूमि भी कटान से बचेगी। परियोजना के तहत 1500 मीटर लंबाई में स्टोन बोल्डर से लॉन्चिंग एप्रन और प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जा रहा है। छह पंक्तियों में परक्यूपाइन संरचनाएं स्थापित की जाएंगी, जिससे नदी की धारा नियंत्रित होगी और कटान में कमी आएगी।
सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों पर निगरानी
घोसी में अवरादाड़, चिउटीडाड़, नई बस्ती, सरहरा जमीन सरहरा, ब्रह्मचारी बाबा की कुटी, मुक्तिधाम, रामघाट और मनौली रामपुर जैसे गांव शामिल हैं। मधुबन तहसील के गांव सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने बीते सोमवार को बिनटोलिया का निरीक्षण किया, जहां सरयू नदी के कटान से कई गांव प्रभावित हैं। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही बाढ़ से निपटने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई गई है। संबंधित एसडीएम को निगरानी का निर्देश दिया गया था। वहीं, सरयू नदी में संभावित बाढ़ को लेकर जिला प्रशासन ने आपदा मित्रों की संख्या दोगुनी करने की योजना तैयार की है। जिले में मौजूदा 100 आपदा मित्रों के अलावा 100 आपदा मित्रों की मांग को लेकर जिला प्रशासन ने प्रस्ताव शासन को भेजा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर आपदा मित्रों को भर्ती करने की योजना तैयार की गई है।
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सिंचाई और स्वास्थ्य विभाग को भी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिला प्रशासन ने इसके अलावा वालंटियर की तैनाती के साथ सेवा भाव से जुड़ने वाले आपदा मित्रों से इससे जुड़ने की अपील की है।
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इसका उद्देश्य है कि अधिक लोगों को जोड़कर बाढ़ जैसी स्थिति से घोसी और मधुबन तहसील के प्रभावित 51 गांवों के हजारों ग्रामीणों की मदद की जा सके। जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने बताया कि जिला प्रशासन बाढ़ की संभावना को लेकर पहले से अलर्ट मोड पर है।
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घोसी, मधुबन के बाढ़ प्रभावित 51 गांवों को चिह्नित कर वहां सिंचाई विभाग की टीम द्वारा सरयू नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। साथ ही दोहरीघाट, मधुबन में निर्माणाधीन बाढ़ योजनाओं की मॉनिटरिंग उनके स्तर से की जा रही है।
बताया कि मधुबन में दो कटान रोधी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनका उद्देश्य सरयू नदी की धारा को नियंत्रित कर तटों को सुरक्षित बनाना है। इन परियोजनाओं से दो गांव और लगभग 8400 की आबादी को सुरक्षा मिलेगी।
करीब 1275 हेक्टेयर कृषि भूमि भी कटान से बचेगी। परियोजना के तहत 1500 मीटर लंबाई में स्टोन बोल्डर से लॉन्चिंग एप्रन और प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जा रहा है। छह पंक्तियों में परक्यूपाइन संरचनाएं स्थापित की जाएंगी, जिससे नदी की धारा नियंत्रित होगी और कटान में कमी आएगी।
सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों पर निगरानी
घोसी में अवरादाड़, चिउटीडाड़, नई बस्ती, सरहरा जमीन सरहरा, ब्रह्मचारी बाबा की कुटी, मुक्तिधाम, रामघाट और मनौली रामपुर जैसे गांव शामिल हैं। मधुबन तहसील के गांव सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने बीते सोमवार को बिनटोलिया का निरीक्षण किया, जहां सरयू नदी के कटान से कई गांव प्रभावित हैं। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही बाढ़ से निपटने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई गई है। संबंधित एसडीएम को निगरानी का निर्देश दिया गया था। वहीं, सरयू नदी में संभावित बाढ़ को लेकर जिला प्रशासन ने आपदा मित्रों की संख्या दोगुनी करने की योजना तैयार की है। जिले में मौजूदा 100 आपदा मित्रों के अलावा 100 आपदा मित्रों की मांग को लेकर जिला प्रशासन ने प्रस्ताव शासन को भेजा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर आपदा मित्रों को भर्ती करने की योजना तैयार की गई है।